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मध्यकालीन दर्शन
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thumb|230px|सात उदार कलाओं के बीच स्थित दर्शन; (12वीं शताब्दी) में हेराड वॉन लैंड्सबर्ग के हॉर्टस डेलिसिअरम से लिया गया चित्र
मध्यकालीन दर्शन मध्य युग का दर्शन है, जो लगभग 5वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी मध्य माना जाता है। इसकी शुरुआत 8वीं शताब्दी में बगदाद और शारलेमेन के दरबार से हुई।स्पेड पॉल विन्सेंट https://plato.stanford.edu/archives/sum2018/entries/medieval-philosophy/ मध्यकालीन दर्शन स्टैनफोर्ड इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फिलॉसफी एडवर्ड एन॰ ज़ाल्टा एडवर्ड एन॰ ज़ाल्टा भाषा और सूचना के लिए अध्ययन केंद्र 2018 यह प्राचीन यूनान और रोम की संस्कृति की पुनर्खोज और धार्मिक समस्याओं को निवारण करने पर केंद्रित था। इसमें ईश्वर को समझना उस समय के दार्शनिकों के अध्ययन का केंद्र बिंदु था।
एतिहासिक पृष्ठभूमि
मध्यकालीन दर्शन के इतिहास को पारंपरिक रूप से दो मुख्य कालों में विभाजित किया गया है। पहला, प्रारंभिक मध्य युग के बाद 12वीं शताब्दी तक का काल, जिसे शैक्षणिक काल के नाम से जाना गया इसमें अरस्तू और प्लेटो के कार्यों की पुनर्खोज, अनुवाद और अध्ययन का विकास हुआ। दूसरा, 12वीं, 13वीं और 14वीं शताब्दी का "स्वर्ण युग," जिसमें प्राचीन दर्शन की पुनर्प्राप्ति, अरबी व्याख्याकारों का समावेश और धर्म, तर्कशास्त्र व तत्वमीमांसा इत्यादि के क्षेत्रों में विकास हुआ।https://archive.org/details/cambridgehistory01pasn मध्यकालीन दर्शन का इतिहास पासनु रोबर्ट कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस 2010 978-0-521-76216-8 कैम्ब्रिज 1 परिचय limited
पुनर्जागरण काल के मानवतावादियों ने मध्यकालीन दर्शन के प्रारंभिक मध्य युगीन शैक्षणिक काल को "बर्बर" कहकर अपमानजनक रूप से देखा, क्योंकि यह ग्रीक और रोमन संस्कृति के शास्त्रीय युग और पुनर्जागरण के बीच का समय था। उनके दृष्टिकोण में यह काल शास्त्रीय संस्कृति से अलग था। हालांकि, आधुनिक इतिहासकार इसे एक महत्वपूर्ण दार्शनिक विकास का युग मानते थे, क्योंकि यह काल ईसाई धर्मशास्त्र से प्रभावित था। इस युग के प्रमुख विचारकों में थॉमस एक्विनास का नाम शामिल हैं। इन्होंने शैक्षणिक काल को "बर्बर" कहकर अपमानजनक रूप से देखने वाले दार्शनिकों की आलोचना की।
इन्हें भी देखें
ईसाई दर्शन
सन्दर्भ
श्रेणी: दर्शनशास्त्र