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411 समाचार
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मिर्ज़ा इस्माइल

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मिर्ज़ा मुहम्मद इस्माइल सर केसीआईई ओबीई सीआईई सीएसटीजे Diwan Sir Mirza Ismail.jpg मैसूर, जयपुर और हैदराबाद के दीवान हैदराबाद के दीवान 1946 1947 मीर उस्मान अली ख़ान मुहम्मद अहमद सैयद खान छतरी मुहम्मद अहमद सैयद खान छतरी जयपुर के दीवान 1942 1946 मान सिंह द्वितीय मैसूर राज्य के 22वें दीवान 1 मई 1926 1941 कृष्णराज वोडेयार चतुर्थ, जयचमराजा वोडेयार सर अल्बियन राजकुमार बनर्जी सर एन माधव राव 1883 10 24 y बेंगलुरु, मैसूर राज्य, ब्रिटिश भारत 1959 1 5 1883 10 24 y बंगलौर, कर्नाटक, भारत मैसूर के दीवान (1926–1941)जयपुर के दीवान (1942–1946)हैदराबाद के दीवान (1946–1947) ज़ीबुंदेह बेगम शिराज़ी मिर्ज़ा हुमायूँमिर्ज़ा शाह ताज बेगममिर्ज़ा गौहर ताज बेगम आग़ा अली असकर (दादा)शाकेरेह खलीली (पौत्री)तैयबजी परिवार (ससुराल) सर मिर्ज़ा मुहम्मद इस्माइल अमीन-उल-मुल्क़ (24 अक्टूबर 1883 – 5 जनवरी 1959) भारतीय पुलिस अधिकारी और राजनेता थे। वो जयपुर, हैदराबाद और मैसूर के दीवान रहे।Page 29 Issue 34470, 4 January 1938 London Gazette The Gazette https://www.thegazette.co.uk/London/issue/34470/page/29 2021-06-14 www.thegazette.co.ukP. 254-258, Business Legends by गीता पिरामल (1998) – प्रकाशक: विकिंग पेंगुइन इंडिया भारतीय वकील और राजनेता सर सी पी रामस्वामी अय्यर के अनुसार वो "भारत के सबसे चतुर व्यक्तियों में से एक" थे। उनके दीर्घाकिल दोस्त चन्द्रशेखर वेंकटरमन के अनुसार, "उनके ज्ञान की गहराई, मानवीय व सांस्कृतिक मूल्यों की गहरी समझ के साथ-साथ उनकी सुलभता और व्यक्तिगत आकर्षण ने उन्हें एक महान और अत्यधिक सफल प्रशासक बनाया।" शुरूआती जीवन मिर्ज़ा इस्माइल का जन्म 24 अक्टूबर 1883 को बेंगलुरु में हुआ। उनके पिता का नाम आगा जान मोहम्मद ख़ाज़िम शिराज़ी था जो मैसूर साम्राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सहायक जिला आयुक्त रहे। उनके पिता पारसी मूल के थे। उनके परिवार का मैसूर महल से पुराने सम्बंध रहे हैं। उनके दादा आग़ा अली अस्कर शिराज़ी शाही अस्तबल की देखभाल की और शाही घुड़सवार सेना को प्रशिक्षित करने के साथ घोड़े उपलब्ध भी करवाते थे। इस्माइल स्वयं युवराज कृष्णराज वोडेयार चतुर्थ के निकटम मित्र थे जो बाद में महाराजा बने। युवा राजकुमार और इस्माइल बचपन से ही गहरे मित्र थे। दोनों ही बचपन से उत्कृष्ट घुड़सवार बनने का प्रयास करते थे और दोनों के मन में राज्य के लिए बड़े-बड़े सपने थे। बाद में वो सर स्टुअर्ट फ्रेजर के अधीन शाही निजी महल स्कूल में सहपाठी बने। इस्माइल ने सेंट पैट्रिक कॉलेज बंगलौर से सन् 1904 में अपनी शिक्षा पूरी की। इसके बाद वो मैसूर के सहायक पुलिस अधीक्षक बनेKoppal Basavaraj Hyderabad Liberation - 10 http://www.dharwad.com/nimmaputa/hyblib10.html dead https://web.archive.org/web/20130729072726/http://www.dharwad.com/nimmaputa/hyblib10.html 2013-07-29 2018-01-01 Dharwad.comLeaving a stamp on history http://iecolumnists.expressindia.com/full_column.php?content_id=86097 dead https://web.archive.org/web/20061116042444/http://iecolumnists.expressindia.com/full_column.php?content_id=86097 16 नवम्बर 2006 2006-11-14 dmy-all शासनाधिकारी तात्कालिक महाराजा कृष्णराज वोडेयार चतुर्थ के कार्यकाल में इस्माइल महाराजा के निजी सचिव बन गये। महाराजा को उनके प्राशसनिक कार्यों पर बहुत विश्वास था और उनके अनुसार इस्माइल का प्रशासनिक कौशल और उन्हें लागू करने की क्षमता उत्कृष्ठ थी। यह वह समय था जब महाराजा ने मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या से इस्माइल को परामर्श देने का आग्रह किया। मैसूर के दीवन सन् 1926 में सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या ने महाराजा कृष्णराज वोडेयार को मैसूर का दीवान बनाने के लिए अनुसंशित किया।Welcome to Mysore Dasara http://www.mysoredasara.com/html/personalities.htm usurped https://web.archive.org/web/20070826131814/http://www.mysoredasara.com/html/personalities.htm 26 August 2007 www.mysoredasara.com परियोजनायें एवं पहल युवराज कांतिरव नरसिंहराज वाडियार द्वारा तैयार करवाया बंगलोर टाउन हॉल की डिजाइन इस्माइल द्वारा तैयार की गयी थी। भारत में पहला ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम भी उनके द्वारा ही लागू किया गया था। वो अच्छे प्रशासक थे और लोगों की समस्याओं को बहुत आसानी से हल करते थे। अपने चौदह वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने मैसूर राज्य में निजी और सार्वजनिक दोनो क्षेत्रों में औद्योगिकरण के क्षेत्र में बहुत विकास किया। उनके समय में शिमोगा की चीनी मिल और बदंवाल का खादी निर्माण केन्द्र भी स्थापित हुये। उस समय लंदन में एक व्यापार आयुक्त भी नियुक्त किया गया। उनके दीवानी कार्यकाल के दौरान बेंगलुरु में कांच की फैक्ट्री सहित कागज, सीमेंट, स्टील, उर्वरक, चीनी और विद्युत् बल्ब के कारखाने भी स्थापित हुये। वैसे तो उनका कोई धार्मिक भेदभाव देखने को नहीं मिलता लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने बंगलुरु में मस्जिद स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया: सन् 1940 में भारत में धार्मिक संघर्ष की पराकाष्ठा के समय बंगलुरु में टाउन हॉल और कृष्णराजेन्द्र मार्केट के निकट जामिया मस्जिद की नींव का पत्थर रखा। बैंगलोर दंगे इस्माइल प्रशासन के बड़े कामों में विभिन्न सार्वजनिक झड़पों से निबटना भी शामिल है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा चलाए गए लोकप्रिय आन्दोलनों का सामना करने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। एक तरफ उन्हें महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे बड़े कांग्रेस के नेताओं के साथ अच्छे सम्बंध रखने थे तो दूसरी तरफ महाराजा की रुचियों का भी ध्यान रखना था; उन्होंने बंगलुरु में दंगे भड़कने से रोकने के लिए कांग्रेस के आंदोलनों को पर्याप्त रूप से सीमित रखा। सन् 1940 में महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ के निधन के बाद भी महाराजा जयचमराजा वोडेयार ने भी उन्हें दीवन के पद पर रखा। हालांकि उन्होंने अन्तरविरोधों के कारण सन् 1941 में त्यागपत्र दे दिया। गोलमेज सम्मेलन महाराजा के दीवान के रूप में नवम्बर 1930 से जनवरी 1931 तक इस्माइल ने राज्य का विभिन्न गोलमेज सम्मेलनों में प्रतिनिधित्व किया। प्रथम गोलमेज सम्मेलनDwivedi Rakesh https://books.google.com/books?id=tjmC1nnWVC8C&q=1st+round+table+conference+sir+mirza+ismail&pg=SA1-PA115 Gs In 60 Days Tata McGraw-Hill Education 978-0-07-067078-5 115 en 14 June 2021 दूसरा गोलमेज सम्मेलनSecond Round Table Conference 1931 - GKToday https://www.gktoday.in/gk/second-round-table-conference-1931/ 14 June 2021 gktoday (.) in2019-08-25 Highlights from second & third Round table Conference:- SSC 2019 http://www.ownguru.com/blog/highlights-from-second-third-round-table-ssc-2019/ 14 June 2021 OwnTVPratt Frederick G. 1932 The Indian Round Table Conference: Second Session https://www.jstor.org/stable/2749987 Pacific Affairs 5 2 151–167 10.2307/2749987 2749987 14 June 2021Ismail (amin-ul-mulk) Sir Mirza Mahomed https://books.google.com/books?id=tbm1AAAAIAAJ&q=2nd+round+table+conference+sir+mirza+ismail Speeches 1936 Printed at the Government Press en 14 June 2021 तीसरा गोलमेज सम्मेलनhttp://www.worldcat.org/oclc/564838708 The who's who in Madras A pictorial who's who of distinguished personages, princes, zemindars and noblemen in the Madras Presidency. 1932 Pearl Press. 67 English 564838708 14 June 2021 जयपुर के प्रधानमंत्री thumb|उनके नाम पर जयपुर में मिर्ज़ा इस्माइल मार्ग सन् 1941 में उन्होंने जयपुर राज्य के प्रधानमंत्री का पद प्राप्त किया। उनके कार्यकाल के दौरान जयपुर में कारखानों की स्थापना हुई। जयपुर पहुँचने के ठीक बाद उन्होंने सन् 1942 में संवैधानिक सुधार समिति गठित की। उनके इन कार्यों से महाराजा मान सिंह द्वितीय का कद बढ़ा और उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दरबार में स्थान मिला। जयपुर की एक मुख्य मार्ग का नाम उनकी याद में मिर्ज़ा इस्माइल मार्ग रखा गया है। घनश्यामदास बिड़ला इस्माइल के अच्छे दोस्त थे और जयपुर में उनकी परियोजनाओं का वित्तपोषण करते थे। जयपुर में यूनाइटेड कोमर्शियल बैंक की शाखा की स्थापना भी बिड़ला की अध्यक्षता में सन् 1945 में हुई। नेशनल बॉलबीयरिंग कंपनी की स्थापना भी इस्माइल के सुझाव के अनुसार हुआ। उन्होंने सन् 1945 में भारतीय लेखक परिषद् पेन इंटरनेशनल की अध्यक्षता की। इसमें सरोजिनी नायडू और एडवर्ड मॉर्गन फार्स्टर ने भाग लिया था। प्रधानमंत्री के पद से त्यागपत्र देने के बाद भी वो राज्य के परामर्शदाता बने रहे और सार्वजनिक संरचना विकास परियोजनाओं से संबंधित कार्यों से जुड़े रहे। सन् 1945 में जयपुर मेडिकल एसोशियेशन के भवन के निर्माण के अनुमोदन में प्रमुख थे। हैदराबाद के दीवन सन् 1945 में विस्तृत पाकिस्तान के निर्माण पर सहयोग करने से मना करने के बाद इस्माइल के सम्बंध मोहम्मद अली जिन्नाह से खराब हो गये। इस्माइल ने भारत के विभाजन का पूर्णतः विरोध किया और उनके लिए संयुक्त भारत से अलग कुछ भी नहीं होना चाहिए था। इसके बाद जिन्नाह के लिए इसमें कुछ आश्चर्य नहीं था कि इस्माइल हैदराबाद चले गये। सन् 1946 में वो हैदराबाद के दीवान बने। उस समय निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान के लिए मुश्किल समय था। इस्माइल ने हैदराबाद के भारत संघ में शामिल होने के लिए बातचीत की और समस्या के हल के लिए सौहार्दपूर्ण रूप से एक वर्ष का समय ले लिया। निज़ाम के अप्रिय साक्षात्कार के बाद विरोधस्वरूप इस्माइल ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद भारत ने सन् 1948 में ऑपरेशन पोलो चलाया और हैदराबद का भारत संघ में विलय हो गया। सम्मान 120px|thumb|right|द नाइट कमांडर ऑफ़ द इंडियन एम्पायर ओर्डर भारत में उनकी सेवाओं के लिए इस्माइल को सन् 1922 में ब्रितानी सरकार ने ओबीई नियुक्त किया और सन् 1924 में उन्हें सीआईई नियुक्त किय अगया। सन् 1930 में उन्हें नाइट की उपाधि मिली और उसके बाद सन् 1936 में उन्हें केसीआईई की उपाधि मिली। सन् 1938 में उन्हें नाइट्स हॉस्पीटलर नियुक्त किया गया। सम्मान/याद में स्थान भारतीय नगर जयपुर में मिर्ज़ा इस्माइल मार्ग मैसूर में मिर्ज़ा रोड़ बंगलोर में सर मिर्ज़ा इस्माइल नगर पुस्तकें इस्माइल ने अपनी यादों को माय पब्लिक लाइफ नामक एक पुस्तक में पिरोया जो सन् 1954 में प्रकाशित हुई।Ismail Sir Mirza M. My Public Life: Recollections and Reflections 1954 G. Allen & Unwin https://books.google.com/books?id=sKg9AAAAMAAJ 14 June 2021 en निबंध, व्याख्यान और चर्चायें महात्मा गांधी - सर्वपल्ली राधाकृष्णन (पृष्ठ 143 से आगे): "An Indian Statesman's Tribute"; लेखक सर मिर्ज़ा एम इस्माइल, केसीआईई (मैसूर के दीवान; बंगलोर, भारत)Radhakrishnan S. Mahatma Gandhi: Essays and Reflections on his Life and Work 2019-04-02 Routledge 978-0-429-60242-9 143 https://books.google.com/books?id=QKqbDwAAQBAJ 14 June 2021 en भारतीय गोलमेज सम्मेलन की कार्यवाहीGovernment Indian Indian Round Table Conference Proceedings 2018-10-15 Creative Media Partners, LLC 978-0-343-20024-4 https://books.google.com/books?id=jc7RvQEACAAJ 14 June 2021 en द न्यू इंडिया, 1948–1955: मेमोरीज ऑफ़ एन इंडियन सीविल सर्वेंट, लेखक अशोक मित्रMitra Asok The New India, 1948-1955: Memoirs of an Indian Civil Servant 1991 Popular Prakashan 978-81-7154-691-6 99, 107, 109 https://books.google.com/books?id=hc0MUqbodgIC&q=ismail 14 June 2021 en एनसाइकलोपीडिया ऑफ़ हायर एजुकेशन: कन्वोकेशन एड्रेस, लेखक सुरेश कांत शर्मा (पृष्ठ 111-114) -एजुकेशन एंड यूनिटी फ़ॉर इकॉनोमिक अपलिफ्टमेंटSharma Suresh Kant Encyclopaedia of Higher Education: Convocation address 2005 Mittal Publications 978-81-8324-016-1 111–114 https://books.google.com/books?id=JeQ-keiG0GoC&q=ismail 14 June 2021 en सर मिर्ज़ा एम इस्माइल: व्यूज एंड ऑपिनियन ऑन हिज़ रिटायरमेंट फ्रॉम द ऑफिस ऑफ़ दीवन ऑफ मैसूर।Sir Mirza M. Ismail: Views and Opinions on His Retirement from the Office of Dewan of Mysore 1942 Printed at the Bangalore Press https://books.google.com/books?id=TzKzZlPGRWsC 14 June 2021 en स्टडीज़ ऑन दीवान सर मिर्ज़ा इस्माइल: क्लेक्शन ऑफ़ सेमिनार पेपर्स-सूर्यनाथ कामतKāmat Sūryanātha Studies on Dewan Sir Mirza Ismail: Collection of Seminar Papers 1998 Mythic Society https://books.google.com/books?id=qkxuAAAAMAAJ 14 June 2021 en एनेक्डॉट्स ऑफ़ क़ायदे-आज़म (अंग्रेज़ी में), लेखक मसूदुल-हसन 1976Hasan Masudul Anecdotes of Quaid-i-Azam 1976 Ferozsons 39 https://books.google.com/books?id=gsQJAQAAIAAJ&q=ismail 14 June 2021 en इंटरनेशनल पेन इंडियन राइटर्स इन काउंसिल, लेखक केआर श्रीनिवास अयंगर-प्रधानमंत्री सर मिर्ज़ा इस्माइल का उद्घाटन भाषाण।Iyengar K. R. Srinivasa Indian Writers in Council: Proceedings of the First All-India Writers' Conference (Jaipur, 1945) 1947 International Book House for the P.E.N. All-India Centre 3 https://books.google.com/books?id=5pJHAAAAMAAJ 14 June 2021 en व्यक्तिगत जीवन thumb|मिर्ज़ा इस्माइल अपने बच्चों के साथ इस्माइल का विवाह ज़ीबुंदेह बेगम शिराज़ी के साथ हुआ। वो कवयित्री थी जिन्होंने बैज़ ए शकिरा नाम से धार्मिक नोव्हास के दस भाग प्रकाशित किये। युगल के तीन बच्चे थे: एक पुत्र हुमायूँ मिर्ज़ा; दो पुत्रियाँ शाह ताज बेगम खलीली और गौहर ताज बेगम नमज़ी। इस्माइल ने अपने परिवार के विभिन्न सदस्यों को देश के लिए सेवा देने के लिए प्रेरित किया। उनके पुत्र हुमायूँ मिर्ज़ा बंगानपल्ली के दीवन बने। स्वतंत्रता के बाद दिल्ली स्थानान्तरण से पहले उन्होंने छोटे समय के लिए राजनयिक सेवायें दी। उन्होंने विदेश मंत्रालय के प्रशासनिक तंत्र में मुख्य सलाहकार के रूप में काम किया और इसके परिणामस्वरूप उन्हें पद्म श्री पुरस्कार मिला। इस्माइल की पुत्री शाह ताज बेगम के पुत्र अकबर मिर्ज़ा खलीली ने भारतीय विदेश सेवा में अपनी सेवायें वरिष्ट राजनयिक के रूप में दी और अपने सेवानिवृत्ति तक भारत सरकार के लिए सलाहकर रहे। इस्माइल के भतिजों ने विभाजन के समय भारत को छोड़ दिया और पाकिस्तान में अपनी सेवायें दी।InpaperMagazine From 2011-09-04 Hall of fame: The ICS served Pakistan well https://www.dawn.com/2011/09/04/hall-of-fame-the-ics-served-pakistan-well/ 2024-06-21 DAWN.COM enAgha Zafar Hilaly PrideOfPakistan.com https://www.prideofpakistan.com/who-is-who-detail/Agha-Zafar-Hilaly/746 2024-06-21 Pride of Pakistan आग़ा शाही विदेश मंत्री बने और आग़ा हिलाली वरिष्ट राजनयिक बने।2006-09-07 Agha Shahi passes away http://beta.dawn.com/news/209384/agha-shahi-passes-away 2024-06-21 DAWN.COM en इस्माइल की पुत्री गौहर ताज नमाज़ी की पुत्री शकेरेह खलीली की सन् 1991 में हत्या कर दी गई।Chauhan Bala 2020-02-16 When love story of Godman, aristocratic woman turned into murder most foul https://www.newindianexpress.com/cities/bengaluru/2020/Feb/16/when-love-story-of-godman-aristocratic-woman-turned-into-murder-most-foul-2104092.html 2024-06-21 The New Indian Express en2023-05-02 Dancing on the grave: The decades-old murder that shook India https://www.bbc.com/news/world-asia-india-65397222 2024-06-21 en-GB हत्यारे को जीवन पर्यांत कारावास की सजा हुई। उनके वंशज फौयाद मिर्ज़ा भारतीय ओलंपिक घुड़सवारी है।Quint The 2020-03-19 With Olympic Berth, Fouaad Mirza Revivifies Equestrian in India https://www.thequint.com/sports/olympic-sports/fouaad-mirza-equestrian-tokyo-2020-olympics-profile 2024-06-21 TheQuint enGupta Ria 2021-08-03 What Links Fouaad Mirza to Dewan of Mysore: Seven Generations of Horse Lovers What Links Fouaad Mirza to Dewan of Mysore: Seven Generations of Horse Lovers https://thebetterindia.com/259836/fouaad-mirza-tokyo-olympics-bengaluru-dewan-mysore-equestrian-rider/ 2024-06-21 The Better India en-USGanesh,DHNS Arjun Fouaad Mirza: New kid on the block https://www.deccanherald.com/sports/new-kid-block-690605.html 2024-06-21 Deccan Herald en निधन इस्माइल का निधन 5 जनवरी 1959 को बंगलौर में उनके निवास पर हुई। – मैसूर के दीवान 1926–1941 एन माधव राव नवाब छतरी हैदराबाद के प्रधानमंत्री 1946–1948 नवाब छतरी सन्दर्भ 2 श्रेणी:मैसूर के लोग श्रेणी:1883 में जन्मे लोग श्रेणी:भारतीय मुस्लिम श्रेणी:जयपुर का इतिहास श्रेणी:१९५९ में निधन