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वाणेश्वर महादेव मंदिर
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Waneshwar Mahadev Templeबाणेश्वर महादेव मंदिर बनीपारा Waneshwar Mahadev Mandir.JPG India Uttar Pradesh Location within Uttar Pradesh 26.48 79.89 बाणेश्वर महादेव मंदिर <span style="font-size:100%;">बाणेश्वर महादेव मंदिर बाणेश्वर महादेव मंदिर Baneshwar મહાદેવ Baneshwar மகாதேவ் Waneshwar महादेव baneshwar মহাদেব Baneshwar మహదేవ్ India उत्तर प्रदेश कानपुर देहात बनीपारा महाराज ( जिनई) (शिव) और बागेश्वरी देवी महा शिवरात्रि और सावन माह में प्रत्येक सोमवार Hindu temple architecture
बाबा श्री वाणेश्वर सरकार महादेव मंदिर पौराणिक मंदिर हैhttp://www.jagran.com/uttar-pradesh/kanpur-dehat-12721709.html जो भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के कानपुर देहात जिले के बनीपारा महाराज में स्थित है। बाबा श्री बाणेश्वर के दरबार में जो भी भक्त आते हैं बाबा उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । मंदिर में पहुंचने के लिए रूरा रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 5 किलोमीटर है । यहां के लोगों की ऐसी मान्यता है कि जब मंदिर के कपाट खुलते है तो बाणेश्वर महादेव पर बेल पत्र और फूल से बाबा का श्रंगार हुआ पाया जाता है / उनका श्रंगार दैत्य असुर राज राजा बलि की पुत्री हर रात को यहां आती है और महादेव की पूजा अर्चना करती है /
व यहांशिवरात्रि से होली तक विशाल मेला भी लगता है जिसमे लाखो श्रद्धालु यहां पहुंचते है पर
स्थान
कानपुर देहात जिले के अंतर्गत रूरा नगर से उत्तर पश्चिम दिशा में 7 किलोमीटर दूरी पर रूरा -रसूलाबाद मार्ग पर वाणेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यह देवालय रोड के द्वारा कहिंझरी होकर कानपुर से जुड़ा हुआ है। कहिंझरी से इस मंदिर की दुरी 8 किलोमीटर है। यहां पहुचने के लिए रूरा रेलवे स्टेशन (उत्तर मध्य रेलवे ) से बस या टैक्सी के माध्यम से पहुँच सकते है। अम्बियापुर रेलवे स्टेशन से उत्तर दिशा में 4 किलोमीटर की दूरी पर यह मंदिर स्थित है। झींझक रेलवे स्टेशन से उत्तर कर रोड द्वारा मिंडा का कुंआ से होकर वाणेश्वर महादेव मंदिर पहुँच सकते है। रसूलाबाद कस्बे से इस मंदिर की दूरी 20 किलोमीटर है। बिल्हौर रेलवे स्टेशन से उत्तर कर रसूलाबाद होकर इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
पौराणिक इतिहास
पौराणिक वाणेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। इतिहास लेखक प्रो. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी के अनुसार सिठऊपुरवा (श्रोणितपुर) दैत्यराज वाणासुर की राजधानी थी। दैत्यराज बलि के पुत्र वाणासुर ने मंदिर में विशाल शिवलिंग की स्थापना की थी। श्रीकृष्ण वाणासुर युद्ध के बाद स्थल ध्वस्त हो गया था। परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने इसका जीर्णोद्धार कराकर वाणपुरा जन्मेजय नाम रखा था, जो अपभ्रंश रूप में बनीपारा जिनई हो गया। मंदिर के पास शिव तालाब, टीला, ऊषा बुर्ज, विष्णु व रेवंत की मूर्तिया पौराणिकता को प्रमाणित करती हैं। http://www.jagran.com/uttar-pradesh/kanpur-dehat-12083122.html संग्रहीत प्रति 22 मई 2015 https://web.archive.org/web/20160408175330/http://www.jagran.com/uttar-pradesh/kanpur-dehat-12083122.html 8 अप्रैल 2016 live
http://kanpurdehat.nic.in/f_profile.html संग्रहीत प्रति 23 अगस्त 2015 https://web.archive.org/web/20150507200535/http://www.kanpurdehat.nic.in/f_profile.html 7 मई 2015 live
प्रतिमा
1 मीटर ऊँचे आधार (अर्धा ) पर लगभग 50 सेंटीमीटर ऊँचा शिव लिंग स्थापित है जो अपने में अद्वितीय है।
मेला
महाशिवरात्रि के अवसर पर इस देवालय पर पंद्रह दिवसीय मेले का प्रति वर्ष आयोजन होता है। इस अवसर पर जालौन ,बाँदा ,हमीरपुर तथा कानपुर देहात के पैदल तीर्थ यात्री जो पहले कानपुर जाकर गंगा जल भर कर अपनी- अपनी काँवर के साथ जलाभिषेक के लिए लोधेश्वर महादेव जिला बाराबंकी जाते हैं और वापस आकर वाणेश्वर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। इन भक्तों की टोली का अनुशासन और उनके जलूस की छटा देखते ही बनती है। रास्ते में ये भक्त शिव संकीर्तन में मस्त रहते हैं। प्रत्येक टोली का एक मुखिया होता है जो अपनी टोली पर अनुषान कायम रखता है। अनुशासन भंग करने पर टोली का मुखिया दंडात्मक कार्यवाही करता है। मुखिया का चयन जनतांत्रिक विधि से होता है। कुछ भक्त टोली के साथ गंगा जल भरने के लिए खेरेश्वर घाट ( शिवराजपुर के निकट ) जाते हैं। ये भक्त मिटटी के घड़ों में गंगा जल भर कर वाणेश्वर महादेव का जलाभिषेक करते हैं
चित्र दीर्घा
सन्दर्भ
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