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गंडव्यूह
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गंडव्यूह बौद्ध महायान संप्रदाय का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें बोधिसत्व का गुणगान और उनकी उपासना की चर्चा है।
इस ग्रंथ के संबंध में अनुश्रुति है कि एक दिन भगवान बुद्ध श्रावस्ती स्थित जेतवन में विहार कर रहे थे। उनके साथ सामंतभद्र, मंजुश्री आदि पाँच हजार बोधिसत्व थे। उन्होंने बुद्ध से ज्ञान प्रदान करने की प्रार्थना की। तब बुद्ध ने बोधिसत्व की उपासना के संबंध में बताया। इस ग्रंथ में बोधिसत्व के लक्षण कहे गए हैं। बोधिसत्व प्राप्ति के निमित्त जो कुछ करणीय हैं वह बताया गया है। समस्त जीवों से प्रेम और करूणा करना, उनके दु:ख की निवृति के निमित्त प्रयत्नकरना और जीवों को स्वर्ग मार्ग बताने के निमित्त उपदेश करना बोधिसत्व का कर्तव्य है। इस ग्रंथ के अंत में भद्रचारीप्रणिघातगाथा नामक एक स्त्रोत्र है। उसमें महायान पंथ के तत्वज्ञान के निमित्त बुद्ध की स्तुति है।
गंडव्यूह में वर्णित ५३ कल्याणमित्र
1. मघेश्री
2. सागरमेघ
3. सुप्रतिष्ठित
4. मेघ
5. मुक्तक
6. सारध्वज
7. आशा
8. भीष्मतोतरनिरघोष
9. जयशोमायतन
10. मैत्रायणी
11. सुदर्शन
12. इन्दरीयेश्वर
13. प्रभूता
14. विदवन
15. रत्नजूद
16. सामन्तनेत्र
17. अनल
18. महाप्रभा
19. अजला
20. सर्वगामी
21. उत्पलभूति
22. वराइ
23. जयतोत्म
24. सिङहविजृमभिता
25. वासुमित्रा
26. वषेठिल
27. अवलोकितेश्वर
28. अनन्यगामी
29. महादेव
30. सथाउरा
31. वासन्ती
32. सामन्तगम्भीरश्रीविमलप्रभा
33. प्रमुदितयनजगदविरजोना
34. सामन्तसततवतराजजोह์शरी
35. प्रशान्तरुतसागरवती
36. सरवनगकषासमभवतजेह์शरी
37. सवरववृकषपरफुललनसुखसङवासा
38. सरवजगदरकषापरणिधानवीरयपरभा
39. सुतजेमोणडलरतिशरी
40. गोपा
41. बरनाङमाया
42. सुरनेद्राभा
43. विश्वामित्र
44. शिल्पाभिज्ञ
45. भद्रतोत्मा
46. मुक्तासार
47. सुजनद्र
48. अजितसेन
49. शिउराग्रह์
50. श्रीसम्भव या श्रीमतिशज
51. मैत्रेय
52. मंजुश्री
53. सामन्तभद्र
श्रेणी:बौद्ध धर्म
श्रेणी:बौद्ध ग्रंथ