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सड़न
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अंगूठाकार
अंगूठाकार
सड़न (en:Putrefaction) मृत्यु के बाद शरीर की पांचवीं अवस्था होती है।
मरने के बाद सबसे पहले शरीर पीला पड़ना शुरू हो जाता है। उसके बाद अलगोर क्षण आता है। फिर शरीर कठोर होना शुरू हो जाता है। उसके बाद लिवोर (livor) क्षण आता है। और ये सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंत में शरीर सड़ना शुरू होता है। इस प्रक्रिया के दौरान मानव या जानवर का मृत शरीर नष्ट होना शुरू हो जाता है, अथवा सड़ना शुरू हो जाता है।
विस्तार से देखें तो सडन का मतलब प्रोटीन का विघटन होना, ऊतकों के बीच सामंजस्य का टूटना तथा अंगों का द्रवीकरण हो जाना होता है। यह बैक्टीरिया या कवक पाचन द्वारा कार्बनिक पदार्थ के अपघटन के कारण होता है। जोकि शरीर में गैसों का उत्पादन करते हैं, जो उतकों और शारीरिक अंगो के क्षय का कारण बनती हैं।
शरीर के सड़ने का सटीक समय कई विभिन्न कारणों पर निर्भर करता है। अंदरूनी कारक जो कि शरीर के सड़ने के समय को प्रभावित करते हैं, उनमे मुख्यता है, उम्र अर्थात किस उम्र में व्यक्ति कि मृत्यु हुई, मरने का कारण क्या था और कैसी चोट कि वजह से मृत्यु हुई। बाहरी कारक जो सडन कों प्रभावित करते हैं, उनमे जगह का तापमान, नमी, हवा का बहाव, कपड़े तथा रौशनी इत्यादि आते हैं। Fredrik C. Kugelberg, Alan Wayne Jones (2007). "Interpreting results of ethanol analysis in postmortem specimens: A review of the literature". Forensic Science International. 165 (1)
सड़न का पहला लक्षण त्वचा के बाहर पेट पर, जहा से बड़ी आंत शुरू होती है और साथ ही जिगर की सतह के नीचे एक हरे रंग का पदार्थ बनना शुरू हो जाता है।
कुछ रसायन सडन की प्रक्रिया में विलम्ब करने के लिए भी इस्तेमाल किये जाते हैं। Luff, Arthur. Text-book of forensic medicine, and toxicology (Volume 1 ed.). Longmans, Green and Company, 1895. pp. 57–62
विस्तार
थर्मोडाइनामिक की भाषा में देखा जाए तो, सभी कार्बनिक ऊतक रासायनिक ऊर्जा से बने हैं, अगर उन्हें जीवित अंगी के लगातार जैव रासायनिक रखरखाव से न रखा जाये तो पानी के साथ रसायनिक प्रक्रिया होने के कारण वे अमीनो एसिड में टूटना शुरू हो जाते हैं, इस प्रक्रिया को हाइड्रोलिसिस कहा जाता है। अपघटित शरीर के प्रोटीन का टूटना एक सहज प्रक्रिया है।
कोशीय प्रोटीन का जीवाणु पाचन शरीर के उतकों को कमज़ोर कर देता है। जैसे जैसे प्रोटीन छोटे छोटे अवयवों में टूटने लगते हैं, जीवाणु गैस और कार्बनिक पदार्थों का मलोत्सर्ग करना शुरू कर देते हैं। लगातार बढती gas कि मात्र उतकों कों और कमज़ोर क्र देती है और अंत में वे टूटने लगते हैं। लगातार gas का बनना, प्रोटीन का टूटना, ये सारी प्रक्रियाओं से अंत में शरीर ढांचे में बदलने लगता है, पूरा शरीर अपघटित होने लगता है। जीवनुओ के इस लगातार क्रिया के कारण शरीर में इथेनॉल भी बनने लगता है, जो कि शरीर में पोस्टमार्टम में अल्कोहल कि सही मात्रा का पता लगाने में मुश्किल पैदा करता है।
शरीर का अपघटित होना वेह जीवरसायन प्रक्रिया है, जो किसी जीवन के मरने के बाद शुरू होती है और तब तक चलती रहती है जब तक कि वह शरीर ढांचे में नही तब्दील हो जाता है। सडन अपघटन की कई अवस्थाओं में से एक है। कुछ रसायनिक जहर खाने से सडन कि प्रक्रिया में देरी भी हो जाती है। जैसे कि आर्सेनिक इत्यादि। Fredrik C. Kugelberg, Alan Wayne Jones (2007). "Interpreting results of ethanol analysis in postmortem specimens: A review of the literature". Forensic Science International.
अनुमानित समय
१-२ दिन: पीला पड़ना, अलगोर, शरीर अकड़ना, लइवोर और उसके बाद सडन शुरू होती है।
२-३ दिन: पेट कि सतह पर रंग फीका पड़ने लगता है। गैसों के बनने की वजह से पेट फूलने लगता है।
३-४ दिन: मलिनकिरण फैलता जाता है, और मलिनकिरण के फैलने कि वजह से शरीर की नसें दिखने लगती हैं।
५-६ दिन: पेट पूरी तरह फूल चूका होता है और त्वचा पर फफोले दिखने लगते हैं।
१०-20 दिन: शरीर कला पड़ने लगता है और शरीर से हानिकारक बदबू आने लगती है।
२ हफ्ते: अंदरूनी gas के ज्यादा से ज्यादा दबाव के कारण पेट पूरी तरह फूल जाता है।
३ हफ्ते: ऊतक नर्म हो जाते हैं। शारीरिक अंग फटने लगते हैं। नाखून गिरने लगते हैं।
४ हफ्ते: नर्म अंगों में पानी बनने लगता है, चेहरा पहचानने अयोग्य हो जाता है। अंततः शरीर ढांचे में परिवर्तित हो जाता है।Williams, Anna (13 November 2015). "Coming to a field near you? The 'body farms' where human remains decompose in the name of science". The Conversation US, Inc.
प्रभावित करने वाले तत्व
सन्दर्भ
श्रेणी:मृत्यु के चिकित्सकीय पक्ष
श्रेणी:शव-परीक्षा
श्रेणी:कीमियाई प्रक्रियाएँ
श्रेणी:परिगलन