Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

महावीर नायक

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

महावीर नायक Mahavir Nayak (cropped).jpg महावीर नायक भारतीय 26 मार्च 1942 उरुगुत्तु, राँची, झारखंड, भारत राँची , झारखंड लोक गायक और गीतकार 1962–वर्तमान संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2022 पद्म श्री, 2025 महावीर नायक (जन्म 1942), रांची , झारखंड के एक भारतीय कलाकार हैं। वह एक लोक गायक और गीतकार हैं। उनको अपने नागपुरी भिंसरिया, फगुवा, पावस और मर्दानी झूमर राग के लिए जाना जाता है।।https://www.prabhatkhabar.com/vishesh-aalekh/1381799 पारंपरिक नागपुरी गीतों को सहेजने में जुटे ‘भिनसरिया के राजा’ महावीर नायक प्रभात खबर 14 फरवरी 2020 14 फरवरी 2025 उनको भारत सरकार ने पद्म श्री (2025) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2022) से सम्मानित किया है।Mahabir Nayak gets Padma Shri for preserving Jharkhand’s music; says hard work finally paid off https://theprint.in/india/mahabir-nayak-gets-padma-shri-for-preserving-jharkhands-music-says-hard-work-finally-paid-off/2463490/ The Print 26 जनवरी 2025 14 जनवरी 2025 जीवन उनका जन्म 26 मार्च 1942 को रामनवमी के दिन रांची जिले के कांके प्रखंड के उरुगुट्टू गांव में एक घासी परिवार में हुआ था. उनके पिता ख़ुद्दु नायक एक लोक गायक और मर्दानी झूमर नर्तक थे। उन्होंने गांव के मैदान आखरा में लोक संगीत सीखा।https://timesofindia.indiatimes.com/city/ranchi/mahabir-nayak-wins-sangeet-natak-akademi-amrit-award/articleshow/103725111.cms Mahabir Nayak Wins Sangeet Natak Akademi ‘Amrit’ Award Times of India 17 सितंबर 2023 14 फरवरी 2025https://www.prabhatkhabar.com/entertainment/jhollywood/1325460 नागपुरी राग-रागिनियों को संरक्षित कर रहे महावीर नायक प्रभात खबर 4 सितंबर 2019 14 फरवरी 2025 वे 1963 में हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन में शामिल हुए। उन्होंने गीत लिखा सुरु किया। उन्होंने पारंपरिक नागपुरी संगीत को संरक्षित करने का प्रयास किया। वह ठेठ नागपुरी गीतों के गायक हैं, जो 1962 से पारंपरिक नागपुरी लोक गीत गा रहे हैं। उन्हें बिशेश्वर प्रसाद केशरी ने नागपुरी संस्थान में आमंत्रित किया था, जहां उन्हें हनुमान सिंह, बरजू राम, घासी राम महली और दास महली जैसे नागपुरी कवियों की कविता के बारे में पता चला। फिर उन्होंने डॉ. बिश्वेश्वर प्रसाद केशरी के साथ नागपुरी संगीत रचना शुरू की। उन्होंने 1976 में मंच पर गाना शुरू किया। 1977 में उन्होंने मंच कार्यक्रम आयोजित करना शुरू किया और बुजुर्ग गायकों को गाने का मौका दिया। उन्होंने 1000 से ज्यादा स्टेज शो में गाना गाया है. उन्हें विंसरिया के राजा की उपाधि सिमडेगा जिले के लोगों द्वारा दी गई है। उन्होंने ऑडिशन दिया और 1984 में रेडियो और टेलीविजन शो में काम किया। न्होंने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन के लिए कई गीतों की रचना भी की। युवा पीढ़ी को पारंपरिक नागपुरी संगीत सिखाने के लिए लोक कलाकार मुकुंद नायक और अन्य कलाकारों के साथ उन्होंने 1985 में कुंजबन संगठन की स्थापना की। वे 1992 में एक शो के लिए ताइपे गए। 31 मार्च 2021 को वे एचईसी से सेवानिवृत्त हो गये. उन्होंने लगभग 300 गीत लिखे थे और पुराने कवियों द्वारा लिखे 5000 गीत संग्रहित किये। उन्होंने हटिया में नागपुरी कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया। 1993 में दर्पण पत्रिका प्रकाशित की, जिसमें कई पुराने कवियों के लिखे गीत हैं। उनके अनुसार ठेठ नागपुरी संगीत शास्त्रीय संगीत का ही एक रूप है जिनके गीत और नृत्य, झूमर, पावस, उदासी और फगुआ जैसे त्योहारों और मौसमों पर आधारित हैं। इसमें सामाजिक, नैतिकता, संस्कृति और साहित्य शामिल हैं। आधुनिक नागपुरी गाने प्रदूषण से प्रभावित हुए हैं। पुरस्कार और सम्मान संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2022) पद्म श्री , 2025 सन्दर्भ श्रेणी:1942 में जन्मे लोग