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बावजी चतुर सिंहजी
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thumb|सन्त कवि महाराज चतुर सिंहजी
सन्त कवि महाराज चतुर सिंहजी जो अब बावजी चतुर सिंहजी के नाम से भी जाने जाते हैं, भारत के एक लोकप्रिय संत-कवि थे।Kanhaiyalal Rajpurohit, Bavji Chtur Singhji - Rajasthani Writer, 1996, page 96, ISBN 81-260-0163-1 उनका जन्म करजली परिवार में हुआ था जो मेवाड़ के 61वें महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय (उदयपुर, शासनकाल 1710-1734 ई.) के तीसरे पुत्र महाराज बाग सिंह के वंशज हैं। इनके पिता का नाम महाराज सूरत सिंह था जबकि माता का नाम रानी कृष्ण कँवर था। चतुर सिंहजी चार भाइयों में सबसे छोटे थे, उनका विवाह चापपोली के ठाकुर इंदर सिंह के छोटे भाई ठाकुर मगन सिंह की पुत्री लाड कुंवर से हुआ था, परिवार में इकलौती संतान होने के कारण उनका नाम लाड (प्रिय / प्रिय / प्रिय बच्चा) कुंवर रखा गया था! बावजी की शादी 19 साल की उम्र में हुई और उनकी दो बेटियां हुईं, एक की बचपन में ही मृत्यु हो गई, जबकि दूसरे सयार कुंवर की शादी गुजरात के विजयनगर के महाराज हमीर सिंहजी से हुई।https://www.bhaskar.com/news/RAJ-UDA-OMC-MAT-latest-udaipur-news-082503-1962858-NOR.html राजसी मन में जलाई वैराग्य की ज्योत, मेवाड़ में फैलाया ‘चतुर’ प्रकाश Dainik Bhaskar hi 2021-06-07
रचनाएं
बावजी चतुर सिंह जी ने मेवाड़ी भाषा में रचनाएं की।https://m.patrika.com/sikar-news/job-in-railway-education-other-department-latest-information-3946419/ Jobs: नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका, इन विभाग में निकली बंपर भर्ती, जल्दी करें आवेदन Chauhan Vinod Patrika News hi 2021-06-07 दैनिक सहायता और संगति के लिए, बावजी ने रूपा, कन्ना, देवला, उद्धा, शंकर और अपने समाज सुधारवादी विचारों के प्रसार के लिए उन्हें संबोधित कई कविताएँ लिखीं।
महाराज चतुर सिंहजी एक महान कवि (शब्द-स्मिथ!) होने के साथ-साथ एक प्रबुद्ध व्यक्तित्व थे। उनकी रचनाएँ आध्यात्मिक ज्ञान और लोक व्यवहार का संतुलित मिश्रण हैं। हमारे दिन-प्रतिदिन की घटनाओं के माध्यम से सरल भाषा में सुनाई गई, उन्होंने सबसे कठिन ज्ञान को ऐसे तरीके से समझाया है जो आसानी से समझ में आता है और मामला हमारे दिल और दिमाग को छूता है।https://www.bhaskar.com/news/RAJ-UDA-bavji-chatur-singh-jis-birthday-being-celebrated-in-full-fervour-4173605-NOR.html बावजी चतुरसिंह जी की जयंती कल Dainik Bhaskar hi 2021-06-07
नउवा में स्थित है चतुर साधना धाम
खानू मंगरी में बावजी की कोटरी (चतुर साधना स्थल) https://www.bhaskar.com/news/RAJ-UDA-bavji-chatur-singh-jis-birthday-being-celebrated-in-full-fervour-4173605-NOR.html बावजी चतुरसिंह जी की जयंती कल Dainik Bhaskar hi 2021-06-25को राजस्थान विधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष (०३.५.१९६७ से २०.३.१९७२) और क्षेत्र के विधायक स्वर्गीय श्री निरंजन नाथ आचार्य ने १३ जनवरी १९६६ को वित्तीय सहायता के बहाल किया था। महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन का समर्थन और करजली परिवार का भौतिक समर्थन। महाराणा भागवत सिंहजी ने राजस्थान के कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में बावजी की संगमरमर की मूर्ति का अनावरण किया। हर साल विक्रम सम्वत् पौष शुक्ल तृतीया (~ जनवरी)को बावजी हुज़ूर महाराज चतुर सिंहजी के ज्ञानोदय दिवस (आत्म साक्षात्कार) के उपलक्ष्य में नउवा में एक निष्पक्ष और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। यह पवित्र स्थल, जो अब एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल बन गया है, राजस्थान के राज्यपाल सरदार हुकम सिंह (1967-73) ने भी मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया (1954-1971) व खान मंत्री हरिदेव जोशी के साथ दौरा किया था। (हरिदेव जोशी बाद में राजस्थान के मुख्यमंत्री 1973-77; 1985-88; 1989-1990 रहे)। एक संक्षिप्त बीमारी के बाद 1 जुलाई 1929 (विक्रम सम्वत् 1986 आषाढ़ कृष्ण नवमी) को 49 वर्ष की उम्र में करजली हवेली में बावजी ने देह त्याग कर इस दैहिक यात्रा को विराम दिया, इससे एक महान आध्यात्मिक लेखक और समाज सुधारक की यात्रा यहाँ पुर्ण हुई ।https://www.bhaskar.com/news/RAJ-UDA-bavji-chatur-singh-jis-birthday-being-celebrated-in-full-fervour-4173605-NOR.html बावजी चतुरसिंह जी की जयंती कल Dainik Bhaskar hi 2021-06-25
सन्दर्भ
श्रेणी:कवि
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