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411 समाचार
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श्यामजी कृष्ण वर्मा

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पण्डित श्यामजी कृष्ण वर्मा Shyamji krishna varma.jpg श्यामजी कृष्ण वर्मा શ્યામજી કૃષ્ણવર્મા yes 1857 10 04 मांडवी, कच्छ जिला, गुजरात yes 1930 03 30 जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड क्रांति तीर्थ, मांडवी, कच्छ, गुजरात विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड भाषाशास्त्री, पत्रकार The Indian Home Rule Society, India House, The Indian Sociologist भारतीय स्वातंत्र्य सेनानी भानुमती 1875 करशन भानुशाली, गोमती बाई http://www.krantiteerth.org/index1.html भारतीय श्यामजी कृष्ण वर्मा (जन्म: 4 अक्टूबर 1857 - मृत्यु: 31 मार्च 1930) क्रान्तिकारी गतिविधियों के माध्यम से भारत की आजादी के संकल्प को गतिशील करने वाले अध्यवसायी एवं कई क्रान्तिकारियों के प्रेरणास्रोत थे।वह बेमिसाल योद्धा जिस पर कांग्रेस और वामपंथियों ने साधी थी चुप्पी! नरेंद्र मोदी स्विट्जरलैंड से ससम्मान लाए थे अस्थियां वे पहले भारतीय थे, जिन्हें ऑक्सफोर्ड से एम॰ए॰ और बार-ऐट-ला की उपाधियाँ मिलीं थीं। पुणे में दिये गये उनके संस्कृत के भाषण से प्रभावित होकर मोनियर विलियम्स ने वर्माजी को ऑक्सफोर्ड में संस्कृत का सहायक प्रोफेसर बना दिया था। श्यामजी कृष्ण वर्मा भी अन्य सभी क्रान्तिकारियों की तरह आर्य समाज के संस्थापक महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती और आर्य समाज से अत्यधिक प्रभावित थे। काले पानी की सजा पाने वाले क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर भी वर्माजी से प्रेरित होकर क्रांतिकारी कार्यो में सम्मिलित हुए। लन्दन में इण्डिया हाउस की स्थापना की जो इंग्लैण्ड जाकर पढ़ने वाले छात्रों के परस्पर मिलन एवं विविध विचार-विमर्श का एक प्रमुख केन्द्र था। जीवन वृत्त thumb|left|150px|इण्डिया हाउस हाईगेट लन्दन श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म 4 अक्टूबर http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=30705 प्रधानमंत्री ने श्‍यामजी कृष्‍ण वर्मा की जयंती के अवसर पर उन्‍हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार 4 अक्टूबर 2014 7 अक्टूबर 2014 https://web.archive.org/web/20141011164248/http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=30705 11 अक्तूबर 2014 live 1857 को गुजरात प्रान्त के माण्डवी कस्बे में श्रीकृष्ण वर्मा के यहाँ हुआ था।क्रान्त स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 ११ फरबरी २०१४ 1 1 2006 प्रवीण प्रकाशन नई दिल्ली hi 81-7783-119-4 २५० गुजरात सरकार ने प्रयत्न करके जिनेवा से उनकी अस्थियाँ भारत मँगवायीं और उनकी अन्तिम इच्छा का समादर किया। https://web.archive.org/web/20131014175453/http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 14 अक्तूबर 2013 live यह कस्बा अब मांडवी लोकसभा क्षेत्र में विकसित हो चुका है। उन्होंने 1888 में अजमेर में वकालत के दौरान स्वराज के लिये काम करना शुरू कर दिया था। मध्यप्रदेश के रतलाम और गुजरात के जूनागढ़ में दीवान रहकर उन्होंने जनहित के काम किये। मात्र बीस वर्ष की आयु से ही वे क्रान्तिकारी गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे थे। वे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और स्वामी दयानंद सरस्वती से प्रेरित थे। 1918 के बर्लिन और इंग्लैण्ड में हुए विद्या सम्मेलनों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 1897 में वे पुनः इंग्लैण्ड गये। 1905 में लॉर्ड कर्जन की ज्यादतियों के विरुद्ध संघर्षरत रहे। इसी वर्ष इंग्लैण्ड से मासिक समाचार-पत्र "द इण्डियन सोशियोलोजिस्ट" निकाला, जिसे आगे चलकर जिनेवा से भी प्रकाशित किया गया। इंग्लैण्ड में रहकर उन्होंने इंडिया हाउस की स्थापना की। भारत लौटने के बाद 1905 में उन्होंने क्रान्तिकारी छात्रों को लेकर इण्डियन होम रूल सोसायटी की स्थापना की। उस समय यह संस्था क्रान्तिकारी छात्रों के जमावड़े के लिये प्रेरणास्रोत सिद्ध हुई। क्रान्तिकारी शहीद मदनलाल ढींगरा उनके प्रिय शिष्यों में थे। उनकी शहादत पर उन्होंने छात्रवृत्ति भी शुरू की थी। विनायक दामोदर सावरकर ने वर्माजी का मार्गदर्शन पाकर लन्दन में रहकर लेखन कार्य किया था। 31 मार्च 1930 को जिनेवा के एक अस्पताल में वे अपना नश्वर शरीर त्यागकर चले गये। उनका शव अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों के कारण भारत नहीं लाया जा सका और वहीं उनकी अन्त्येष्टि कर दी गयी। बाद में गुजरात सरकार ने काफी प्रयत्न करके जिनेवा से उनकी अस्थियाँ भारत मँगवायीं। अस्थियों का भारत में संरक्षण right|thumb|300px|मॉडर्न रिव्यू के अप्रैल १९३८ से लिया गया चित्र अंगूठाकार|भारतीय डाक टिकट पर श्यामजी कृष्णवर्मा वर्माजी का दाह संस्कार करके उनकी अस्थियों को जिनेवा की सेण्ट जॉर्ज सीमेट्री में सुरक्षित रख दिया गया। बाद में उनकी पत्नी भानुमती कृष्ण वर्मा का जब निधन हो गया तो उनकी अस्थियाँ भी उसी सीमेट्री में रख दी गयीं। 22 अगस्त 2003 को भारत की स्वतन्त्रता के 55 वर्ष बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने स्विस सरकार से अनुरोध करके जिनेवा से श्यामजी कृष्ण वर्मा और उनकी पत्नी भानुमती की अस्थियों को भारत मँगाया। बम्बई से लेकर माण्डवी तक पूरे राजकीय सम्मान के साथ भव्य जुलूस की शक्ल में उनके अस्थि-कलशों को गुजरात लाया गया। वर्मा के जन्म स्थान में दर्शनीय क्रान्ति-तीर्थ बनाकर उसके परिसर स्थित श्यामजीकृष्ण वर्मा स्मृतिकक्ष में उनकी अस्थियों को संरक्षण प्रदान किया।http://www.telegraphindia.com/1030825/asp/nation/story_2296566.asp Road show with patriot ash Soondas Anand द टेलीग्राफ, कलकत्ता, भारत 24 अगस्त 2003 10 फरबरी 2014 https://web.archive.org/web/20140220001005/http://www.telegraphindia.com/1030825/asp/nation/story_2296566.asp 20 फ़रवरी 2014 live उनके जन्म स्थान पर गुजरात सरकार द्वारा विकसित श्रीश्यामजी कृष्ण वर्मा मेमोरियल को गुजरात के मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 13 दिसम्बर 2010 को राष्ट्र को समर्पित किया गया। कच्छ जाने वाले सभी देशी विदेशी पर्यटकों के लिये माण्डवी का क्रान्ति-तीर्थ एक उल्लेखनीय पर्यटन स्थल बन चुका है। क्रान्ति-तीर्थ के श्यामजीकृष्ण वर्मा स्मृतिकक्ष में पति-पत्नी के अस्थि-कलशों को देखने दूर-दूर से पर्यटक गुजरात आते हैं।श्यामजीकृष्ण वर्मा स्मृतिकक्ष https://web.archive.org/web/20140222064835/http://www.krantiteerth.org/shyamji-krishna-varma-smrutikaksha.html 22 फ़रवरी 2014 अभिगमन तिथि: 10 फरबरी 2014 सन्दर्भ इन्हें भी देखें इण्डिया हाउस बाहरी कड़ियाँ पंडित श्यामजी कृष्ण वर्मा https://web.archive.org/web/20220325050141/http://www.vpvaidik.com/%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE 25 मार्च 2022 (वेदप्रताप वैदिक) श्यामजी कृष्ण वर्मा (वेबदुनिया) क्रान्ति-तीर्थ - वेबसाइट क्रान्ति-तीर्थ माण्डवी कच्छ - अधिकृत वेबसाइट क्रान्ति-तीर्थ: श्यामजी कृष्ण वर्मा मेमोरियल, माण्डवी (गुजरात) - विस्तृत वेबसाइट देखें He built India House in London - ई-पेपर टाइम्स ऑफ इण्डिया डॉट कॉम (अभिगमन तिथि: १२ फरबरी २०१४) 110 साल पहले लंदन में श्यामजी कृष्ण वर्मा ने होम रूल सोसायटी बनाई थी (भास्कर) श्रेणी:भारतीय क्रांतिकारी श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम