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२०२६ नीट विवाद
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२०२६ नीट विवाद (अंग्रेज़ी: 2026 NEET controversy; जिसे २०२६ नीट-यूजी विवाद भी कहा जाता है) भारत गणराज्य की राष्ट्रीय परीक्षा सेवा (एनटीए) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा २०२६ में व्यापक स्तर पर हुए प्रश्नपत्र रिसाव और अनियमितताओं का एक बड़ा प्रकरण है। ३ मई २०२६ ई॰ को आयोजित यह परीक्षा, जिसमें स्नातक चिकित्सा एवं दन्त चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश चाहने वाले २२.७० लाख से अधिक अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे, १२ मई २०२६ को अन्वेषण के पश्चात् रद्द कर दी गई। अन्वेषण से ज्ञात हुआ कि पूर्व-प्रसारित एक अनुमानित प्रश्नपत्र और वास्तविक प्रश्नपत्र के बीच पर्याप्त समानता थी, जिसके परिणामस्वरूप एनटीए के आन्तरिक लोगों सहित अनेक व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया।
इस विवाद ने देशव्यापी प्रदर्शनों, राजनीतिक आलोचनाओं और भारत के उच्चतम न्यायालय में याचिकाओं को जन्म दिया। यह प्रकरण पूर्व की परीक्षा-सम्बन्धी अनियमितताओं, विशेषतः २०२४ के नीट विवाद के समान था।
== पृष्ठभूमि ==
राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा, जो पूर्व में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान पूर्व परीक्षा (एआईपीएमटी) कहलाती थी, राष्ट्रीय परीक्षा सेवा (एनटीए) द्वारा स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु आयोजित एक अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा है। चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अनिवार्य होने के कारण, यह आवेदकों की संख्या की दृष्टि से भारत की सबसे बड़ी परीक्षा है।
सितम्बर २०१९ में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम २०१९ के लागू होने के पश्चात्, नीट-स्नातक भारत के समस्त चिकित्सा महाविद्यालयों, जिनमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और जवाहरलाल स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसन्धान संस्थान (जिपमर) भी सम्मिलित हैं (जो तब तक पृथक परीक्षाएँ आयोजित करते थे), में प्रवेश के लिए एकमात्र परीक्षा बन गई।
२०२४ में, पाँच मई को नीट-स्नातक परीक्षा के दिन, एक ऐसा ही विवाद तब उत्पन्न हुआ था जब सामाजिक माध्यमों पर अनेक पोस्टों में आरोप लगाया गया कि परीक्षा के प्रश्न पहले ही प्रसारित कर दिए गए थे।
== प्रश्नपत्र रिसाव और परीक्षा रद्दीकरण ==
तीन मई की परीक्षा के कुछ ही समय पश्चात् यह आरोप उभरे कि सीकर, राजस्थान जैसे प्रशिक्षण केंद्रों में व्हाट्सएप तथा अन्य माध्यमों से साझा किए गए एक अनुमानित प्रश्नपत्र या प्रश्न-बैंक के अनेक प्रश्न वास्तविक परीक्षा के प्रश्नों, विशेषकर रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान में, से साम्य रखते थे। समाचारों के अनुसार, १२० तक प्रश्नों में समानता थी।
सीकर के एक रसायन विज्ञान शिक्षक, शशिकान्त सुथार ने अनुमानित प्रश्नपत्र की सामग्री की तुलना आधिकारिक प्रश्नपत्र से करने के पश्चात् अधिकारियों को प्रसारित प्रश्नों के वितरण की सूचना दी और बताया कि लगभग १४० प्रश्न वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे। राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह ने अन्वेषण प्रारम्भ किया, जिसके फलस्वरूप अनेक गिरफ़्तारियाँ हुईं। बाद में, यह मामला केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानान्तरित कर दिया गया।
१२ मई २०२६ को एनटीए ने घोषणा की कि परीक्षा आधिकारिक रूप से रद्द कर दी गई है और पुनर्परीक्षा आयोजित की जाएगी। एक्स (X) पर जारी वक्तव्य में एनटीए ने कहा कि यह निर्णय “छात्रों के हित में” और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता की रक्षा हेतु लिया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि पुनर्परीक्षा की तिथियाँ पृथक से घोषित की जाएँगी। एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों द्वारा पहले जमा शुल्क लौटा दिया जाएगा और न तो नवीन पंजीकरण की आवश्यकता होगी और न ही किसी अतिरिक्त शुल्क की; पूर्ववत अभ्यर्थी आँकड़ों और परीक्षा केन्द्रों का ही उपयोग किया जाएगा। १५ मई को एनटीए ने घोषणा की कि पुनर्परीक्षा २१ जून २०२६ को होगी तथा अभ्यर्थियों को उनके आवेदन शुल्क की वापसी का आश्वासन दिया गया।
== अन्वेषण एवं गिरफ़्तारियाँ ==
राजस्थान में विशेष अभियान समूह ने लातूर के एक प्रशिक्षण संस्थान से पता चले एक अभ्यास-प्रश्नपत्र के ४५ में से ४२ प्रश्नों के वास्तविक परीक्षा में मिलने के पश्चात् जाँच प्रारम्भ की। प्रश्नपत्र का पता लगने पर, नासिक, महाराष्ट्र में डॉ॰ शुभम खैरनार को प्रारम्भिक रूप से गिरफ़्तार किया गया, जिन्होंने प्राथमिक स्रोत से प्रश्नपत्र प्राप्त कर १५ लाख रुपये में विद्यार्थियों को वितरित किए थे।
१२ मई २०२६ को सीबीआई ने आधिकारिक रूप से अन्वेषण का कार्यभार ग्रहण किया और पुणे स्थित रसायन विज्ञान के प्राध्यापक पी॰ वी॰ कुलकर्णी, जिन्हें एनटीए की प्रक्रियाओं से जुड़ा मुख्य अभियुक्त बताया गया, तथा जीव विज्ञान की प्राध्यापिका मनीषा गुरुनाथ मण्डारे सहित अनेक व्यक्तियों की गिरफ़्तारी की घोषणा की। अभियुक्त कथित रूप से विशेष कक्षाएँ चला रहे थे, जिनमें परीक्षा के प्रश्न लिखवाए जाते थे और हस्तलिखित टिप्पणियाँ वास्तविक परीक्षा से मेल खाती पाई गईं। छापों के समय, अधिकारियों ने प्रश्न रिसाव से जुड़े विद्युतीय उपकरण और टिप्पणियाँ बरामद कीं।
अन्वेषकों के अनुसार, यह तन्त्र राजस्थान, महाराष्ट्र एवं अन्य राज्यों में फैला हुआ था। केन्द्रीय शिक्षामन्त्री धर्मेन्द्र प्रधान ने स्वीकार किया कि “निन्ंत्रण शृंखला में सेंध” लगी थी और २०२७ से नीट को संगणक-आधारित परीक्षा प्रारूप में परिवर्तित करने की योजना की घोषणा की।
सीबीआई अन्वेषकों को ऐसे साक्ष्य प्राप्त हुए कि २०२५ का नीट-स्नातक प्रश्नपत्र भी उसी गिरोह द्वारा दूषित किया गया था, जो २०२६ के रिसाव का उत्तरदायी था।
१८ मई २०२६ को सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर स्थित रेणुकाई रसायन विज्ञान प्रशिक्षण संस्थान के स्वामी शिवराज मोटेगांवकर को प्रश्नपत्र रिसाव के सम्बन्ध में गिरफ़्तार किया। अन्वेषण अभिकरण ने नई दिल्ली न्यायालय को बताया कि मोटेगांवकर को २३ अप्रैल २०२६ को रसायन विज्ञान के प्रश्न प्राप्त हुए थे। बाद में एक वीडियो में वे यह दावा करते भी दिखे कि उनके विद्यार्थियों को दिए गए अभ्यास प्रश्न वास्तविक परीक्षा में उपस्थित थे। उनके आवास और संस्थान से प्रश्न-बैंक, प्रलेख, फ़ोन और सुवाह्य संगणक आगे के विश्लेषण हेतु ज़ब्त किए गए। उन्हें नौ दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया गया।
सीबीआई ने नागपुर में दो स्थानों पर उन अभ्यर्थियों के आवासों पर आगे की जाँच की, जिन्हें कथित तौर पर रिसाव प्रश्नपत्र प्राप्त हुए थे। ऐसा विश्वास था कि वे पुणे में पूर्व में गिरफ़्तार सौन्दर्य प्रसाधनालय स्वामिनी मनीषा वाघमारे के सम्पर्क में थे। अभिकरण को सन्देह था कि विद्यार्थियों को परीक्षा से एक दिन पूर्व पुणे बुलाया गया, जहाँ एक निजी सत्र में प्रश्नों पर विचार-विमर्श किया गया। तथापि, इस अन्वेषण के पश्चात् कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई।
२२ मई २०२६ को सीबीआई ने पुणे के एक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मनीषा संजय हवालदार को भौतिकी का प्रश्नपत्र कथित रूप से प्रसारित करने के आरोप में गिरफ़्तार किया, जो बाद में वास्तविक परीक्षा में प्रकट हुआ। उन्हें इन प्रश्नों तक इसलिए पहुँच थी क्योंकि उन्हें एनटीए द्वारा विषय विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया था। हवालदार ने अन्वेषकों के समक्ष स्वीकार किया कि उन्होंने भौतिकी के प्रश्नों को स्मृति से याद कर एक विद्यार्थी के साथ साझा किया था। ये आगे मण्डारे के अनुरोध पर एक सन्देश अनुप्रयोग के माध्यम से प्रसारित हुए। पुणे स्थित उनके आवास पर छापे के समय सीबीआई ने अनेक नीट-स्नातक प्रश्नपत्र, एनटीए परिचय पत्र की प्रतिलिपियाँ और नकदी सहित अन्य सामग्री बरामद की। हवालदार ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने विद्यालय के संगणक का उपयोग कर रिसाव सामग्री मुद्रित की और तत्पश्चात मण्डारे के साथ हुई वार्ता का इतिहास मिटा दिया तथा अपनी हस्तलिखित टिप्पणियाँ जला दीं। हवालदार से भौतिकी के प्रश्न प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को २६ मई २०२६ को गिरफ़्तार किया गया।
सीबीआई ने बाद में स्पष्ट किया कि यह ‘विद्यार्थी’ वस्तुतः भौतिकी का शिक्षक तेजस हर्षदकुमार शाह था, जो पुणे स्थित डॉ॰ अभंग प्रभु चिकित्सा अकादमी से सम्बद्ध था। सीबीआई ने लातूर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ॰ मनोज शिरुरे को भी गिरफ़्तार किया। उत्तरार्ध पर संदेह था कि वे उन चिकित्सकों के समूह में उपस्थित थे जिन्होंने अपने सम्बन्धियों के लिए रिसाव प्रश्नपत्र प्राप्त करने हेतु धनराशि का भुगतान किया था। सीबीआई अन्वेषण से शाह और हवालदार के पति के मध्य वित्तीय लेनदेन और व्हाट्सएप वार्ता का ख़ुलासा हुआ। शाह का नम्बर हवालदार के उपकरण में ‘ईश्वर’ के रूप में सुरक्षित था। शाह ने हवालदार से रिसाव प्रश्न प्राप्त कर उन्हें मोटेगांवकर को दिया, जिन्होंने अन्ततः उन्हें शिरुरे तक पहुँचाया। अभिकरण ने आगे जोड़ा कि शिरुरे और कुलकर्णी ने कथित रूप से उन विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र चलाए जिनके परिवारों ने रिसाव प्रश्नों के लिए प्रति २ लाख रुपये (लगभग २१०० अमरीकी डॉलर) से १० लाख रुपये (लगभग १०,००० अमरीकी डॉलर) तक का भुगतान किया था।
== प्रतिक्रियाएँ ==
परीक्षा रद्द होने से दिल्ली एवं अन्य नगरों में छात्रों और अभिभावकों द्वारा व्यापक प्रदर्शन हुए, जिनमें दिल्ली के शास्त्री भवन में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ के सदस्यों का प्रदर्शन भी सम्मिलित था। लोगों ने उत्तरदायित्व की माँग की तथा राष्ट्रीय परीक्षा अभिकरण के अधिकारियों के त्यागपत्र का आह्वान किया। अनेक छात्र समूहों ने कहा कि बार-बार हो रहे व्यवधानों से तनाव, चिन्ता और अभिप्रेरणा की हानि हुई है। समाचार माध्यमों के अनुसार, प्रश्नपत्र रिसाव के पश्चात् न्यूनतम तीन छात्रों ने आत्महत्या कर ली।
पूर्व मुख्यमन्त्री एम॰ के॰ स्टालिन ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि वर्ष २०२६ के लिए नीट-स्नातक को छूट प्रदान की जाए और राज्यों को अपनी चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने नीट की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि इसने चिकित्सा प्रवेश को अत्यधिक व्यावसायीकृत और प्रशिक्षण-केन्द्र-चालित प्रणाली में बदल दिया है, जिसमें शैक्षिक योग्यता या सामाजिक प्रतिबद्धता के स्थान पर आर्थिक विशेषाधिकार सफलता को निरंतर प्रभावित कर रहा है। सी॰ जोसेफ़ विजय सहित राजनीतिक नेताओं ने नीट को समाप्त करने का आह्वान किया। विपक्ष के नेता राहुल गान्धी ने परीक्षा से निपटने के सरकार के ढंग की आलोचना करते हुए इस रिसाव को युवाओं के भविष्य के विरुद्ध “अपराध” बताया और परीक्षा प्रक्रिया की तुलना नीलामी से की। गान्धी की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता संजय मयूख ने काँग्रेस नेता से इस विषय पर संकीर्ण राजनीति करने से विरत रहने का आग्रह किया।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संघ जैसे चिकित्सा संगठनों ने उच्चतम न्यायालय में याचिकाएँ दायर कर एनटीए में सुधार और न्यायालय-निगरानी में पुनर्परीक्षा की माँग की। शिक्षाविदों ने भी पुनर्परीक्षा की आलोचना करते हुए कहा कि यह ईमानदार विद्यार्थियों के साथ अन्यायपूर्ण था तथा इसने परीक्षा प्रणाली के प्रबन्धन में व्याप्त गम्भीर ख़ामियों को उजागर कर दिया।
२५ मई २०२६ को भारत के उच्चतम न्यायालय ने उस वर्ष के नीट-स्नातक प्रश्नपत्र रिसाव मामले पर अपने २०२४ के निर्णय के पश्चात् गठित समिति की सिफ़ारिशों के कार्यान्वयन पर स्थिति प्रतिवेदन माँगा।
== विरोध प्रदर्शन ==
६ जून २०२६ को कॉकरोच जनता पार्टी ने नई दिल्ली के जन्तर मन्तर पर एक प्रदर्शन का नेतृत्व किया जिसमें नीट प्रश्नपत्र रिसाव को लेकर केन्द्रीय शिक्षामन्त्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्यागपत्र की माँग की गई।
पर्यावरणविद् एवं शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन में प्रमुख व्यक्तित्व रहे हैं, जो राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन में उत्तरदायित्व की माँग कर रहे हैं। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी संघ के छः छात्रों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे हैं।
== पुनर्परीक्षा ==
२१ जून २०२६ को निर्धारित पुनर्परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्र निर्माताओं, अनुवादकों, मध्यस्थों एवं अन्य दल सदस्यों को एक अज्ञात स्थान पर सुरक्षित रखा गया। अंकीय उपकरणों का उपयोग प्रतिबन्धित कर दिया गया और केवल अधिकृत कार्मिकों को ही सुविधा केन्द्र में प्रवेश की अनुमति थी। समस्त सम्बद्ध व्यक्तियों को बाहरी स्रोतों से किसी भी सम्पर्क से बचाने के लिए परीक्षा समाप्ति तक निगरानी में रखा गया। प्रश्नपत्र विकास से लेकर अन्तिम परिवहन तक, प्रत्येक चरण पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। रक्षामन्त्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई पूर्व उच्च-स्तरीय बैठक के सुझाव के पश्चात्, यह सुनिश्चित किया गया कि भारतीय वायुसेना के विमान प्रश्नपत्रों को विभिन्न उप-स्थानों तक ले जाएँगे, जहाँ से उन्हें पुनर्परीक्षा हेतु परीक्षा केन्द्रों पर भेजा जाएगा।
पुनर्परीक्षा के प्रवेशपत्र डाउनलोड करते समय अनेक अभ्यर्थियों ने आधिकारिक प्रवेशद्वार पर तकनीकी बाधाएँ आने की सूचना दी और शुल्क वापसी प्रक्रिया के सम्बन्ध में स्पष्टीकरण भी माँगा। उठाई गई समस्याओं को एनटीए ने स्वीकार किया और सम्बन्धित दलों द्वारा शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त, अभिकरण ने यह भी बताया कि वापसी राशि सीधे आधिकारिक प्रवेशद्वार पर साझा बैंक विवरण में जमा कर दी जाएगी तथा विद्यार्थियों को इस प्रक्रिया से जुड़े अन्तर्जाल पर प्रसारित होने वाले कपटपूर्ण सन्देशों से सावधान रहने की सलाह दी।
एनटीए ने सन्दिग्ध गतिविधि पर निगरानी रखने तथा पुनर्परीक्षा से सम्बन्धित मिथ्या सूचना चिह्नित करने के लिए सामाजिक माध्यमों एवं सन्देशन मंचों की निगरानी हेतु सम्बन्धित प्राधिकरणों के साथ कार्य किया। इस प्रयास के अंग के रूप में, अहमदाबाद नगर पुलिस के साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने राजस्थान से दो लोगों को गिरफ़्तार किया, जिन पर तत्काल सन्देश सेवा टेलीग्राम पर ऐसे चैनल संचालित करने का आरोप था जो नीट की पुनर्परीक्षा के प्रश्न उपलब्ध कराने का वचन देकर धन माँग रहे थे। यद्यपि, उनके पास प्रश्नपत्र का कोई वास्तविक साक्ष्य नहीं पाया गया। १६ जून २०२६ को इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मन्त्रालय (मेइटी) ने पुनर्परीक्षा से सम्बन्धित किसी भी अनावश्यक आँकड़े के प्रसार को रोकने के लिए २२ जून २०२६ तक सम्पूर्ण भारत में टेलीग्राम को अस्थायी रूप से अवरुद्ध करने का निदेश जारी किया। मन्त्रालय ने टेलीग्राम को ३० जून २०२६ तक सन्देश सम्पादन सुविधा को अवरुद्ध करने का भी निर्देश दिया ताकि इसके दुरुपयोग को सीमित किया जा सके। इस क़दम का एनटीए ने स्वागत किया और आगे यह भी कहा कि जिन सामान्य जनता ने वास्तविक प्रयोजनों हेतु इस मंच का उपयोग किया, उन्हें हुई असुविधा पर उन्हें खेद है। टेलीग्राम ने इस निर्णय को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। तथापि, न्यायालय ने आदेश को बरक़रार रखा।
== सम्बन्धित विषय ==
राष्ट्रीय परीक्षण सेवा
राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट)
== सन्दर्भ ==
== अग्रिम पठन ==
Ammad, Aatif (26 May 2026). "'Come back, my son': Indian exam leak leaves trail of death, despair, anger". Al Jazeera English. अभिगमन तिथि: 26 May 2026.
Lakhera, Vedaant (22 May 2026). "The real NEET crisis lies inside the system". Frontline (magazine). अभिगमन तिथि: 23 May 2026.
Nilay, Nanditesh (17 May 2026). "NEET Paper Leak: What is ethical governance in public examinations?". The Indian Express. अभिगमन तिथि: 17 May 2026.
Ozarkar, Vallabh (16 May 2026). "The professor next door: How a retired Latur chemistry teacher went from NEET mentor to CBI's key accused". The Indian Express. अभिगमन तिथि: 17 May 2026.
Naaz, Fareha (16 May 2026). "NEET 2026 paper leak: From involvement of NTA member to full modus operandi to arrests — what we know so far on CBI probe". Mint. अभिगमन तिथि: 17 May 2026.
"Testing troubles: On the National Testing Agency, NEET-UG 2026". The Hindu. 14 May 2026. अभिगमन तिथि: 19 May 2026.
Tewari, Trisha (12 May 2026). "NEET 2026 paper leak: How many more scandals before students lose faith completely?". The Times of India. अभिगमन तिथि: 21 May 2026.
Ratti, Pragati (12 May 2026). "Why Was NEET-UG 2026 Cancelled? Inside The Paper Leak Trail That Forced NTA To Order Re-Examination". News18. अभिगमन तिथि: 17 May 2026.