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उदयपुर
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उदयपुर Udaipur Evening view, City Palace, Udaipur.jpg 20191207 City Palace, Udaipur 1701 7325.jpg Monsoon Palace, Udaipur.jpg Taj Lake Palace Udaipur from City Palace.jpg View of Udaipur from City Palace.jpg Jag Mandir Palace, Udaipur.jpg Pgk udaipur.jpg Udaipur at Sundown (5580915131).jpg 270 black white 4 ऊपर से नीचे: सांयकालीन दृश्य, सिटी पैलेस, मानसून भवन, उदयपुर दृश्य, जग मंदिर, प्रताप गौरव केंद्र, रात्रि में पिछोला झील उदयपुर India Rajasthan 24.58 73.69 inline, title राजस्थान में स्थिति देश प्रान्त राजस्थान ज़िला उदयपुर ज़िला 64 423 451100 474531 2011 भाषा प्रचलित हिन्दी, मेवाड़ी भामस +5:30 पिनकोड 313001- 313024 दूरभाष कोड +91-294 RJ-27 www.udaipur.rajasthan.gov.in उदयसिंह द्वितीय उदयसिंह द्वितीय स्थापना 1559
उदयपुर (Udaipur) भारत के राजस्थान राज्य के उदयपुर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह राजस्थान का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो अपने इतिहास, संस्कृति और अपने आकर्षक स्थलों के लिये प्रसिद्ध है। इसे "पूर्व के वेनिस" के नाम से भी जाना जाता है।"Lonely Planet Rajasthan, Delhi & Agra," Michael Benanav, Abigail Blasi, Lindsay Brown, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012332"Berlitz Pocket Guide Rajasthan," Insight Guides, Apa Publications (UK) Limited, 2019, ISBN 9781785731990
विवरण
उदयपुर में रेबारी, डाँगी, ब्राह्मण, राजपूत , भील , मीणा के साथ अन्य कई जातियाँ निवास करती हैं। उदयपुर का प्रारंभिक इतिहास सिसोदिया राजवंश से जुड़ा है। एक मत के अनुसार सन् 1558 में महाराणा उदय सिंह - सिसोदिया राजपूत वंश - ने स्थापित किया था। अपनी झीलों के कारण यह शहर झीलों की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। उदयपुर शहर सिसोदिया राजवंश द्वारा शासित मेवाड़ की राजधानी रहा है। राजस्थान का यह सुन्दर शहर देश विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक सपना सा लगता है। यह शहर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अनुपम है।http://www.tourism.rajasthan.gov.in/hi/udaipur.html Welcome to Rajasthan - Official Website of Department of Tourism, Government of Rajasthan www.tourism.rajasthan.gov.in en-IN 2021-05-30 किसी समय विलायती प्रशासक जेम्स टोड ने उदयपुर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर "सबसे रुमानी" शहर कहा था लोनली प्लैनेट
इतिहास
मेवाड़ की राजधानी उदयपुर की स्थापना 1559 में महाराणा उदयसिंह ने की। किन्तु तिथि को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। कुछ इतिहासकार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार उदयपुर की स्थापना आखातीज के दिन मानते हैं तो कुछ का कहना है कि उदयपुर की स्थापना पंद्रह अप्रैल 1553 में ही हो गई थी। जिसके प्रमाण उदयपुर(राजस्थान) के मोतीमहल में मिलते हैं। जिसे उदयपुर का पहला महल माना जाता है जो अब खंडहर में तब्दील हो चुका है, जिसकी सुरक्षा मोतीमगरी ट्रस्ट कर रहा है। महाराणा उदय सिंह द्वितीय, जो महाराणा प्रताप के पिता थे, चित्तौडग़ढ़ दुर्ग से मेवाड़ का संचालन करते थे। उस समय चित्तौडग़ढ़ निरन्तर मुगलों के आक्रमण से घिरा हुआ था। इसी दौरान महाराणा उदयसिंह अपने पौत्र अमरसिंह के जन्म के उपलक्ष्य में मेवाड़ के शासक भगवान एकलिंगजी के दर्शन करने कैलाशपुरी आए थे। उन्होंने यहाँ आयड़ नदी के किनारे शिकार के लिए डेरे डलवाए थे। तब उनके दिमाग में चित्तौडग़ढ़ पर मुगल आतताइयों के आक्रमण को लेकर सुरक्षित जगह राजधानी बनाए जाने का मंथन चल रहा था।
इसी दौरान उन्होंने एक शाम अपने सामंतों के समक्ष उदयपुर नगर बसाने का विचार रखा। जिसका सभी सामंत तथा मंत्रियों ने समर्थन किया। उदयपुर की स्थापना के लिए वह जगह तलाशने पहुँचे तब उन्होंने यहाँ पहला महल बनवाया, जिसका नाम मोती महल दिया, जो वर्तमान मोती मगरी पर खंडहर के रूप में मौजूद है। जिसको लेकर कई इतिहासकारों का मानना है कि मोतीमहल उदयपुर का पहला महल है और एक तरह से इस के निर्माण के साथ ही उदयपुर नगर की स्थापना शुरू हुई। स्थापना का दिन पंद्रह अप्रेल 1553 था और उस दिन आखातीज थी।
बाकी इतिहासकार भी यह मानते हैं कि उदयपुर की स्थापना आखातीज के दिन हुई है, लेकिन यह तिथि पंद्रह अप्रैल 1553 है इसको लेकर कोई शिलालेख या प्रमाण मौजूद नहीं हैं।
इतिहासकारों की मानें तो एक बार महाराणा उदयसिंह मोतीमहल में निवास कर रहे थे, तभी वह शिकार की भावना से खरगोश का पीछा करते हुए उस जगह पहुँचे जहाँ राजमहल मौजूद हैं। तब उदयुपर में फतहसागर नहीं था और वह एक सहायक नदी के रूप में था। वहाँ एक योगी साधू धूणी रमाए बैठे थे। साधू जगतगिरी से उनकी मुलाकात हुई और महाराणा के दिल का हाल जानकार साधू ने धूणी की जगह पर राज्य बसाने का सुझाव दिया, जिसे महाराणा ने मान लिया।
यह बात सन 1559 की थी। जिस पहाड़ी की चोटी पर महल का निर्माण कराया गया, वह समूचे शहर से दिखाई देता है। जहाँ अलग-अलग काल में महाराणाओं ने राजमहल का निर्माण कराया। बाद में सरदार, राव, उमराव और ठिकानों के लोग भी राजमहल के पास बसाए गए। जिनकी हवेलियाँ भी राजमहल के इर्द-गिर्द मौजूद हैं। इतिहासकार जोगेंद्र राजपुरोहित बताते हैं कि पंद्रह अप्रेल को इस तरह उदयपुर शहर की स्थापना हुई।https://www.jagran.com/rajasthan/jaipur-interesting-story-of-establishing-udaipur-19137747.html इस तरह बसा उदयपुर, बाबाजी की धूणी पर बना राजमहल- उदयपुर के स्थापना की रोचक कहानी Dainik Jagran hi 2021-05-31
पांच हज़ार साल पुरानी सभ्यता
उदयपुर की स्थापना से पांच हजार साल पहले आयड़ नदी के किनारे सभ्यता मौजूद थी। विभिन्न उत्खनन के स्तरों से पता चलता है कि प्रारंभिक बसावट से लेकर अठारहवीं सदी तक यहाँ कई बार बस्तियाँ बसी और उजड़ी। आहड़ के आस-पास तांबे की उपलब्धता के चलते यहाँ के निवासी इस धातु के उपकरण बनाते थे। इसी की वजह से यह तांबावती नगरी के नाम से जाना जाता था। इसी तरह पिछोली गांव भी महाराणा लाखा (सन 1382-1421 )के काल का है।
जब कुछ बंजारे यहाँ से गुजर रहे थे। छीतर नाम के बंजारे की बैलगाड़ी नमी वाली जगह धँस गई और वहाँ पानी का स्रोत जानकर खुदाई की और पिछोला झील का निर्माण हुआ था। तब यहाँ चारों तरफ पहाड़ी इलाके हुआ करते थे।https://www.jagran.com/rajasthan/jaipur-interesting-story-of-establishing-udaipur-19137747.html इस तरह बसा उदयपुर, बाबाजी की धूणी पर बना राजमहल- उदयपुर के स्थापना की रोचक कहानी Dainik Jagran hi 2021-05-31
मेवाड़
8वीं से 16वीं सदी तक बप्पा रावल के वंशजो ने अजेय शासन किया और तभी से यह राज्य मेवाड के नाम से जाना जाता है।
बुद्धि तथा सुन्दरता के लिये विख्यात महारानी पद्मिनी भी यहीं की थी। कहा जाता है कि उनकी एक झलक पाने के लिये सल्तनत दिल्ली के सुल्तान अल्लाउदीन खिलजी ने इस किले पर आक्रमण किया। रानी ने अपने चेहरे की परछाई को लोटस कुण्ड में दिखाया। इसके बाद उसकी इच्छा रानी को ले जाने की हुई। पर यह संभव न हो सका। क्योंकि महारानी सभी रानियों और सभी महिलाओं सहित एक-एक कर जलती हुयी आग जिसे विख्यात जौहर के नाम से जानते हैं, में कूद गयी और अल्लाउदीन खिलजी की इच्छा पूरी न हो सकी। मुख्य शासकों में बप्पा रावल (1433-68), राणा सांगा (1509-27) जिनके शरीर पर 80 घाव होने, एक टांग न (अपंग) होने, एक हाथ न होने के बावजूद भी शासन सामान्य रूप से चलाते थे बल्कि बाबर के खिलाफ लडाई में भी भाग लिया। और सबसे प्रमुख महाराणा प्रताप (1572-92) हुए जिन्होने अकबर की अधीनता नहीं स्वीकार की और राजधाने के बिना राज्य किया।
दर्शनीय स्थल (शहर में)
उदयपुर के पर्यटन स्थल
पिछोला झील
ऐतिहासिक दृष्टि से इस झील के बारे में कहा जाता है कि महाराणा लाखा के काल में इस झील का निर्माण एक बंजारे द्वारा करवाया गया इस झील के बीचों बीच एक नटनी का चबूतरा बना हुआ है महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने इस शहर की खोज के बाद इस झील का विस्तार कराया था। झील में दो द्वीप हैं और दोनों पर महल बने हुए हैं। एक है जग निवास, जो अब लेक पैलेस होटल बन चुका है और दूसरा है जग मंदिर। दोनों ही महल राजस्थानी शिल्पकला के बेहतरीन उदाहरण हैं, बोट द्वारा जाकर इन्हें देखा जा सकता है।http://rajasthansamvad.blogspot.com/2017/10/blog-post_59.html Rajasthan general knowledge: पिछोला झील 2017-10-28 Rajasthan general knowledge 2021-05-31
जग निवास द्वीप, उदयपुर
पिछोला झील पर बने द्वीप पैलेस में से एक यह महल, जो अब एक सुविधाजनक होटल का रूप ले चुका है। कोर्टयार्ड, कमल के तालाब और आम के पेड़ों की छाँव में बना स्विमिंग-पूल मौज-मस्ती करने वालों के लिए एक आदर्श स्थान है। आप यहाँ आएं और यहाँ रहने तथा खाने का आनंद लें किंतु आप इसके भीतरी हिस्सों में नहीं जा सकते।
जग मंदिर, उदयपुर
पिछोला झील पर बना एक अन्य द्वीप पैलेस। यह महल महाराजा करण सिंह द्वारा बनवाया गया था, किंतु महाराजा जगत सिंह ने इसका विस्तार कराया। महल से बहुत शानदार दृश्य दिखाई देते हैं, गोल्डन महल की सुंदरता दुर्लभ और भव्य है।
सिटी पैलेस, उदयपुर
प्रसिद्ध और शानदार सिटी पैलेस उदयपुर के जीवन का अभिन्न अंग है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा महल है। इस महल का निर्माण शहर के संस्थापक महाराणा उदय सिंह-द्वितीय ने करवाया था। उनके बाद आने वाले राजाओं ने इसमें विस्तार कार्य किए। तो भी इसके निर्माण में आश्चर्यजनक समानताएं हैं। महल में जाने के लिए उत्तरी ओर से बड़ीपोल से और त्रिपोलिया द्वार से प्रवेश किया जा सकता है।https://m.bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B8_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF_%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0 सिटी पैलेस संग्रहालय उदयपुर भारतकोश m.bharatdiscovery.org hi 2021-05-31
center|550px|thumb|नगर महल (सिटी पैलेस) का सायंकाल का दृश्य
शिल्पग्राम, उदयपुर
यह एक शिल्पग्राम है जहाँ गोवा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के पारंपरिक घरों को दिखाया गया है। यहाँ इन राज्यों के शास्त्रीय संगीत और नृत्य भी प्रदर्शित किए जाते हैं।https://m-patrika-com.cdn.ampproject.org/v/s/m.patrika.com/amp-news/topic/shilpgram-udaipur-news/?amp_js_v=a6&_gsa=1&usqp=mq331AQFUAKwASA=#amp_ct=1622451565142&referrer=https://www.google.com&_tf=From%20%251$s&share=https://www.patrika.com/topic/shilpgram-udaipur-news/ Shilpgram in Udaipur: Photos, Videos, History in Hindi, Visit Timings, Entry Fee m-patrika-com.cdn.ampproject.org 2021-05-31 2 जून 2021 https://web.archive.org/web/20210602213925/https://m-patrika-com.cdn.ampproject.org/v/s/m.patrika.com/amp-news/topic/shilpgram-udaipur-news/?amp_js_v=a6&_gsa=1&usqp=mq331AQFUAKwASA=#amp_ct=1622451565142&referrer=https://www.google.com&_tf=From%20%251$s&share=https://www.patrika.com/topic/shilpgram-udaipur-news/ dead
सज्जनगढ़ (मानसून पैलेस)
उदयपुर शहर के दक्षिण में अरावली पर्वतमाला के एक पहाड़ का निर्माण महाराजा सज्जन सिंह ने करवाया था। यहाँ गर्मियों में भी अच्छी ठंडी हवा चलती है। सज्जनगढ़ से उदयपुर शहर और इसकी झीलों का सुंदर नज़ारा दिखता है। पहाड़ की तलहटी में अभयारण्य है। सायंकाल में यह महल रोशनी से जगमगा उठता है, जो देखने में बहुत सुंदर दिखाई पड़ता है।https://www.bhaskar.com/rajasthan/jaipur/news/360-view-image-of-sajjangarh-fort-or-mansoon-palace-at-udaipur-rajasthan-01400883.html उदयपुर का सबसे ऊंचा मानसून पैलेस, 132 साल पहले बादलों को देखने के लिए बनवाया था Dainik Bhaskar hi 2021-05-31
फतेह सागर
महाराणा जय सिंह द्वारा निर्मित यह झील बाढ़ के कारण नष्ट हो गई थी, बाद में महाराणा फतेह सिंह ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। झील के बीचों-बीच एक बगीचा नेहरु गार्डन, स्थित है। आप बोट अथवा ऑटो द्वारा झील तक पहुँच सकते हैं।
मोती मगरी
यहाँ सिसोदिया राजपूत वंश के विश्व प्रसिद्ध महाप्रतापी राजा महाराणा प्रताप की मूर्ति है। मोती मगरी फतेहसागर के पास की पहाड़ी पर स्थित है। मूर्ति तक जाने वाले रास्तों के आसपास सुंदर बगीचे हैं, विशेषकर जापानी रॉक गार्डन दर्शनीय हैं।
बाहुबली हिल्स, उदयपुर
बाहुबली हिल्स उदयपुर से १४ किलोमीटर दूर बड़ी तालाब के समीप की पहाड़ी पर स्थित है ये जगह युवाओ में लोकप्रिय है और उनका पसंदीदा स्थान बन चुकी है।
Bahubali_hill|thumb|बाहुबली हिल्स का दृश्य एकलिंगजी मंदिरhttps://www.sightseechannel.com/2023/05/top-10-places-to-visit-in-udaipur.html उदयपुर में घूमने की जगह - Top 10 Places To Visit In Udaipur Sightsee - Best India Travel Blog and Vlogger On YouTube en 2023-06-12 12 जून 2023 https://web.archive.org/web/20230612085218/https://www.sightseechannel.com/2023/05/top-10-places-to-visit-in-udaipur.html dead
एकलिंगजी मंदिर राजस्थान के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है और उदयपुर के उत्तर में 22 किमी की दूरी पर स्थित है। एकलिंगजी मंदिर हिंदू धर्म के भगवान शिव को समर्पित है और इसकी शानदार वास्तुकला हर साल यहाँ कई पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसकी ऊंचाई लगभग 50 फीट है और इसके चार चेहरे भगवान शिव के चार रूपों को दर्शाते है। चाँदी के साँप की माला पहना हुआ शिवलिंग एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है।
सहेलियों की बाड़ी
सहेलियों की बाड़ी / दासियों के सम्मान में बना बाग एक सजा-धजा बाग है। इसमें कमल के तालाब, फव्वारे, संगमरमर के हाथी और कियोस्क बने हुए हैं।
दर्शनीय स्थल (आसपास)
नाथद्वारा ४८ किलोमीटर दूर है उदयपुर से
कुंभलगढ ८० किलोमीटर
कांकरोली ७० किलोमीटर
ऋषभदेव यह केसरिया जी के नाम से भी प्रसिद्ध है।
एकलिंगजी १३ किलोमीटर
हल्दीघाटी २६ मील की दूरी पर स्थित
जयसमंद झील
सांवरियाजी का मंदिर 80किलोमीटर
रणकपुर
चित्तौडगढ
जगत निवास
मेनार ५२ किलोमीटर दूर हैंं उदयपुर से
यातायात
उदयपुर के सार्वजनिक यातायात के साधन मुख्यतः बस, ऑटोरिक्शा और रेल सेवा हैं।
हवाई मार्ग
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा उदयपुर हवाई अड्डा है। यह हवाई अड्डा उदयपुर से २० कि॰मी॰ दूर डबोक में है। जयपुर, जोधपुर, औरंगाबाद, दिल्ली तथा मुंबई से यहाँ नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग
यहाँ उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन नामक रेलवे स्टेशन है। यह स्टेशन देश के अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग
यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर स्थित है। यह सड़क मार्ग से जयपुर से 9 घण्टे, दिल्ली से 14 घण्टे तथा मुंबई से 17 घण्टे की दूरी पर स्थित है।
समाचार पत्र
दैनिक भास्कर
राजस्थान पत्रिका
उदयपुर दोपहर
इन्हें भी देखें
मेवाड़
जयपुर
जोधपुर
भरतपुर
बाहरी कड़ियाँ
मेवाद़ के दर्शनीय स्थल: उदयपुर
सन्दर्भ
श्रेणी:राजस्थान के शहर
श्रेणी:उदयपुर ज़िला
श्रेणी:उदयपुर ज़िले के नगर
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