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सूरसारावली
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अक्टूबर 2022
सूरसारावली भक्त कवि सूरदास की एक रचना है। इसमें ११०७ छन्द हैं। यह सम्पूर्ण ग्रन्थ एक "वृहद् होली" गीत के रूप में रचित है। इसकी टेक है - खेलत यह विधि हरि होरी हो, हरि होरी हो वेद विदित यह बात। इसका रचना-काल संवत् १६०२ वि० निश्चित किया गया है, क्योंकि इसकी रचना सूर के ६७वें वर्ष में हुई थी।
सन्दर्भ
श्रेणी:पुस्तकें
श्रेणी:सूरदास
सूरदास द्वारा रचित का सार (Summary) इस प्रकार है:Sur sarawli
सूरसागर का सार: इसे सूरदास के महान ग्रंथ 'सूरसागर' का सारांश या अनुक्रमणिका माना जाता है।
ब्रह्मांड की उत्पत्ति: इसमें सृष्टि की रचना का सिद्धांत (Theory of Genesis) बताया गया है, जिसमें भगवान कृष्ण को जगत का कर्ता माना गया है।
होली का रूपक: पूरा ग्रंथ एक 'वृहद होली' (बड़ी होली) गीत के रूप में लिखा गया है। इसमें भगवान को एक 'महान खिलाड़ी' के रूप में दिखाया गया है जो खेल-खेल में सृष्टि की रचना करते हैं।
छंदों की संख्या: इसमें कुल 1,107 छंद हैं।
मुख्य विषय: इसमें कृष्ण की बाल-लीलाओं, राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति का वर्णन है। साथ ही इसमें भगवान के 24 अवतारों और ध्रुव-प्रह्लाद जैसी कथाओं का भी संक्षेप में उल्लेख है।
रचना काल: माना जाता है कि सूरदास जी ने इसकी रचना 67 वर्ष की आयु में की थी।