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हैदराबाद मुक्ति संग्राम
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हैदराबाद राज्य, ब्रिटिश भारत की रियासत थी। इसमें वर्तमान तेलंगाना, मराठवाडा, उत्तर कर्नाटक, विदर्भ के कुछ भाग सम्मिलित थे। सन् १७२४ से सन् १९४८ तक निजाम हैदराबाद राज्य के शासक थे। स्वतंत्रता सेनानियों के प्रदीर्घ हैदराबाद मुक्ति संग्राम के उपरान्त १९४८ में भारत सरकार द्वारा निजाम शासन के विरुद्ध पुलीस कारवाई करके हैदराबाद को भारत में समाहित कर लिया गया।
17 सितम्बर 1948 का दिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वास्तव में एक निर्णायक मोड़ था। हैदराबाद की जनता की सामूहिक इच्छा-शक्ति ने न केवल इस क्षेत्र को एक स्वतंत्र देश बनाने हेतु निजाम के प्रयासों को निष्फल कर दिया बल्कि इस प्रांत को भारत संघ में मिलाने का भी निश्चय किया। जब 15 अगस्त 1947 को पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस मना रहा था तो निजाम के राजसी शासन के लोग हैदराबाद राज्य को भारत में मिलाने की मांग करने पर अत्याचार और दमन का सामना कर रहे थे। हैदराबाद की जनता ने निजाम और उसकी निजी सेना 'रजाकारों' की क्रूरता से निडर होकर अपनी आजादी के लिए पूरे जोश से लड़ाई जारी रखी।
भारत के तत्कालीन गृहमंत्री एवं 'लौह पुरूष' सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा पुलिस कार्रवाई करने हेतु लिए गए साहसिक निर्णय ने निजाम को 17 सितम्बर 1948 को आत्म-समर्पण करने और भारत संघ में सम्मिलित होने पर मजबूर कर दिया। इस कार्यवाई को 'आपरेशन पोलो' नाम दिया गया था। इसलिए शेष भारत को अंग्रेजी शासन से स्वतंत्रता मिलने के बाद हैदराबाद की जनता को अपनी आजादी के लिए 13 महीने और 2 दिन संघर्ष करना पड़ा था। यदि निजाम को उसके षड़यंत्र में सफल होने दिया जाता तो भारत का नक्शा वह नहीं होता जो आज है।
इन्हें भी देखें
ऑपरेशन पोलो
आसफ़ जाही राजवंश
मीर उस्मान अली ख़ान