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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

काव्यानुशासन

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काव्यानुशासन 'काव्यानुशासन' का विवेचन : सम्पूर्ण एवमं सर्वोत्कृष्ठ पाठ्यपुस्तक काव्यानुशासन प्रायः संग्रह ग्रंथ है। राजशेखरके 'काव्यमीमांसा', मम्मटके 'काव्यप्रकाश', आनंदवर्धन के 'ध्वन्यालोक', अभिनव गुप्तके 'लोचन' से पर्याप्त मात्रामें सामग्री ग्रहण की है। मौलिकता के विषयमें हेमचंद्राचार्यका अपना स्वतंत्र मत है। हेमचंद्र मतसे कोई भी ग्रंथकार नयी चीज नहीं लिखता। यद्यपि मम्मटका 'काव्यप्रकाश' के साथ हेमचंद्रका 'काव्यानुशासन' का बहुत साम्य है। पर्याप्त स्थानों पर हेमचंद्राचार्यने मम्मटका विरोध किया है। हेमचंद्राचार्यके अनुसार आनंद, यश एव कान्तातुल्य उपदेश ही काव्यके प्रयोजन हो सकते है तथा अर्थलाभ, व्यवहार ज्ञान एवं अनिष्ट निवृत्ति हेमचंद्रके मतानुसार काव्यके प्रयोजन नहीं है। 'काव्यानुशासन से काव्यशास्र के पाठकों कों समजने में सुलभता, सुगमता होती है। मम्मटका 'काव्यप्रकाश' विस्तृत है, सुव्यवस्थित है, सुगम नहीं है। अगणित टीकाएं होने पर भी मम्मटका 'काव्यप्रकाश' दुर्गम रह जाता है। 'काव्यानुशासन' में इस दुर्गमता को 'अलंकारचुडामणि' एवं 'विवेक' के द्वारा सुगमता में परिणत किया गया है। 'काव्यानुशासन' में स्पष्ट लिखते है कि वे अपना मत निर्धारण अभिनवगुप्त एवं भरत के आधार पर कर रहे हैं। सचमुच अन्य ग्रंथो-ग्रंथकारो के उद्वरण प्रस्तुत करते हेमचंद्र अपना स्वयं का स्वतंत्र मत, शैली, दष्टिकोणसे मौलिक है। ग्रंथ एवं ग्रंथकारों के नाम से संस्कृत-साहित्य, इतिहास पर प्रकाश पडता है। सभी स्तर के पाठक के लिए सर्वोत्कृष्ठ पाठ्यपुस्तक है। विशेष ज्ञानवृद्वि का अवसर दिया है। अतः आचार्य हेमचंद्र के 'काव्यानुशासन' का अध्ययन करने के पश्चात फिर दुसरा ग्रंथ पढने की जरुरत नहीं रहती। सम्पूर्ण काव्य-शास्त्र पर सुव्यवस्थित तथा सुरचित प्रबंध है। श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ