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बनिया
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बनिया none|150px एक बनिया १८८० के आस पास भारत ; नेपाल नेपाली , मैथिली, हिंदी, मारवाड़ी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, बंगाली और कोंकणीGazetteer of the Union Territory Goa, Daman and Diu: district gazetter by Vithal Trimbak Gune, Goa, Daman and Diu (India). Gazetteer Dept, published by Gazetteer Dept., Govt. of the Union Territory of Goa, Daman and Diu, 1979
बनिया राजशाही एक भारत की एक जाति है।Heiko Schrader Changing financial landscapes in India and Indonesia: sociological aspects of monetization and market integration http://books.google.com/books?id=8rf7nIIz8ikC&pg=PA68 2012-02-09 1997 LIT Verlag Münster 978-3-8258-2641-3 68
उपजाति:-राजशाही,भाटी,बिश्नोई,अग्रवाल,जायसवाल,ओसवाल स्वर्णकार सोनी लाला, बरनवाल, ,चौरसिया,जैन,गांधी,शाह,गुप्ता,अंबानी, अडानी,सेठ,साहूकार,राय,जो बनिया जाती में आते है
बनिया महाराजा अग्रसेन और सहस्त्रबाहु अर्जुन के वंशज है अग्रसेन के वंशज अग्रवाल और सहस्त्रबाहु के वंशज कलवार यानी जायसवाल भाटी होते हैं और बरनवाल समाज अहिबरन के वंशज होते है, हैं महाराजा अजमीढ़ के वंशज स्वर्णकार यानी सुनार, साहूकार होते है , जो क्षत्रिय होकर भी वैश्य वर्ण में आते है और वैश्य समाज के एहम हिस्सा है।
गुप्त साम्राज्य का उदय तीसरी शताब्दी के अन्त में प्रयाग के निकट कौशाम्बी में हुआ था। जिनतम गुप्त राजा के बारे में पता चला है वो है श्रीगुप्त। हालांकि प्रभावती गुप्त के पूना ताम्रपत्र अभिलेख में इसे 'आदिराज' कहकर सम्बोधित किया गया है। श्रीगुप्त ने गया में चीनी यात्रियों के लिए एक मंदिर बनवाया था जिसका उल्लेख चीनी यात्री इत्सिंग ने ५०० वर्षों बाद सन् ६७१ से सन् ६९५ के बीच में किया। पुराणों में ये कहा गया है कि आरंभिक गुप्त राजाओं का साम्राज्य गंगा द्रोणी, प्रयाग, साकेत (अयोध्या) तथा मगध में फैला था। श्रीगुप्त के समय में महाराजा की उपाधि सामन्तों को प्रदान की जाती थी, अतः श्रीगुप्त किसी के अधीन शासक था। प्रसिद्ध इतिहासकार के. पी. जायसवाल के अनुसार श्रीगुप्त भारशिवों के अधीन छोटे से राज्य प्रयाग का शासक था। चीनी यात्री इत्सिंग के अनुसार मगध के मृग शिखावन में एक मन्दिर का निर्माण करवाया था। तथा मन्दिर के व्यय में २४ गाँव को दान दिये थे।
नामकरण
उत्तर वैदिककाल के उल्लेखों में पण, पण्य, पणि जैसे शब्द आए हैं। पण या पण्य का अर्थ हुआ वस्तु, सामग्री, सम्पत्ति। बाद में पण का प्रयोग मुद्रा के रूप में भी हुआ। पणि से तात्पर्य व्यापारी समाज के लिए भी था। पणि उस दौर के महान व्यापारिक बुद्धिवाले लोग थे। पणियों की रिश्तेदारी आज के बनिया शब्द से है। पणि (फिनीशियन) आर्यावर्त में व्यापार करते थे। उनके बड़े-बड़े पोत चलते थे। वे ब्याजभोजी थे। आज का 'बनिया' शब्द वणिक का अपभ्रंश ज़रूर है मगर इसके जन्मसूत्र पणि में ही छुपे हुए हैं। दास बनाने वाले ब्याजभोजियों के प्रति आर्यों की घृणा स्वाभाविक थी। आर्य कृषि करते थे और पणियों का प्रधान व्यवसाय व्यापार और लेन-देन था। पणिक या फणिक शब्द से ही वणिक भी जन्मा है। आर्यों ने पणियों का उल्लेख अलग अलग संदर्भों में किया है मगर हर बार उनके व्यापार पटु होने का संकेत ज़रूर मिलता है। हिन्दी में व्यापार के लिए वाणिज्य शब्द भी प्रचलित है। वाणिज्य की व्युत्पत्ति भी पण् से ही मानी जाती है। यह बना है वणिज् से जिसका अर्थ है सौदागर, व्यापारी अथवा तुलाराशि। गौरतलब है कि व्यापारी हर काम तौल कर ही करता है। वणिज शब्द की व्युत्पत्ति आप्टे कोश के मुताबिक पण+इजी से हुई है। इससे ही बना है “वाणिज्य” और “वणिक” जो कारोबारी, व्यापारी अथवा वैश्य समुदाय के लिए खूब इस्तेमाल होता है। पणिक की वणिक से साम्यता पर गौर करें। बोलचाल की हिन्दी में वणिक के लिए बनिया शब्द कहीं ज्यादा लोकप्रिय है जो वणिक का ही अपभ्रंश है इसका क्रम कुछ यूं रहा- वणिक, बणिक, बनिआ, बनिया।Monier-Williams Monier A Sanskrit-English dictionary etymologically and philologically arranged with special reference to cognate Indo-European languages 1986 Motilal Banarsidass Delhi 81-208-0065-6 915 New ed., greatly enl. and improved.
चित्र वीथिका
प्रसिद्ध बनिया लोग
इन्हें भी देखें
वैश्य
सन्दर्भ
श्रेणी:वैश्य
श्रेणी:जाति
श्रेणी:भारतीय उपनाम