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411 समाचार
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पीपल

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पीपल Ficus religiosa Ficus religiosa Bo.jpg 240px पीपल वृक्ष के पत्ते और तनापत्तियों की खास बनावट देखें पादप सपुष्पक मैग्नोलियोप्सीडा रोज़ेलेस मोरेसी फाइकस F. religiosa फाइकस रेलीजियोसा एल. |212px|thumb|पीपल की कोपलें पीपल (अश्वत्थ) भारत, नेपाल, श्री लंका, चीन और इंडोनेशिया में पाया जाने वाला बरगद, या गूलर की जाति का एक विशालकाय वृक्ष है जिसे भारतीय संस्कृति में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है तथा अनेक पर्वों पर इसकी पूजा की जाती है। बरगद और गूलर वृक्ष की भाँति इसके पुष्प भी गुप्त रहते हैं अतः इसे 'गुह्यपुष्पक' भी कहा जाता है। अन्य क्षीरी (दूध वाले) वृक्षों की तरह पीपल भी दीर्घायु होता है।पीपल : अनेक गुणों से युक्त वृक्ष https://hindi.webdunia.com/article/home-remedies/%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%95-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-108111000025_1.htm 21 मई 2022 इसके फल बरगद-गूलर की भांति बीजों से भरे तथा आकार में मूँगफली के छोटे दानों जैसे होते हैं। बीज राई के दाने के आधे आकार में होते हैं। परन्तु इनसे उत्पन्न वृक्ष विशालतम रूप धारण करके सैकड़ों वर्षो तक खड़ा रहता है। यह रात मे ऑक्सीजन प्रदान नही करता। पीपल की छाया बरगद से कम होती है, फिर भी इसके पत्ते अधिक सुन्दर, कोमल और चंचल होते हैं। वसंत ऋतु में इस पर धानी रंग की नयी कोंपलें आने लगती है। बाद में, वह हरी और फिर गहरी हरी हो जाती हैं। पीपल के पत्ते जानवरों को चारे के रूप में खिलाये जाते हैं, विशेष रूप से हाथियों के लिए इन्हें उत्तम चारा माना जाता है। पीपल की लकड़ी ईंधन के काम आती है किंतु यह किसी इमारती काम या फर्नीचर के लिए अनुकूल नहीं होती। स्वास्थ्य के लिए पीपल को अति उपयोगी माना गया है। पीलिया, रतौंधी, मलेरिया, खाँसी और दमा तथा सर्दी और सिर दर्द में पीपल की टहनी, लकड़ी, पत्तियों, कोपलों और सीकों का प्रयोग का उल्लेख मिलता है।http://www.patrika.com/article.aspx?id=12592 पीपल के औषधीय गुण ६ नवंबर २००९ पत्रिका.कॉम देव वृक्ष भारतीय संस्कृति में पीपल देववृक्ष है, इसके सात्विक प्रभाव के स्पर्श से अन्त: चेतना पुलकित और प्रफुल्लित होती है। स्कन्द पुराण में वर्णित है कि अश्वत्थ (पीपल) के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत सदैव निवास करते हैं।मूल क none पीपल भगवान विष्णु का जीवन्त और पूर्णत:मूर्तिमान स्वरूप है। भगवान कृष्ण कहते हैं- समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूँ।गीता ख none स्वयं भगवान ने उससे अपनी उपमा देकर पीपल के देवत्व और दिव्यत्व को व्यक्त किया है। शास्त्रों में वर्णित है कि पीपल की सविधि पूजा-अर्चना करने से सम्पूर्ण देवता स्वयं ही पूजित हो जाते हैं।सर्वदेवता ग none पीपल का वृक्ष लगाने वाले की वंश परम्परा कभी विनष्ट नहीं होती। पीपल की सेवा करने वाले सद्गति प्राप्त करते हैं। पीपल वृक्ष की प्रार्थना के लिए अश्वत्थस्तोत्र में पीपल की प्रार्थना का मंत्र भी दिया गया है। मंत्र घ none प्रसिद्ध ग्रन्थ व्रतराज में अश्वत्थोपासना में पीपल वृक्ष की महिमा का उल्लेख है। अश्वत्थोपनयनव्रत में महर्षि शौनक द्वारा इसके महत्त्व का वर्णन किया गया है। अथर्ववेदके उपवेद आयुर्वेद में पीपल के औषधीय गुणों का अनेक असाध्य रोगों में उपयोग वर्णित है। पीपल के वृक्ष के नीचे मंत्र, जप और ध्यान तथा सभी प्रकार के संस्कारों को शुभ माना गया है। श्रीमद्भागवत् में वर्णित है कि द्वापर युग में परमधाम जाने से पूर्व योगेश्वर श्रीकृष्ण इस दिव्य पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान में लीन हुए। यज्ञ में प्रयुक्त किए जाने वाले 'उपभृत पात्र' (दूर्वी, स्त्रुआ आदि) पीपल-काष्ट से ही बनाए जाते हैं। पवित्रता की दृष्टि से यज्ञ में उपयोग की जाने वाली समिधाएं भी आम या पीपल की ही होती हैं। यज्ञ में अग्नि स्थापना के लिए ऋषिगण पीपल के काष्ठ और शमी की लकड़ी की रगड़ से अग्नि प्रज्वलित किया करते थे।http://hindi.webdunia.com/religion/religion/article/0706/11/1070611072_1.htm धर्म संस्कृति के पुण्य प्रतीक वृक्ष ६ नवंबर २००९ वेबदुनिया https://web.archive.org/web/20071107113005/http://hindi.webdunia.com/religion/religion/article/0706/11/1070611072_1.htm 7 नवंबर 2007 dead ग्रामीण संस्कृति में आज भी लोग पीपल की नयी कोपलों में निहित जीवनदायी गुणों का सेवन कर उम्र के अंतिम पडाव में भी सेहतमंद बने रहते हैं।प्रकृति से चुने उर्जा दायक ’टॉनिक‘ http://newswing.com/?p=547 2 फरवरी 2007 18 अक्तूबर 2007 https://web.archive.org/web/20071018132506/http://newswing.com/?p=547 bot: unknown thumb|Right|240px|पीपल का पत्ता पूजन एवं व्रत thumb|Somvati Amavasya Vrat (सोमवती अमावस्या व्रत ) जब अमावस्या (हिंदू कैलेंडर महीने के पन्द्रहवें दिन) हिन्दू कैलेंडर वर्ष में सोमवार को पड़ती है। इस दिन पवित्र पीपल के पेड़ की १०८ बार परिक्रमा कर महिलाएं व्रत रख कर पूजन करती हैं। टीका टिप्पणी    क.    मूल घ none मूलतः ब्रह्म रूपाय मध्यतो विष्णु रुपिणः। अग्रतः शिव रुपाय अश्वत्त्थाय नमो नमः।।    ख.    गीता क none अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणां    ग.    सर्वदेवता ख none अश्वत्थ: पूजितोयत्र पूजिता:सर्व देवता:।    घ.    मंत्र ग noneअश्वत्थ सुमहाभागसुभग प्रियदर्शन। इष्टकामांश्चमेदेहिशत्रुभ्यस्तुपराभवम्॥ आयु: प्रजांधनंधान्यंसौभाग्यंसर्व संपदं। देहिदेवि महावृक्षत्वामहंशरणंगत:॥ </div> इन्हें भी देखें बोधि वृक्ष नीम बरगद बाहरी कड़ियाँ सन्दर्भ श्रेणी:वृक्ष श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना