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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सांथाल जनजाति

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संथालᱥᱟᱱᱛᱟᱲ Budhi gali- santhal tribe dance.jpg पारम्परिक संथाली नृत्य 7.4 मिलियन भारत, बांग्लादेश, नेपाल झारखण्ड 2,752,723 http://www.censusindia.gov.in/2011census/PCA/ST.html A-11 Individual Scheduled Tribe Primary Census Abstract Data and its Appendix Office of the Registrar General & Census Commissioner, India www.censusindia.gov.in 2017-11-18 https://web.archive.org/web/20150907212310/http://www.censusindia.gov.in/2011census/PCA/ST.html 7 सितंबर 2015 live पश्चिम बंगाल 2,512,331 उड़ीसा 894,764 बिहार 406,076 बांग्लादेश 300,061 (2001) http://www3.ntu.edu.sg/home/cfcavallaro/Pdf%20files/Cavallaro%20and%20Rahman%202009.pdf The Santals of Bangladesh Cavallaro Francesco Rahman Tania ntu.edu.sg 2017-11-17 Nayang Technical University https://web.archive.org/web/20180516212132/http://www3.ntu.edu.sg/home/cfcavallaro/Pdf%20files/Cavallaro%20and%20Rahman%202009.pdf 16 मई 2018 dead असम 213,139 http://www.censusindia.gov.in/2011Census/Language_MTs.html Statement 1: Abstract of speakers' strength of languages and mother tongues - 2011 Office of the Registrar General & Census Commissioner, India www.censusindia.gov.in 2018-07-07 https://web.archive.org/web/20190716072837/http://censusindia.gov.in/2011Census/Language_MTs.html 16 जुलाई 2019 live नेपाल 42,698 http://www.tribalzone.net/language/santali.htm Santhali: Also spoken in Nepal 2011-04-01 https://web.archive.org/web/20181127174750/http://www.tribalzone.net/language/santali.htm 27 नवंबर 2018 live संताली सरना धर्मसरी धरम मुण्डा हो कोल भूमिज thumb|ढोड्रो बनाम संगीत वाद्य thumb|एक जनजातीय मेले में प्रदर्शित सन्थाल घर संथाल भारत का मुंडा जातीय समूह की एक प्रमुख जनजाति है। वे मुख्य रूप से भारतीय राज्यों झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और असम में रहते हैं, यह अल्पसंख्या में नेपाल और बांग्लादेश में भी पाये जाते हैं। ये मूल रूप से संथाली भाषा बोलते हैं। इतिहास संथाली भाषा बोलने वाले वक्ता मुंडा जातीय समूह की खेरवाड़ समुदाय से आते हैं, जो अपने को "होड़" (मनुष्य) अथवा "होड़ होपोन" (मनुष्य की सन्तान) भी कहते हैं। इस समुदाय में मुंडा, भूमिज, हो आदि जनजातियां भी आती है। मुंडा, भूमिज और हो जनजाति एक ही नस्ल के हैं, जबकि संथाल थोड़ी भिन्न है। मुंडारी, भूमिज, हो और संथाली भाषा में थोड़ी समानताएं थीं देखी जा सकती है। संथाल लोग भारत की प्राचीनतम जनजातियों में से एक है,संथाल एकेश्वर वादी है जो एक ही ईश्वर को मानते है जिन्हें संथाल लोग "मारांग बुरु" कहते है, जिसकी कोई मूर्ति नहीं होती है । संथाल जनजाति जल, जंगल और जमीन से जुड़े हुए लोग है। ये "मारांग बुरु" और "जाहेर आयो" (माता प्रकृति) की उपासना करतें है। वस्तुत: संथाली भाषा भाषी के लोग मूल रूप से खेरवाड़ समुदाय से आते हैं, किन्तु मानवशास्त्रियों ने इन्हें प्रोटो आस्ट्रेलायड से संबन्ध रखने वाला समूह माना है। अपितु इसका कोई प्रमाण अबतक प्रस्तुत नहीं किया गया है। अत: खेरवाड़ समुदाय (संथाली, हो, मुंडा, भूमिज, बिरहोड़, खड़िया, असुर, लोहरा, सावरा, महली रेमो, बेधिया आदि) में भारत सरकार को पुनः शोध करना चाहिए। भौगोलिक वितरण संथाल लोग भारत में अधिकांश झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार, असम, त्रिपुरा, मेघालय, मणिपुर, सिक्किम, मिजोरम राज्यों तथा विदेशों में अल्पसंख्या में चीन, थाईलैंड, नेपाल, भूटान, बंगलादेश, जवा, सुमात्रा आदि देशों में रहते हैं। संस्कृति संथाल समाज अद्वितीय विरासत की परंपरा और आश्चर्यजनक परिष्कृत जीवन शैली है। सबसे उल्लेखनीय हैं उनके लोकसंगीत, गीत, संगीत, नृत्य और भाषा हैं। दान करने की संरचना प्रचुर मात्रा में है। उनकी स्वयं की मान्यता प्राप्त लिपि 'ओल-चिकी' है, जो खेरवाड़ समुदाय के लिए अद्वितीय है। इनकी सांस्कृतिक शोध दैनिक कार्य में परिलक्षित होते है- जैसे डिजाइन, निर्माण, रंग संयोजन और अपने घर की सफाई व्यवस्था में है। दीवारों पर आरेखण, चित्र और अपने आंगन की स्वच्छता कई आधुनिक शहरी घर के लिए शर्म की बात होगी। अन्य विषेशता इनके सुन्दर ढंग के मकान हैं जिनमें खिड़कियां नहीं होती हैं। इनके सहज परिष्कार भी स्पष्ट रूप से उनके परिवार के माता पिता, पति पत्नी, भाई बहन के साथ मजबूत संबंधों को दर्शाता है। सामाजिक कार्य सामूहिक होता है। अत: पूजा, त्योहार, उत्सव, विवाह, जन्म, मृत्यु आदि में पूरा समाज शामिल होता है। हालांकि, संताल समाज पुरुष प्रधान होता है किन्तु सभी को बराबरी का दर्जा दिया गया है। स्त्री-पुरुष में लिंग भेद नहीं है, इसलिए इनके घर लड़का और लड़की का जन्म आनंद का अवसर हैं। इनके समाज में स्त्री पुरुष दोनों को विशेष अधिकार प्रदान किया गया है। वे शिक्षा ग्रहण कर सकते है; वे नाच गा सकते है; वे हाट बाजार घूम सकते है; वे इच्छित खान पान का सेवन कर सकते है; वे इच्छित परिधान पहन सकते हैं; वे इच्छित रूप से अपने को सज संवर सकते हैं; वे नौकरी, मेहनत, मजदूरी कर सकते हैं; वे प्रेम विवाह कर सकते हैं। इनके समाज में पर्दा प्रथा, सती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा नहीं है बल्कि विधवा विवाह; अनाथ बच्चों; नजायज बच्चों को नाम, गोत्र देना और पंचायतों द्वारा उनके पालन का जिम्मेदारी उठाने जैसे श्रेष्ठ परम्परा है। संताल समाज मृत्यु के शोक अन्त्येष्टि संस्कार को अति गंभीरता से मनाया जाता है। इनके चौदह मूल गोत्र हैं- हासंदा, मुर्मू, किस्कु, सोरेन, टुडू, मार्डी, हेंब्रोम, बास्के, बेसरा, चोणे, बेधिया, गेंडवार, डोंडका और पौरिया। इनके विवाह को 'बापला' कहा जाता है। संताड़ी समाज में कुल 23 प्रकार की विवाह प्रथायें है, जो निम्न प्रकार है - माडवा बापला तुनकी दिपिल बापला: इस पद्धति से शादी बहुत ही निर्धन परिवार द्वारा की जाती है । इसमें लड़का दो बारातियों के साथ लड़की के घर जाता है तथा लड़की अपने सिर पर टोकरी रखकर उसके साथ आ जाती है। सिन्दूर की रस्म लड़के के घर पर पूरी की जाती है। गोलयटें बापला हिरोम चेतान बापला बाहा बापला दाग़ बोलो बापला घरदी जवाई बापला: ऐसे विवाह में लड़का अपने ससुराल में घर जमाई बनकर रहता है । वह लड़की के घर 5 वर्ष रहकर काम करता है। तत्पश्चात एक जोड़ी बैल,खेती के उपकरण तथा चावल आदि सामान लेकर अलग घर बसा लेता है। आपांगिर बापला कोंडेल ञापाम बापला इतुत बापला: ऐसा विवाह तब होता है जब कोई लड़का बलपूर्वक किसी सार्वजनिक स्थान पर लड़की के मांग में सिन्दूर भर देता है । इस स्थिति में वर पक्ष को दुगुना वधू मूल्य चुकाना पड़ता है। यदि लड़की उसे अपना पति मानने से इन्कार कर देती है तो उसे विधिवत तलाक़ देना पड़ता है। ओर आदेर बापला ञीर नापाम बापला दुवर सिंदूर बापला टिका सिंदूर बापला किरिञ बापला: जब लड़की किसी लड़के से गर्भवती हो जाती है तो जोग मांझी अपने हस्तक्षेप से सम्बंधित व्यक्ति के विवाह न स्वीकार करने पर लड़की के पिता को कन्या मूल्य दिलवाता है ताकि लड़की का पिता उचित रकम से दूसरा विवाह तय कर सके। छडवी बापला बापला गुर लोटोम बापला संगे बरयात बापला धर्म और त्योहार thumb|असम की संताली सोहराय गीत इनके धार्मिक विश्वासों और अभ्यास किसी भी अन्य समुदाय या धर्म से मेल नहीं खाता है। इनमें प्रमुख देवता हैं- 'सिञ बोंगा', 'मारांग बुरु' (लिटा गोसांय), 'जाहेर एरा, गोसांय एरा, मोणे को, तुरूय को, माझी पाट, आतु पाट, बुरू पाट, सेंदरा बोंगा, आबगे बोंगा, ओड़ा बोंगा, जोमसिम बोंगा, परगना बोंगा, सीमा बोंगा (सीमा साड़े), हापड़ाम बोंगा आदि। पूजा अनुष्ठान में बलिदानों का इस्तेमाल किया जाता है। चूंकि, संताल समाज में सामाजिक कार्य सामूहिक होता है। अत: इस कार्य का निर्वहन के लिए समाज में मुख्य लोग "माझी, जोग माझी, परनिक, जोग परनिक, गोडेत, नायके और परगना" होते हैं, जो सामाजिक व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, जैसे - त्योहार, उत्सव, समारोह, झगड़े, विवाद, शादी, जन्म, मृत्यु, शिकार आदि का निर्वहन में अलग - अलग भूमिका निभाते है। संताल समाज मुख्यतः बाहा, सोहराय, माग, ऐरोक, माक मोंड़े, जानताड़, हरियाड़ सीम, पाता, सेंदरा, सकरात, राजा साला: त्योहार और पूजा मनाते हैं। लुगुबुरु पहाड़ी स्थित 'लुगुबुरु घंटाबाड़ी' संथाल समाज की एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां हजारों की संख्या में देश-विदेश से संथाल समाज के लोग पूजा करने पहुंचते हैं। उल्लेखनीय लोग द्रौपदी मुर्मू, भारत की राष्ट्रपति शिबू सोरेन, राजनेता और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राजनेता और मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, राजनेता और पूर्व मुख्यमंत्री रघुनाथ मुर्मू, ओल चिकि लिपि आविष्कारक, साहित्यकार सिद्धू-कान्हू मुर्मू, स्वतंत्रता सेनानी तिलका मांझी, स्वतंत्रता सेनानी खेरवाल सोरेन, साहित्यकार भोगला सोरेन, साहित्यकार रामचंद्र मुर्मू, साहित्यकार जोबा मुर्मु, साहित्यकार रबिलाल टुडू, साहित्यकार मैना टुडू, लेखिका चम्पई सोरेन, राजनेता सालखन मुर्मू, राजनेता लक्ष्मण टुडू, राजनेता बसेन मुर्मू, गायक गिरीश चन्द्र मुर्मू, पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर चंद्राणी मुर्मू, राजनेता बिरबाहा हाँसदा, फिल्म कलाकार और राजनेता लक्ष्मीरानी माझी, तिरंदाज दिगंबर हांसदा, साहित्यकार सन्दर्भ इन्हें भी देखें संथाली विकिपीडिया संथाली भाषा संथाल विद्रोह हुदुर दुर्गा बाहरी कड़ियाँ मिटने के कगार पर गौरवशाली परम्परा (भारतीय पक्ष) श्रेणी:झारखंड