Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

मालपुरा

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

अगस्त 2022 मालपुरा टोंक जिले की एक तहसील है , जो कि राजस्थान की राजधानी जयपुर से 90 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है । जिसे राजा मालदेव पँवार की नगरी के नाम से भी जानते है। मालपुरा तहसील के अंतर्गत डिग्गी नामक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जहाँ कल्याण धणी डिग्गीपुरी का राजा के नाम से प्रसिद्ध मंदिर है। मालपुरा में जैन धर्म की आस्था का केंद्र दादाबाड़ी स्थित है। मालपुरा में प्राकृतिक रूप से निर्मित विशाल तालाब है जिसे बम्ब तालाब के नाम से जाना जाता है । मालपुरा में ही राजस्थान के लौहपुरुष श्री दामोदर लाल व्यास का जन्म हुआ था , वे राजस्थान के प्रथम गृहमंत्री रहे । इनके पुत्र श्री सुरेंद्र व्यास कई बार क्षेत्र के विधायक रह चुके है। वर्तमान में मालपुरा-टोडारायसिंह एक सम्मिलित विधानसभा क्षेत्र है जहाँ के विधायक वर्तमान में श्री कन्हैयालाल चौधरी (ठेकेदार) जी है। टोडारायसिंह प्राकृतिक रूप से रमणीय स्थल है । जहां कई दर्शनीय बावड़ियाँ और छतरियां है। यहीं पर सन्त पीपा की गुफा भी स्थित है। मालपुरा जिले में टोडारायसिंह (बरवास उपतहसील सहित) पीपलू तहसील तथा अजमेर जिले से अराई भी सम्मिलित की जा सकती हैं।.... पूर्व में मालपुरा टोंक जिले का हिस्सा था.. मालपुरा History राजस्थान के टोंक जिले में स्थित मालदेव पंवार की नगरी के रूप में मालपुरा प्रसिद्ध है. किसीज़माने में यह नगर परकोटे के भीतर था, जिसके अवशेष एवं प्राचीन दरवाजे आज भी मौजूद हैं. अभी जहाँ थाना लग रहा है वह राजा मालदेव का निवास स्थान था. इसके चारों तरफ गहरी खाई थी जो हमेशा पानी से भरी रहती थी. झालरा तालाब के किनारे 600 वर्ष प्राचीन नीलकंठ महादेव का मंदिर है इसकी स्थापना लाम्बा ठिकाने के हरी सिंह ने की थी. मंदिर के सामने विशाल मैदान है. कहते हैं इसमें महाराणा प्रताप की सेना ने पड़ाव डाला था जिला 1956 तक स्वयं जिला मुख्यालय था जो जयपुर ढूंढाड़ के अंतर्गत आता था जिसे बाद में टोंक जिले में स्थानांतरित कर दिया गया जिससे यह क्षेत्र अपेक्षाओं का शिकार होता गया । यहां से टोडारायसिंह जयपुर रेल मार्ग वाया फागी डिग्गी रेनवाल हुआ करता था जिसे भी 1991 में बंद कर दिया गया जिससे यह क्षेत्र काफी पिछड़ा रह गया.... यहां की सबसे बड़ी जल सिंचाई बांधों में टोरडी सागर,चांदसेन बांध, आदि प्रमुख हैं। मासी नदी - पारली,आखतडी़ व डोरिया आदि गाँवों में टोंक व जयपुर जिले की सीमा निर्धारित करती हुई स्टेट हाईवे 37 ए को क्राँस करती है।Rivers detail सहोदरा नदी - बनास की सहायक नदी पर टोरडी़ सागर में ब्रिटिशकालीन बांध बना है। धार्मिक नगरी मालपुरा में प्रमुख मंदिर 1.डिग्गी कल्याण धनी जी का मंदिर 2.जैन श्वेतांबर पंत की दादाबाड़ी मालपुरा 3.मां सिंधोलिया जी का मंदिर,सिंधोलिया 4.ऊन की माताजी टोरडी सागर 5.खोड़ियाजी 6.घाटी बालाजी 7.स्याह बालाजी मंदिर 8.कुराड़ भैरव जी 9.नाडी वाले बाबा का धाम पचेवर 10.नगर गाँव की पहाडी़ पर स्थित चामुण्डा माता 11.तिलांजू - तिलभांडेश्वर महादेव - आस पास का सबसे बडा चमत्कारी शिवलिंग 12. भोपालाव महादेव शिवलिंग *टोडारायसिंह*:- टोडारायसिंह तहसील में प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां जल देवी का स्थान ग्राम बावड़ी माताजी में स्थित है जहां पर प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं का मेला हर नवरात्रि में लगता है तथा वर्ष पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है प्रसिद्ध मां जल देवी लकवा ग्रस्त नेत्र दोष से संबंधित आदि बीमारियों का निराकरण करती है। टोडारायसिंह शहर सोलंकी राजवंशों की राजधानी रहा है तथा यहां का गौरवशाली इतिहास राजस्थान की संस्कृति में चार चांद लगाता है । सज्जो बाई सोलंकिनी जिनका विवाह मेवाड़ महाराणा उदयसिंह जी के साथ हुआ था इस कारण महाराणा प्रताप की छोटी मां का पीहर होने के कारण इसे महाराणा प्रताप का ननिहाल होने का गौरव प्राप्त है। यहां की घटटी ,पट्टी ,बावड़ी , डाबड़ी बहुत प्रसिद्ध है। मेवाड़ महाराणा रायमल के पुत्र उड़ना राजकुमार के नाम से प्रसिद्ध पृथ्वीराज सिसोदिया के साथ टोडा के राव सुरताण की पुत्री राजकुमारी ताराबाई का विवाह हुआ था इस कारण इनके नाम पर अजमेर के प्रसिद्ध दुर्ग का नाम तारागढ़ दुर्ग रखा गया है। ताराबाई की वीरता के किस्से बहुत वीरता तथा साहसी हैं जो यहां की नारीशक्ति का एहसाह कराती हैं। यहां पर 365 बावड़िया हैं जिसमें से हाड़ी रानी कुंड बहुत प्रसिद्ध है । यहां पर तक्षक गिरी नामक लंबी पहाड़ी श्रृंखला अवस्थित है जो देवली जहाजपुर तक जा रही है. । पास ही बीसलदेव जी का मंदिर ,बराई माताजी, किलेश्वर मन्दिर,बीसलपुर बांध, प्रसिद्ध कल्याणराय जी का मन्दिर, के बालाजी भासू में स्थित चारभुजा नाथ जी का मंदिर, लाडपुरा बालाजी काकरा बालाजी, बरवास की प्रसिद्ध ब्राह्मणी माताजी आदि मंदिर प्रसिद्ध हैं। एवं पुरानी इमारतें महल छतरियां विश्व प्रसिद् हैं जिनमें एक खंबे की छतरी, रूठी रानी महल, झांसी की रानी महल, नो हाथ के छाजे तथा संत पीपाजी की गुफा आदि प्रसिद्ध हैं। यहां बुद्धसागर ,आनासागर (आमला) नामक झीलें प्रसिद्धहैं। यहां बारिश के समय भेरूं धाम झरना अति सुंदर दृश्य प्रकृति में चार चांद लगाता हैं। लांबाहरिसिंह :- यह ग्राम अब कस्बे का रूप ले चुका हैं जो कुछ सालों में तहसील व नगरपालिका बन सकता हैं। यहां हरिसिंह जी के महल , हरिसिंह कुंड , भोपालावजी , सिंधोलिया माताजी अति प्रसिद्ध हैं। पचेवर :- यहां का गढ़ पैलेस अब हॉटल का रूप ले चुका हैं यहां का पम्पासागर तालाब अति प्रसिद्ध हैं।जिसके किनारे रियासतकालीन छतरियाँ है। पारली:- टोंक जिले के प्रथम शहीद का स्मारक :-देश को प्रथम राजस्थानी नौसेनिक शहीद देने वाला गाँव।गोवा युद्ध 1961 में पारली निवासी शम्भू सिंह पुत्र कल्याण सिंह शहीद हुयें जो टोंक जिले के प्रथम शहीद थे।बस स्टेंड पर भव्य स्मारक है।http://www.rajasthanpatrika.com//मई 2026 InternetArchiveBot चौधरी निखिलेश मेवाड़ा ग्राम बावड़ी माताजी तहसील टोडारायसिंह जिला टोंक राजस्थान