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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

रामा किरवा

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नाईक रामाजी राव किरवा मराठा साम्राज्य मे रतनगढ़ किले के सुबेदार थे। उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किरवा ने सुबेदार रामजी भांगरे से प्रेरणा लेकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। उनका जन्म महाराष्ट्र के एक कोली परिवार में हुआ था।https://books.google.co.in/books?id=XZNuAAAAMAAJ South India in 1857 War of Independence Divekar V. D. 1993 Lokmanya Tilak Smarak Trust en 21 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20181004185935/https://books.google.co.in/books?id=XZNuAAAAMAAJ 4 अक्तूबर 2018 live सुबेदार सरदार रामाजी राव किरवा वंडकरी अहमदनगर १८३२ भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन हिन्दू कोली रामजी भांगरे राघोजी भांगरे १८१८ मे जब ब्रिटिश सरकार ने मराठा साम्राज्य अंत किया तो उस समय ब्रिटिश सरकार को महाराष्ट्र मे जगह जगह विद्रोह का सामना करना पड़ा जिनमें से एक विद्रोह किरवा के नेतृत्व मे पनप रहा था। किरवा ने कोली लोगों का एक क्रांतिकारी समूह बनाया और ब्रिटिश सरकार को चुनौती दी बाद मे भील के लोग भी उनके साथ मिल गए। आंदोलन महाराष्ट्र मे मराठा साम्राज्य खत्म होने के पश्चित अंग्रेजों ने अपने राज स्थापित किया जिसके चलते महाराष्ट्र में जगह जगह विद्रोह हुए जिनमें से रामजी भांगरे के विद्रोह से प्रभावित होकर किरवा ने भी अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठा लिए। किरवा भांगरे के साथ मिल गया और ब्रिटिश अधीन क्षेत्रों मे काफी व्यापक विद्रोह किया। किरवा ने सरकार के कधीन गांवो पर हमला करना सुरु कर दिया।https://books.google.co.in/books?id=J_faAAAAMAAJ Forest Ecology in India: Colonial Maharashtra, 1850-1950 Rao Neena Ambre 2008 Foundation Books 978-81-7596-549-2 en १८३० मे किरवा को कोली क्रांतिकारीयों के साथ-साथ भील जाती के लोगों ने भी जोइन किया। कुछ समय बाद एक मुठभेड़ के दौरान सरकार ने किरवा के कुछ साथीयों को पकड़ लिया लेकिन किरवा को नही पकड़ पाए।https://books.google.co.in/books?id=lYSd-3yL9h0C&dq=rama+kirwa&source=gbs_navlinks_s The Castes and Tribes of H.E.H. the Nizam's Dominions Hassan Syed Siraj ul 1989 Asian Educational Services 978-81-206-0488-9 en 21 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20190331154217/https://books.google.co.in/books?id=lYSd-3yL9h0C 31 मार्च 2019 livehttps://books.google.co.in/books?id=j7sMAAAAIAAJ&dq=rama+kirva&source=gbs_navlinks_s Gazetteer of the Bombay Presidency ... State) Bombay (India : 1884 Printed at the Government Central Press en जुलाई १८३० मे किरवा के साथ ओर कुछ लोग जुड़े और पश्चिमी घाट मे सरकारी की काफी नुकसान हुआ। किरवा ने सरकार अधीन क्षैत्रो को लुटा एवं अहमदनगर, ठाणे और पुणे मे सरकारी दफ्तर और कार्यायल पर कबजा कर लिया।https://books.google.co.in/books?id=ZuvsAAAAMAAJ Poverty and violence in Maharashtra: with special reference to Nanded and Thane Districts Kolhe R. B. Sciences Tiḷaka Mahārāṣṭra Vidyāpīṭha Nehru Institute of Social 2001 Nehru Institute of Social Sciences, Tilak Maharashtra Vidyapeeth en ब्रिटिश सरकार ने कैप्टन ल्युकिन के नेतृत्व मे १७वी रेजीमेंट , लैफ्टेनेंट ल्योड के नेतृत्व में ११वी रेजीमेंट और लैफ्टेनेंट फोर्ब्स के नेतृत्व में १३वी रेजीमेंट किरवा के विद्रोह को दफन करने के लिए भेजी लेकिन किरवा ने सरकार को चकमा दे दिया। सरकारी अधिकारी ने किरवा से समझौता करना चहा जिसके बदले किरवा मुंह मागी रकम और ज़मीन जायदाद पा सकता था लेकिन किरवा ने इंकार कर दिया।https://books.google.co.in/books?id=VcLpcbRiXpkC&dq=ramji+kirva&source=gbs_navlinks_s Gazetteer of the Bombay Presidency State) Bombay (India : 1882 Government Central Press en सरकार ने विद्रोहीयो के बारे मे जानकारी जुटानी सुरू कर दी। सुरू आंत मे तो किसी से कोई भी जानकारी नही मिली लेकिन बाद मे महाराष्ट्र मे कोंकण के चीतपावन ब्राह्मणों ने अंग्रेजों का पूरा साथ दिया। १८३३ मे ब्रिटिश सरकार ने पूरी ताकत के साथ किरवा और अन्य क्रांतिकारीयों पर एक सफल हमला किया। इस दौरान क्रांतिकारीयों और अंग्रेजों के बीच काफी समय तक लड़ाई वाजी जीसमे किरवा और उकसे साथीयों को बंदी बना लिया गया। ज्यादातर बाघीयों को पूणे और ठाने ले जाया गया लेकिन रामा किरवा और अन्य मुख्य साथीयों को अहमदनगर ले गए जहां उन्हें दोषी करार देते हुए फांसी की सज़ा सुनाई गई।https://books.google.co.in/books?id=hARuAAAAMAAJ Aspects of Indian History: Professor Ram Mohan Sinha commemoration volume Mishra Jai Prakash 1991 Agam Kala Prakashan en संदर्भ