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उपस्थिति का अर्थ
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उपस्थिति का अर्थ ज्ञानरंजन हिन्दी कथेतर गद्य सेतु प्रकाशन, नई दिल्ली 2020 192 9789389830132
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उपस्थिति का अर्थ ज्ञानरंजन की कथेतर गद्य की पुस्तक है...
उपस्थिति का अर्थ ज्ञानरंजन की कथेतर गद्य की पुस्तक है, जिसका प्रकाशन 2020 में सेतु प्रकाशन से हुआ। पुस्तक में मुख्यतः ज्ञानरंजन के व्याख्यान, वक्तव्य, संस्मरण, रेडियो संवाद, बातचीत और साक्षात्कार आदि संकलित हैं। पुस्तक का संपादन कवि मंगलेश डबराल ने किया था।उपस्थिति का अर्थ https://www.setuprakashan.com/books/upasthiti-ka-arth-by-gyanranjan/ सेतु प्रकाशन 5 सितंबर 2026उपस्थिति का अर्थ (ज्ञानरंजन) : सूरज पालीवाल https://samalochan.blogspot.com/2020/12/blog-post_31.html समालोचन 31 दिसंबर 2020 5 सितंबर 2026
पुस्तक का स्वरूप
उपस्थिति का अर्थ ज्ञानरंजन के कथा-साहित्य से अलग उनके विचारपरक और आत्मपरक गद्य को सामने लाती है। इसमें व्याख्यानों और वक्तव्यों के साथ संस्मरण, बातचीत, रेडियो-वार्ता और साक्षात्कार जैसी विधाओं की सामग्री शामिल है। इस विविधता के कारण पुस्तक को ज्ञानरंजन के रचनात्मक व्यक्तित्व और उनकी वैचारिक दृष्टि को समझने वाले दस्तावेज के रूप में देखा गया है।ज्ञानरंजन की रचनात्मकता का बहुमूल्य दस्तावेज https://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%9C_/_%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4ा गद्य कोश 5 सितंबर 2026सितंबर 2026 InternetArchiveBot
साहित्य और समाज की दृष्टि
पुस्तक में ज्ञानरंजन के वक्तव्यों और व्याख्यानों के माध्यम से साहित्य को व्यापक सामाजिक संदर्भ में देखने की दृष्टि सामने आती है। आलोचक सूरज पालीवाल के अनुसार, पुस्तक में देश, समाज, साहित्य और धर्म के समकालीन संकटों पर विचार मिलता है। उनके अनुसार यह पुस्तक पाठक को लेखक के भीतर की उन परतों तक ले जाती है जो केवल उनकी कहानियों से पूरी तरह सामने नहीं आतीं।उपस्थिति का अर्थ (ज्ञानरंजन) : सूरज पालीवाल https://samalochan.blogspot.com/2020/12/blog-post_31.html समालोचन 31 दिसंबर 2020 5 सितंबर 2026
राजनीति, पूँजी और बाजार
उपस्थिति का अर्थ में ज्ञानरंजन के विचार साहित्यिक संसार तक सीमित नहीं रहते। पुस्तक में विकास की अवधारणाओं, पूँजी, बाजारवाद, संचार क्रांति और समकालीन राजनीतिक परिस्थितियों पर उनकी टिप्पणियाँ भी संकलित हैं। सेतु प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक के परिचय में इन विषयों को ज्ञानरंजन की सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से जोड़ा गया है।उपस्थिति का अर्थ https://www.setuprakashan.com/books/upasthiti-ka-arth-by-gyanranjan/ सेतु प्रकाशन 5 सितंबर 2026
साहित्यिक संसार और 'पहल'
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण आयाम ज्ञानरंजन के संपादकीय अनुभव और पहल पत्रिका से जुड़ी उनकी दृष्टि है। उनके वक्तव्यों और बातचीत में साहित्यिक संस्थाओं, लेखन की स्थितियों, लघु पत्रिकाओं और साहित्यिक जीवन के अंतर्विरोधों पर विचार मिलता है। गद्य कोश में प्रकाशित पुस्तक-समीक्षा के अनुसार, उपस्थिति का अर्थ ज्ञानरंजन के 'पहल' संपादन की अंतर्दृष्टि और उनके साहित्यिक व्यक्तित्व को समझने में सहायक है।ज्ञानरंजन की रचनात्मकता का बहुमूल्य दस्तावेज https://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%9C_/_%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%क्ला गद्य कोश 5 सितंबर 2026सितंबर 2026 InternetArchiveBot
कविता और दूसरे साहित्यकार
पुस्तक में ज्ञानरंजन की साहित्यिक दृष्टि का एक पक्ष दूसरे रचनाकारों पर उनके वक्तव्यों और व्याख्यानों से सामने आता है। इनमें मुक्तिबोध और उनकी कविता 'अँधेरे में' तथा मराठी कवि श्रीपाद भालचंद्र जोशी पर दिए गए व्याख्यान शामिल हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कहानीकार ज्ञानरंजन की साहित्यिक दृष्टि कविता और अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य तक विस्तृत थी।ज्ञानरंजन की रचनात्मकता का बहुमूल्य दस्तावेज https://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%ञानरंजन_%E0%A4%की_%E0%A4रचनात्मकता_%E0%A4का_%E0%A4बहुमूल्य_%E0%A4दस्तावेज_/_स्मृति_शुक्ला गद्य कोश 5 सितंबर 2026सितंबर 2026 InternetArchiveBot
संस्मरण और निजी जीवन
उपस्थिति का अर्थ में संस्मरणात्मक सामग्री ज्ञानरंजन के निजी और साहित्यिक जीवन के कुछ प्रसंगों को सामने लाती है। इनमें मुक्तिबोध से पहली मुलाकात और इलाहाबाद से जुड़ी स्मृतियों का उल्लेख विशेष रूप से किया गया है। पुस्तक के संस्मरणात्मक अंशों से लेखक के निजी अनुभव और उनके साहित्यिक संस्कारों के बीच संबंध को समझने का अवसर मिलता है।ज्ञानरंजन की रचनात्मकता का बहुमूल्य दस्तावेज https://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%ज्ञानरंजन_की_%E0%A4रचनात्मकता_का_%E0%A4बहुमूल्य_%E0%A4दस्तावेज_/_स्मृति_शुक्ला गद्य कोश 5 सितंबर 2026सितंबर 2026 InternetArchiveBot
साहित्यिक महत्व
उपस्थिति का अर्थ का महत्व इस बात में है कि यह ज्ञानरंजन के कहानीकार व्यक्तित्व से आगे उनके विचारक, वक्ता, संपादक और संस्मरणकार रूपों को एक साथ सामने लाती है। पुस्तक में साहित्यिक अनुभव और सामाजिक-राजनीतिक चिंतन एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं। आलोचक सूरज पालीवाल ने इसे ज्ञानरंजन के व्यक्तित्व की उन परतों को खोलने वाली पुस्तक माना है, जो उनके कथा-साहित्य से अलग माध्यमों में व्यक्त होती हैं।उपस्थिति का अर्थ (ज्ञानरंजन) : सूरज पालीवाल https://samalochan.blogspot.com/2020/12/blog-post_31.html समालोचन 31 दिसंबर 2020 5 सितंबर 2026
इस दृष्टि से उपस्थिति का अर्थ को ज्ञानरंजन के कथेतर गद्य और उनके साहित्यिक-वैचारिक व्यक्तित्व को समझने वाली पुस्तक के रूप में देखा जा सकता है। यह कबाड़खाना के बाद उनके गद्य-संसार का विस्तार भी प्रस्तुत करती है।उपस्थिति का अर्थ https://www.setuprakashan.com/books/upasthiti-ka-arth-by-gyanranjan/ सेतु प्रकाशन 5 सितंबर 2026
संदर्भ
श्रेणी:ज्ञानरंजन की कृतियाँ
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श्रेणी:हिन्दी गद्य