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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

लोथल

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India Gujarat 6 Red_pog.svg N 22 31 17 E 72 14 58 left 300 right गुजरात में लोथल की अवस्थिति thumb|right|300px|लोथल लोथल (गुजराती: લોથલ), प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के शहरों में से एक बहुत ही महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है। लगभग 2400 ईसापूर्व पुराना यह शहर भारत के राज्य गुजरात के भाल क्षेत्र में स्थित है और इसकी खोज सन 1954 में हुई थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस शहर की खुदाई 13 फ़रवरी 1955 से लेकर 19 मई 1956 के मध्य की थी। लोथल, अहमदाबाद जिले के धोलका तालुका के गाँव सरागवाला के निकट स्थित है। अहमदाबाद-भावनगर रेलवे लाइन के स्टेशन लोथल भुरखी से यह दक्षिण पूर्व दिशा में 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। लोथल अहमदाबाद, राजकोट, भावनगर और धोलका शहरों से पक्की सड़क द्वारा जुड़ा है जिनमें से सबसे करीबी शहर धोलका और बगोदरा हैं।लोथल को मिनी हडप्पा के नाम से भी जाना जाता है। लोथल गोदी जो कि विश्व की प्राचीनतम ज्ञात गोदी है, सिंध में स्थित हड़प्पा के शहरों और सौराष्ट्र प्रायद्वीप के बीच बहने वाली साबरमती नदी की प्राचीन धारा के द्वारा शहर से जुड़ी थी, जो इन स्थानों के मध्य एक व्यापार मार्ग था। उस समय इसके आसपास का कच्छ का मरुस्थल, अरब सागर का एक हिस्सा था। प्राचीन समय में यह एक महत्वपूर्ण और संपन्न व्यापार केंद्र था जहाँ से मोती, जवाहरात और कीमती गहने पश्चिम एशिया और अफ्रीका के सुदूर कोनों तक भेजे जाते थे। मनकों को बनाने की तकनीक और उपकरणों का समुचित विकास हो चुका था और यहाँ का धातु विज्ञान पिछले 4000 साल से भी अधिक से समय की कसौटी पर खरा उतरा था। 1961 में भारतीय पुराततव सर्वेक्षण ने खुदाई का कार्य फिर से शुरू किया और टीले के पूर्वी और पश्चिमी पक्षों की खुदाई के दौरान उन वाहिकाओं और नालों को खोद निकाला जो नदी के द्वारा गोदी से जुड़े थे। प्रमुख खोजों में एक टीला, एक नगर, एक बाज़ार स्थल और एक गोदी शामिल है। उत्खनन स्थल के पास ही एक पुरात्तत्व संग्रहालय स्थित हैं जिसमें सिंधु घाटी से प्राप्त वस्तुएं प्रदर्शित की गयी हैं। यह सिंधु सभ्यता का पतन नगर (बंदरगाह) था पुरातत्व thumb|right|200px|सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार और प्रमुख स्थल ये एक प्रमुख बंदरगाह था इतिहास नगर योजना मुख्य घरों के द्वार मुख्य सड़कों पर खुलते थे। पश्चिम ऐशिया में व्यापार का प्रमुख केन्द्र था। अर्थव्यवस्था और शहरी संस्कृति thumb|right|200px|प्राचीन कुआं और जल निकास नहरें वास्तुकला का विकास thumb|right|200px|लोथल के घरों का स्नानघर-शौचालय उत्तर हड़प्पा संस्कृति thumb|200px|(लोथल का पुरातत्व स्थल) लोथल की खुदाई 1957 में आर एस राव द्वारा उत्खनन किया गया। thumb|right|200px|लोथल गोदी गोदी और भंडारगृह thumb|right|200px|प्रमुख कुआं प्रमुख और गौण शहर लोथल से पक्की मिट्टी की नाव का साक्ष्य प्राप्त। होता है तथा सर्वाधिक महत्वपर्ण बंदरगाह लोथल स्थित जवारिय बंदरगाह था 1.एस.आर.राव नेे लोथल को लघुु हड़़पा/लघु मोहनजोदडो़ कहा।लोथल में दोनों नगर एक ही सुरक्षा प्राचीर से घिरा हुआ है | वहाँ बने घरो के दरवाजे सड़क की ओर खुलते है | लोथल से युग्म शवाधान के साक्ष्य मिले है । लोथल एक बन्दरगाह नगर था जहां से गोदीवाड़ा की प्राप्ति हुई है। वह एक लम्बा और चौड़ा फेला हुआ व्यापारिक क्षेत्र है जहाँ से देश विदेश से व्यापार किया जाता था। कई देशो की मुहरे भी प्राप्त हुई । नाप तौल के बाट और तराजू मिले हैं। राष्ट्रीय समुद्री विरात परिसर राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर लोथल में निर्माणाधीन एक महत्त्वाकांक्षी सांस्कृतिक और पर्यटन परियोजना है जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध और विविध 4,500 वर्ष पुरानी समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने और विश्व में सबसे बड़ा समुद्री विरासत परिसर स्थापित करना है। इसमें विश्वस्तरीय दीपस्तंभ संग्रहालय तटीय राज्य मंडप और समुद्री थीम पर आधारित इको-रिसॉर्ट शामिल हैं। भारत के सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय इसका विकास कर रहा है। इसका दीपस्तंभ संग्रहालय विश्व का सबसे ऊँचा होगा। दीपस्तंभ व दीपपोत महानिदेशालय (DGLL) इसका वित्तपोषण कर रहा है। right|thumb|300px|लोथल का नीचे वाला नगर सन्दर्भ श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना श्रेणी:सिन्धु घाटी सभ्यता श्रेणी:गुजरात