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चाम्पानेर
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चाम्पानेर Champanerચાંપાનેર Champaner Fort.jpg चाम्पानेर का दुर्ग चाम्पानेर India Gujarat 22.486 73.537 inline, title गुजरात में स्थिति देश प्रान्त गुजरात ज़िला पंचमहाल ज़िला 2979 2011 भाषा प्रचलित गुजराती भारतीय मानक समय +5:30
चाम्पानेर (Champaner) भारत के गुजरात राज्य के पंचमहाल ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है।"Gujarat, Part 3," People of India: State series, Rajendra Behari Lal, Anthropological Survey of India, Popular Prakashan, 2003, ISBN 9788179911068"Dynamics of Development in Gujarat," Indira Hirway, S. P. Kashyap, Amita Shah, Centre for Development Alternatives, Concept Publishing Company, 2002, ISBN 9788170229681"India Guide Gujarat," Anjali H. Desai, Vivek Khadpekar, India Guide Publications, 2007, ISBN 9780978951702
विवरण
चंपानेर गुजरात में बड़ौदा से 21 मील (लगभग 19.2 कि.मी.) और गोधरा से 25 मील (लगभग 40 कि.मी.) की दूरी पर स्थित है। यह गुजरात की मध्ययुगीन राजधानी थी। चांपानेर, जिसका मूल नाम 'चंपानगर' या 'चंपानेर' भी था, की जगह वर्तमान समय में पावागढ़ नामक नगर बसा हुआ है। यहाँ से चांपानेर रोड स्टेशन 12 मील (लगभग 19.2 कि.मी.) है। इस नगर को जैन धर्म ग्रन्थों में तीर्थ स्थल माना गया है। जैन ग्रन्थ 'तीर्थमाला चैत्यवदंन' में चांपानेर का नामोल्लेख है- 'चंपानेरक धर्मचक्र मथुराऽयोध्या प्रतिष्ठानके -।' पावागढ़ पहाड़ी के शिखर पर बना कालिका माता मंदिर पावन स्थल माना जाता है। पहाड़ी पर बना यह काली मंदिर बहुत प्राचीन है। कहा जाता है कि विश्वामित्र ने उसकी स्थापना की थी। इन्हीं ऋषि के नाम से इस पहाड़ी से निकलने वाली नदी 'विश्वामित्री' कहलाती है। महदजी सिंधिया ने पहाड़ी की चोटी पर पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनवाईं थीं। चांपानेर तक पहुँचने के लिए सात दरवाजों में से होकर जाना पड़ता है। यहां वर्षपर्यन्त बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
इतिहास
प्राचीन चांपानेर नगरी 12 वर्ग मील में बसी हुई थी। चांपानेर को राजा चंपा भील ने बसाया था ,https://books.google.co.in/books?id=JRluAAAAMAAJ&q=Pavagadh+Bhil&dq=Pavagadh+Bhil&hl=hi&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&sa=X&ved=2ahUKEwjf6pvOqZf7AhXC-TgGHWCdDkMQ6AF6BAgHEAM#Pavagadh%20Bhil Cauhānoṃ kā br̥had itihāsa: Sāmbhara-Ajamera ke, Raṇathambhora ke, Nādolapālī ke Cauhāna; Jālaura ke Sonagirā, Sāñcora ke, Sāñcorā Ābū Candrāvatī, va Sirohī ke Devaṛa Khaṇḍelā, Khetaṛī, Prapūraṇā ke Nirvāṇa, Rāṭha, Nīmarānā, Hariyāṇā ke Cauhāna, Uttarapradeśa ke Cauhāna Joṛa Cauhāna, Mauhila, Cāhila, Bālesā, aṭhavā Bālauta Cauhāna, Kyāmakhānī Bhaṛauca (Gujarāta) ke prācīna Cauhāna, Dhvalapurī ke prācīna Cauhāna, Pratāpagaṛha ke Cauhāna Rāyabariyā aura Candāvara ke Cauhāna, U. Pra. ke Gīlhaṇa, yā Gīlhā Cauhāna, Naipāla Samrāṭa Mālhaṇa Cauhāna, ādi kā śaudhapūrṇa vivaraṇa loka devatā Gūgājī Jīṇamātā, Harshanātha Cauhāna Devasiṃha Nirvāṇa 1992 Bham̐vara Pr̥thvīrāja Siṃha Nirvāna Cauhāna hi वह एक शक्तिशाली राजा थे , इन्होंने 1300 भगोड़े राजाओं से युद्ध किया था , पावागढ़ की पहाड़ी पर एक दुर्ग भी था, जिसे पवनगढ़ या पावागढ़ कहते थे, राजा चंपा भील ने ही चांपानेर का किला बनवाया थाhttps://books.google.co.in/books?id=tQVuAAAAMAAJ&q=Survey+of+Kheechi+Chauhan+History+Archive&dq=Survey+of+Kheechi+Chauhan+History+Archive&hl=hi&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&sa=X&ved=2ahUKEwiRmbD5opb7AhVz8DgGHT7pC2MQ6AF6BAgLEAM#Champa%20Bhil Survey of Kheechi Chauhan History: With Biographical Notes Nizami Akhtar Hussain 1990 Kheechi Chauhan Shodh Sansthan en यह दुर्ग नष्ट होने की कगार पर है लेकिन भील और कोल आदिवासियों की कुलदेवी माता कालिका का मंदिर अभी भी यहीं सही सलामत है, 1405 ईसवी में खिंचियो ने राजा चंपा भील के बाद चांपानेर पर अधिकार कर लिया https://www.indianrajputs.com/view/chorangala Chorangala (Princely State) Rathore Abhinay Rajput Provinces of India en 2022-11-05। चांपानेर की पहाड़ी समुद्र तल से 2800 फुट ऊँची है। इसका संबंध ऋषि विक्रमादित्य से बताया जाता है। चांपानेर का संस्थापक गुजरात नरेश वनराज का चंपा नामक मंत्री था। चांद बरौत नामक गुजराती लेखक के अनुसार 11वीं शती में गुजरात के शासक भीमदेव के समय में चांपानेर का राजा मामगौर तुअर था।1405ई. में खींचियो ने चांपानेर पर अधिकार कर लिया। 1484 ई. में महमूद बेगड़ा ने इस नगरी पर आक्रमण किया और वीर राजपूतों ने विवश होकर अपने प्राण शत्रु से लड़ते-लड़ते गवां दिए। रावल पतई जयसिंह और उसका मंत्री डूंगरसी पकड़े गए और इस्लाम स्वीकार न करने पर मुस्लिम आक्रांताओं ने 17 नवम्बर 1484 ई. में उनका वध कर दिया। इस प्रकार चांपानेर के 184 वर्ष के प्राचीन राजपूत राज्य की समाप्ति हुई।
मुग़लों का अधिकार
1535 ई. में मुग़ल बादशाह हुमायूँ ने चांपानेर दुर्ग पर अधिकार कर लिया, पर यह आधिपत्य धीरे-धीरे शिथिल होने लगा और 1573 ई. में अकबर को नगर का घेरा डालना पड़ा और उसने फिर से इसे हस्तगत कर लिया। इस प्रकार संघर्षमय अस्तित्व के साथ चांपानेर मुग़लों के कब्जे में प्राय: 150 वर्षों तक रहा। 1729 ई. में सिंधिया का यहाँ अधिकार हो गया और 1853 ई. में अंग्रेज़ों ने सिंधिया से इसे लेकर बंबई (वर्तमान मुम्बई) प्रांत में मिला दिया। वर्तमान चांपानेर मुस्लिमों द्वारा बसाई गई बस्ती है। राजपूतों के समय का चांपानेर यहाँ से कुछ दूर है।
स्थापत्य
गुजरात के सुलतानों ने चांपानेर में अनेक सुंदर प्रासाद बनवाए थे। ये सब अब खंडहर हो गए हैं। 'हलोल' नामक नगर, जो बहुत दिनों तक संपन्न और समृद्ध नगर रहा, चांपानेर का ही उपनगर था। इसका महत्व गुजरात के सुलतान बहादुरशाह की मृत्यु के पश्चात (16वीं शती) समाप्त हो गया।
इन्हें भी देखें
पंचमहाल ज़िला
सन्दर्भ
श्रेणी:गुजरात के शहर
श्रेणी:पंचमहाल ज़िला
श्रेणी:पंचमहाल ज़िले के नगर
श्रेणी:गुजरात में पर्यटन आकर्षण