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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

मिर्ज़ा मुहम्मद रफ़ी सौदा

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thumb|170px|मिर्ज़ा मुहम्मद रफ़ी सौदा thumb|230px|सन् १८७२ में छपा सौदा की कुल्लियात का अंग्रेज़ी अनुवाद मिर्ज़ा मुहम्मद रफ़ी 'सौदा' (उर्दू: ur مرزا محمد رفیع سودا, १७१३–१७८१) देहली के एक प्रसिद्ध शायर थे। वे अपनी ग़ज़लों और क़सीदों के लिए जाने जाते हैं।http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/sauda/txt_pegors_jsal1990.pdf A Shahr-ashob of Sauda, translated by Mark Pegors 19 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20121023074419/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/sauda/txt_pegors_jsal1990.pdf 23 अक्तूबर 2012 dead ये मीर के समकालीन थे इसलिए इनकी तुलना भी अक्सर मीर से होती है। मीर जहाँ ग़ज़लों के लिए आधुनिक उर्दू के उस्ताद माने गए हैं (ख़ासकर दिल्ली-लखनऊ के इलाक़े में), सौदा को ग़ज़लों में वो स्थान नहीं मिल पाया{cite book|first=अयोध्याप्रसाद|title=शेरओ सुख़न|last=गोयलीय|page=102} । हाँलांकि सौदा ने मसनवी, क़सीदे, मर्सिया तर्जीहबन्द, मुख़म्मस, रुबाई, क़ता और हिजो तक लिखा है। जीवनी सौदा का जन्म वर्ष पक्का नहीं है लेकिन कुछ तज़किरों में ११२५ हिजरी (यानि १७१३-१७१४ ईसवी) बताया गया है। वे दिल्ली में पैदा और बड़े हुए और मुहम्मद शाह के ज़माने में जिए।http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/sauda/00introcourt.html Introduction of Selections from the Kulliyat of Sauda, by Major Henry Court, 1872 19 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20121023074106/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/sauda/00introcourt.html 23 अक्तूबर 2012 dead धर्म के नज़रिए से उनका परिवार शिया था।http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00fwp/srf/srf_sauda_2010.pdf The Satires of Sauda (1706-1781) (Sept. 2010), by Shamsur Rahman Faruqi 19 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20120322042640/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00fwp/srf/srf_sauda_2010.pdf 22 मार्च 2012 dead उनके पहले उस्ताद सुलयमान क़ुली ख़ान 'विदाद' थे। शाह हातिम भी उनके उस्ताद रहे क्योंकि अपने छात्रों की सूची में उन्होंने सौदा का नाम शामिल किया था।http://dsal.uchicago.edu/digbooks/digpager.html?BOOKID=PK2167.A84&object=144 Azad, Muhammad Husain Ab-i hayat: yani mashahir shura-yi Urdu ke savanih umri aur zaban-i mazkur ki ahd ba ahd ki taraqqiyon aur islahon ka bayan. Lahor: Naval Kishor 1907 19 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20120929071626/http://dsal.uchicago.edu/digbooks/digpager.html?BOOKID=PK2167.A84&object=144 29 सितंबर 2012 dead मुग़ल बादशाह शाह आलम सौदा के शागिर्द बने और अपनी रचनाओं में ग़लतियाँ ठीक करवाने के लिए सौदा को दिया करते थे। सौदा मीर तकी 'मीर' के समकालीन थे। ६० या ६६ की आयु में वे दिल्ली छोड़ नवाब बंगश के साथ फ़र्रूख़ाबाद आ बसे और फिर अवध के नवाब के साथ फैज़ाबाद आ गए। जब लखनऊ अवध रियासत की राजधानी बन गया तो वे नवाब शुजाउद्दौला के साथ लखनऊ आ गए। ७० की आयु के आसपास उनका लखनऊ में ही देहांत हुआ।http://dsal.uchicago.edu/books/PK2155.H8413/141172d3.html#poet_saudaa Aab-e hayaat (1880) on Sauda 19 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20120919144214/http://dsal.uchicago.edu/books/PK2155.H8413/141172d3.html#poet_saudaa 19 सितंबर 2012 dead कृतियाँ सौदा को क़सीदों और तंज़ के सबसे अच्छे शायरों में गिना जाता है। शुरू में वे फ़ारसी में ही लिखा करते थे लेकिन अपने उस्ताद ख़ान-ए-आरज़ू का कहा मानकर उर्दू में भी लिखने लगे। १८७२ में उनकी कुल्लियात को बंगाल रिसाले के मेजर हेनरी कोर्ट (Major Henry Court) ने अंग्रेज़ी में अनुवाद किया। उनके कुछ चुने शेर इस प्रकार हैं: १. center किसी का दर्द-ए-दिल प्यारे तुम्हारा नाज़ क्या समझे जो गुज़रे सैद के दिल पर उसे शाहबाज़ क्या समझे सौदा २. center इश्क़ ज़रा भी अगर हो तो उसे कम मत जान होके शोला ही बुझे है ये शरार आख़िरकार सौदा ३. center ये रूतबा जाह-ए-दुनिया का नहीं कम किसी मालज़ादी से के इस पर रोज़-ओ-शब में सैकड़ों चढ़ते-उतरते हैं सौदा ४. center शैख़ ने उस बुत को जिस कूचे में देखा शाम को ले चराग़ अब ढूंढें है वाँ ता-सहर इस्लाम को सौदा ५.center सावन के बादलों की तरह से भरे हुए ये वो नयन हैं जिनसे की जंगल हरे हुए सौदा इन्हें भी देखें तंज़ क़सीदा शायरी शायर सन्दर्भ 2 श्रेणी:शायर श्रेणी:उर्दू शायर