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चारण बड़ी अमोलक चीज
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चारण बड़ी अमोलक चीज 19वीं सदी के उत्तरार्ध में मारवाड़ के महाराजा मान सिंह द्वारा रचित डिंगल ( मारवाड़ी ) भाषा की कविता है। इस कविता को 5 छंदों में विभाजित किया गया है जिसमें मध्यकालीन भारत के राज दरबारों में चारणों के महत्व और गुणों को दर्शाते हुए उनकी प्रशंसा की गई है। https://books.google.com/books?id=vaEhAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Cāraṇa baḍī amolaka cīja 1989 Cāraṇa Sāhitya Śodha Saṃsthāna hi https://books.google.com/books?id=pkkqAAAAYAAJ&newbks=0&hl=en Bhagwati Shri Karniji Maharaj: A Biography Ujwal Kailash Dan S. 1985 [s.n.]] en
कविता
डिंगल(स्रोत: https://books.google.com/books?id=vaEhAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Cāraṇa baḍī amolaka cīja 1989 Cāraṇa Sāhitya Śodha Saṃsthāna hi)अनुवाद
अंग्रेज़ी अनुवाद: कैलाश दान उज्ज्वल; स्रोत: https://books.google.com/books?id=5ntuAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Power, Profit, and Poetry: Traditional Society in Kathiawar, Western India Tambs-Lyche Harald 1996-12-31 Manohar Publishers & Distributors 978-81-7304-176-1 enmwr अकल विद्या चित उजला, अधको धरमाचार ।
वधता रजपूतां विचै, चारण वातां च्यार ।चारण राजपूतों से चार स्वरूप में श्रेष्ठ हैं, अर्थात् मस्तिष्क, शिक्षा, हृदय की पवित्रता और धर्मनिष्ठता।mwr आछा गुण कहण बाण पण आछी, मोख बुध में न को मणा ।
राजां सुजश चहुं जुग राखे, ताकव दीपक छमा तणा ।वैशिष्ट्य को समझने में सक्षम चारण, इसका कुशलता से वर्णन करते हैं, और इस प्रकार, अच्छे राजाओं की प्रसिद्धि को चारों ओर फैलाते हैं।mwr भूपालां बातां हद भावे,
शब्द सवा वे घणा सकाज ।
देह दराज दीशता डारणा,
राजां बीच सोहे कवराज ।वे बुद्धिमान हैं और अपनी उपस्थिति से दरबार को उज्जवल करते हैं। शासकों को इनके संवाद आनंदित करते हैं; इनकी प्रभावशाली डील-डौल और उत्तम आकृति इन कवि-राजाओं (चारणों) को एक शाही प्रभाव देती हैं और इस प्रकार वे राजाओं के बीच न्यारे नहीं लगते।mwr राजी सख सभा ने राखे,
सहज सभावों घणा शिरे ।
धजवड़ हथां मारका घूतां,
कव रजपूतां अमर करे ।वे सभाओं को जीवंत रखते हैं और अपने अच्छे व्यवहार से उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं। वीर राजपूतों को ये कवि अमर कर देते हैं और स्वयं भी कुशल योद्धा होते हैं।mwr आखे मान सुणों अधपतिया, खत्रियों कोई न करजों खीज ।
वरदायक वहतां मद करण, चारण बड़ी अमोलक चीज ।नाराज न हों, हे! राजाओं, और मानसिंह की सुनो, चारण वास्तव में अमूल्य हैं।
अग्रिम पठन
Cāraṇa baḍī amolaka cīja (in Hindi). Cāraṇa Sāhitya Śodha Saṃsthāna. 1989.
संदर्भ
श्रेणी:कविताएँ