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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अमीचंद

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अमीचन्द (मृत्यु 1767 ई.), संभवतः वास्तविक नाम अमीरचंद का बंगाली उच्चारण। उन षयन्त्रों के रचने में उसकी प्रमुख भूमिका थी जिनके परिणामस्वरूप प्लासी के युद्ध हुआ था। बंगाल में ब्रिटिश प्रभुसत्ता का विस्तार (पृष्ठ १७५५) नितान्त स्वार्थ लाभ से प्रेरित होकर इसने अँग्रेजों की यथेष्ट सहायता की और अँगरेजों के व्यावसायिक संपर्क में आकर बहुत सारा धन अर्जित कर लिया। किंतु, इतिहास में उसका नाम अपरिचित ही रहता यदि प्लासी युद्ध के पूर्व क्लाइव के अनैतिक आचरण से इंग्लैंड की पार्लियामेंट में तथा अँग्रेज इतिहासकारों द्वारा क्लाइव के कार्य की कटु आलोचना न हुई होती। सामयिक अंग्रेजों ने तथा उन्हीं के आधार पर इतिहासकार मेकाले ने उसे बंगाली बताया है; किन्तु वस्तुतः वह अमृतसर का रहनेवाला सिक्ख व्यवसायी था और दीर्घ काल से कलकते में बस गया था। अँग्रेजों के प्रभुत्व का प्रसार सर्वप्रथम दक्षिण में हुआ, किन्तु अँग्रेजी साम्राज्य के संस्थापन की नींव बंगाल में ही पड़ी। बंगाल में, व्यवसायलाभ की भावना से प्रेरित होकर अँग्रेजों के सर्वप्रथम सम्पर्क में आनेवाले भारतीय व्यवसायी ही थे। अलीवर्दी खाँ के कठोर नियन्त्रण में तो अँग्रेज अपने प्रभुत्व का विस्तार करने में असमर्थ रहे; किंतु अल्पवयस्क, अपरिपक्वबुद्धि तथा उद्धतप्रकृति सिराजुद्दौला के राज्यारोहण से यह सम्भव हो सका। नितान्त स्वार्थ लाभ से प्रेरित होकर अमीचंद ने अँग्रेजों की यथेष्ट सहायता की; किंतु, इतिहास में उसका नाम अपरिचित ही रहता यदि प्लासी युद्ध के पूर्व क्लाइव के अनैतिक आचरण से इंग्लैंड की पार्लियामेंट में तथा अँग्रेज इतिहासकारों द्वारा क्लाइव के कार्य की कटु आलोचना न हुई होती। अमीचंद ने अँगरेजों के व्यावसायिक संपर्क में आकर यथेष्ट धन अर्जित कर लिया था। कूटनीतिज्ञता के दृष्टिकोण से वैध या अवैध उपायों से, अँग्रेजों के सामूहिक तथा व्यक्तिगत लाभ की अभिवृद्धि के लिए, सिराजुद्दौला के राज्यारोहण के बाद सिराजुद्दौला के प्रभुत्व का दमन कर अव्यवस्थित शासन को और भी अव्यवस्थित बनाना तत्कालीन अँग्रेजों की दृष्टि से वांछनीय था। इस घटनाक्रम में सिराजुद्दौला ने अंग्रेजों के मुख्य व्यावसायिक केंद्र कलकत्ता पर आक्रमण करने का निश्चय किया। इस आक्रमण के पूर्व अँग्रेजों ने केवल संदेह के आधार पर अमीचंद को बंदी बनाने के लिए सिपाही भेजे। सिपाहियों ने अमीचंद के अंतःपुर पर आक्रमण कर दिया। अममानित होने से बचने के लिए अंत:पुर की तेरह स्त्रियों की हत्या कर दी गई। ऐसे मर्मातक अपमान के होने पर भी अमीचंद ने अंग्रेजों का साथ दिया। कलकत्ता पतन के बाद उसने अनेक अँग्रेज शरणार्थियों को आश्रय दिया तथा अन्य प्रकारों से भी सहायता प्रदान की। क्लाइव ने अमीचंद को वाट्स का दूत बनाकर नवाब की राजधानी मुर्शिदाबाद भेजा। इस स्थिति में उसने अँग्रेजों को अमूल्य सहायता प्रदान की। संभवतः, चंद्रनगर पर अँग्रेजों के आक्रमण के लिए नवाब से अनुमति दिलवाने में अमीचन्द का ही हाथ था। उसी ने नवाब के प्रमुख अधिकारी महाराज नंदकुमार को सिराजुद्दौला से विमुख कर अँग्रेजों का तरफदार बनाया। नवाब के विरुद्ध जगतसेठ ने मीरजाफ़र के साथ अंग्रेजों ने जिस गुप्त षड्यंत्र का आयोजन किया था उसमें भी अमीचंद का बहुत बड़ा हाथ था। बाद में, जब क्लाइव के साथ मीरजाफर की संधिवार्ता चल रही थी, अमीचंद ने अँग्रेजों को धमकी दी कि यदि सिराजुद्दौला की पदच्युति के बाद प्राप्त खजाने का पाँच प्रतिशत उसे न दिया जाएगा तो वह सब भेद नवाब पर प्रकट कर देगा। अमीचंद को विफलप्रयत्न करने के लिए दो संधिपत्र तैयार किए गए। एक नकली, जिसमें अमीचंद को पाँच प्रतिशत भाग देना स्वीकार किया गया था; दूसरा असली, जिसमें यह अंश छोड़ दिया गया था। ऐडमिरल वाट्सन ने नकली संधिपत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। तब क्लाइव ने उसपर वाट्सन के हस्ताक्षर नकल कर, वह नकली संधिपत्र अमीचंद को दिखा, उसे आश्वस्त कर दिया। सामयिक इतिहासकार ओर्मी का कथन है कि सिराजुद्दौला की पदच्युति के बाद जब वास्तविक स्थिति अमीचंद को बताई गई तो इस आघात से उसका मस्तिष्क विकृत हो गया तथा कुछ समय उपरान्त उसकी मृत्यु हो गई। किन्तु, इतिहासकार बेवरिज के मतानुसार वह दस वर्ष और जीवित रहा। अँग्रेजों से उसके संपर्क बने रहे जिसका प्रमाण यह है कि उसने फाउंड्लिंग अस्पताल को दो हजार पाउण्ड दान दिए जिसकी भित्ति पर 'कलकत्ते के काले व्यवसायी' की सहायता स्वीकृत है। उसने लन्दन के मेग्डालेन अस्पताल को भी दान दिया था। सन्दर्भ इन्हें भी देखें भारत में ब्रिटिश काल में भ्रष्टाचार श्रेणी:भारत का इतिहास श्रेणी:भ्रष्टाचार