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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

जस्टिन इमाम

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जस्टिन इमाम 1974 4 4 हजारीबाग, झारखंड, भारत 2024 1 13 1974 4 4 डीपूगढ़, हजारीबाग, झारखंड, भारत भारतीय भारतीय सांस्कृतिक कार्यकर्ता, कला शैली फैलानेवाले व्यक्ति सोहराय और खोवर कला शैलियों का फैलाव अलका इमाम एडम इमाम्, ईवा इमाम बूलू इमाम जस्टिन इमाम (4 अप्रैल 1974 – 13 जनवरी 2024) एक भारतीय सांस्कृतिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने झारखंड की पारंपरिक जनजातीय भित्ति कला शैलियों सोहराय और खोवर के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।Justin Imam, who popularised traditional Sohrai art, dies https://theprint.in/india/justin-imam-who-popularised-traditional-sohrai-art-dies/1922965/ ThePrint 14 January 2024 14 February 2026 उनके प्रयासों से इन कला रूपों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। प्रारंभिक जीवन जस्टिन इमाम का जन्म हजारीबाग, झारखंड में हुआ था। वे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पद्मश्री सम्मानित बुलू इमाम के पुत्र थे। पारिवारिक वातावरण के कारण वे बचपन से ही झारखंड की जनजातीय संस्कृति और कला संरक्षण गतिविधियों से जुड़े रहे। सोहराय और खोवर कला का संवर्धन जस्टिन इमाम ने सोहराय और खोवर चित्रकला को संरक्षित करने तथा उसे व्यापक मंच दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाई। सोहराय चित्रकला मुख्यतः फसल कटाई के उत्सव के अवसर पर बनाई जाती है, जिसमें प्राकृतिक रंगों से पशु-पक्षी, वनस्पति और ग्रामीण जीवन से जुड़े चित्र बनाए जाते हैं। खोवर चित्रकला विवाह संस्कार से संबंधित है और पारंपरिक रूप से नवविवाहित दंपति के कक्ष की दीवारों पर उकेरी जाती है। उन्होंने भारत के विभिन्न शहरों के साथ-साथ जापान और फ्रांस जैसे देशों में भी प्रदर्शनियों का आयोजन किया, जिससे इन कला रूपों को वैश्विक पहचान मिली। उनके प्रयासों से सोहराय कला को भौगोलिक संकेत (GI) का दर्जा प्राप्त करने में भी सहायता मिली। इन कला शैलियों से प्रेरित चित्रों को भारत की नई संसद भवन की सजावट में भी स्थान मिला। सांस्कृतिक प्रभाव जस्टिन इमाम के प्रयासों से ग्रामीण और जनजातीय महिला कलाकारों को आर्थिक अवसर प्राप्त हुए। उन्होंने स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय मंचों से जोड़ने का कार्य किया तथा झारखंड की पारंपरिक कला को व्यापक पहचान दिलाई। ऐतिहासिक खोज हजारीबाग की प्रागैतिहासिक शैलचित्र कला ऊपरी दामोदर घाटी की सती, महादेव (महूड़ी) और सतपहाड़ पर्वत शृंखलाओं की लगभग चौदह बलुआ पत्थर की शैलाश्रयों में चित्रित की गई है। विद्वानों ने इन शैलचित्रों का काल निर्धारण मेसो-चाल्कोलिथिक (लगभग 10,000 ईसा पूर्व) काल से किया है। साथ ही, इससे भी प्राचीन स्तर के शैलचित्रों के प्रमाण मिलते हैं, जो पुरापाषाण (पैलियोलिथिक) काल को स्पर्श करते हैं। चित्रित शैलाश्रयों में अनेक सूक्ष्म पाषाण उपकरण (माइक्रोलिथ) तथा चिकने किए गए पत्थर के कुल्हाड़ी-शीर्ष (पॉलिश्ड स्टोन ऐक्स-हेड्स) प्राप्त हुए हैं। इनके साथ पुरापाषाण कालीन निवास-स्थलों के प्रमाण, भारी हस्त-कुल्हाड़ियाँ तथा पत्थर के अन्य उपकरण पहाड़ी क्षेत्र में शैलचित्रों के ऊपर और आसपास मिले हैं। नीचे के स्तरों में काले और लाल मृद्भांड (ब्लैक एंड रेड वेयर) तथा लौह उद्योग के अवशेष भी पाए गए हैं। मध्यपाषाण (मेसोलिथिक) काल के शैलचित्रों में जंगली और पालतू पशुओं के चित्र मिलते हैं, जबकि चाल्कोलिथिक काल में मंडलाकार आकृतियाँ और ज्यामितीय रूपांकन दिखाई देते हैं। ये रूपांकन मध्य भारत में वाकणकर और ब्रूक्स (1976) द्वारा निर्धारित कालक्रम के अनुरूप हैं। अब तक ज्ञात सबसे प्राचीन शैलचित्र स्तर सतपहाड़ श्रेणी के सरैया स्थल पर पाया गया, जिसकी खोज 1994 में एरविन न्यूमायर और जस्टिन इमाम ने की थी। इस शैलचित्र में लाल हेमेटाइट से चित्रित एक शैमैनिक (आध्यात्मिक/तांत्रिक) श्रृंखला के चित्र मिलते हैं, जिन्हें मैं पुरापाषाण काल का मानता हूँ। यह हजारीबाग की सबसे मूल्यवान शैलकला मानी जाती है। जस्टिन इमाम ने इन अभियानों तथा विरासत और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए ‘विरासत ट्रस्ट’ की भी स्थापना की। मुख्य स्थल: इस्को, थेथांगी, सरैया, सतपहाड़ I, II एवं III, खंडार, रहम, सिदपा, गोंडा और नौटंगवा। https://virasathazaribagh.blogspot.com/ विरासत ट्रस्ट (Virasat Trust), हजारीबाग 14 February 2026 व्यक्तिगत जीवन जस्टिन इमाम का विवाह अलका इमाम से हुआ था। उनके दो बच्चे थे — एडम इमाम और ईवा इमाम। निधन 13 जनवरी 2024 को हजारीबाग के डिपुगढ़ा स्थित उनके निवास पर हृदयाघात से उनका निधन हो गया। वे 49 वर्ष के थे। इन्हें भी देखें बुलू इमाम संदर्भ श्रेणी:1974 में जन्मे लोग श्रेणी:२०२४ में निधन श्रेणी:भारतीय सांस्कृतिक कार्यकर्ता श्रेणी:झारखंड के लोग श्रेणी:हजारीबाग के लोग