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पाकशास्त्र
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thumb|गोइंदवाल साहिब में स्वेच्छा से सामुदायिक पाकशाला (लंगर) चलाने वाले सिख भारतीय पुरुषों द्वारा रन्धन।
, पाक क्रिया, पाक कला या रन्धन उपभोग के लिए भोजन प्रस्तुति हेतु ताप का प्रयोग करने की कला, विज्ञान और शास्त्र है। पाकशैली और सामग्री व्यापक रूप से भिन्न होती है, एक खुली अग्नि पर भोजन को ग्रिल करने से लेकर वैद्युतिक चूल्हा का उपयोग करने तक, विभिन्न प्रकार के तंदूरी पाककला, स्थानीय परिस्थितियों को दर्शाती है।
रन्धन के प्रकार भी रसोइयों के कौशल स्तर और प्रशिक्षण पर निर्भर करते हैं। पाक कार्य लोगों द्वारा अपने घरों, रेस्तोराँ और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में पेशेवर रसोइयों और रसोइयों द्वारा किया जाता है।
ताप या अग्नि से भोजन तैयार करना मानव के लिए एक अनोखी गतिविधि है। न्यूनतम 300,000 वर्ष पूर्व पाकाग्नि के पुरातात्विक साक्ष्य मौजूद हैं, लेकिन कुछ का अनुमान है कि मानव ने 20 लाख वर्ष पहले तक पकाना शुरू कर दिया था।
विभिन्न क्षेत्रों में सभ्यताओं के बीच कृषि, वाणिज्य, व्यापार और परिवहन के विस्तार ने कई नूतन सामग्रियों को पकाने की अनुमति दी। नए आविष्कार और प्रौद्योगिकियाँ, जैसे जल का धारण और क्वथन के लिए मृदा के कुम्भकारी का आविष्कार, रन्धन की तकनीकों का विस्तार। कुछ आधुनिक पाकशास्त्री परोसे जाने वाले व्यंजन के स्वाद को और बढ़ाने के लिए भोजन प्रस्तुति हेतु उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हैं।
पकाना
कच्चे भोज्य पदार्थों को अग्नि के संयोग से पकाकर खाने के योग्य बनाने की यह प्रक्रिया है। भोजन पकाने के कई तरीके हैं। भोजन चिकनाई, भाप अथवा पानी के माध्यम से पकाया जाता है। सीधे अग्नि के संयोग से भी पकाया जाता है। इन्हीं रीतियों के अनुरूप भोजन पकाने की कई विधियाँ हैं।
तलना
भोज्य पदार्थ को घी अथवा कोई भी तेल के माध्यम से सेंकने की प्रक्रिया को तलना कहते हैं। कड़ाही अथवा अन्य किसी छिछले बर्तन में घी अथवा तेल चूल्हे पर चढ़ा दिया जाता है। अच्छी तरह गरम हो जाने पर इसमें वस्तुएँ डाल दी जाती हैं। घी अथवा तेल इतना रहता है कि वस्तु उसमें भली प्रकार डूबी रहे। इस तरह पूरी, कचौड़ी, पकौड़ी इत्यादि बनाई जाती है। इस प्रक्रिया में भोजन के कुछ तत्वों की हानि भी हो जाती है।
thumb|तला हुआ पकवान
सेंकना
भोज्य पदार्थों को थोड़ी चिकनाई के साथ, अथवा बिना चिकनाई के, पकाने की प्रक्रिया को सेंकना कहते हैं। रोटी और टोस्ट बिना चिकनाई के सेंके जाते हैं। ये वस्तुएँ तवे अथवा टोस्टर की सहायता से तैयार की जाती हैं। पराठे, चीले, दोसा, ऑमलेट इत्यादि थोड़ी चिकनाई के साथ तवे पर सेके जाते हैं।
भूनना
भोज्य पदार्थों को अग्नि के सीधे संयोग से पकाने की क्रिया को भूनना कहते हैं। इस प्रकार मुख्यतया चना, लाई, मटर इत्यादि, जिसे चबैना कहते हैं, पकाए जाते हैं। हरे चने, हरे भुट्टे, आलू, शकरकंद इत्यादि भी इसी प्रकार तैयार किए जाते हैं। अंगारे, गरम राख अथवा गरम बालू भूनने के लिए काम में लाए जाते हैं।
उबालना
खौलते पानी में भोज्य पदार्थ को पकाने की क्रिया को उबालना कहते हैं। किसी बर्तन में पानी डालकर चूल्हे पर चढ़ा देते हैं। उसी में भोज्य पदार्थ डाल दिए जाते हैं। पानी खौलता है और वस्तु पकती है। इस प्रकार पके हुए भोज्य पदार्थों के पोषक तत्व बहुत कम मात्रा में नष्ट होते हैं। प्राय: सभी भोज्य पदार्थ इस प्रकार पकाए जा सकते हैं। कुछ पदार्थ केवल उबालकर खाए जाते हैं। पाश्चात्य पद्धति के तो अधिकांश भोज्य पदार्थ उबालकर खाए जाते हैं। सब प्रकार की साग सब्जियाँ उबालकर खाने से अधिक लाभदायक होती हैं। पानी इतना ही होना चाहिए जिससे उबलनेवाली वस्तु ढँक मात्र जाय। खौलते पानी में सब्जियाँ डालकर पकाना अधिक अच्छा है। इससे पोषक तत्व कम मात्रा में नष्ट होते हैं।
भाप से पकाना
इस प्रक्रिया से भोज्य पदार्थ भाप के द्वारा पकाए जाते हैं। पकाने के लिए कई प्रकार के उपकरण बने हैं। आधुनिकतम उपकरण प्रेशर कुकर कहलाते हैं। ये एक प्रकार के ढक्कनदार भगौने से होते हैं। पेंदों में कुछ पानी डालकर, डब्बों में भरकर, जो कुछ पकाना हो इसमें जमा देते हैं और ढक्कन बंद करके आग पर चढ़ा देते हैं। इससे पानी गरम होने पर जो भाप बनती है वह अंदर ही रहती है और भोज्य पदार्थ कुछ ही मिनट में पक जाते हैं। दाल, चावल, चना इत्यादि में कुछ पानी डालना पड़ता है, परंतु नरम वस्तुएँ बिना पानी के भी गल जाती हैं। एक सादा कुकर भी होता है। कई डिब्बे भोज्य पदार्थ सहित एक के ऊपर एक जमाकर कस दिए जाते हैं। फिर साथ में जो लंबी बाल्टी सी होती है, उसमें पानी डालकर ये डब्बे रख दिए जाते हैं। नीचे छोटी सी सिगड़ी होती है, जिसमें-कोयले सुलगाकर रख देते हैं। इस कुकर में भोजन दो या तीन घंटे में तैयार होता है। एक तीसरी प्रक्रिया और है। किसी चौड़े मुहँ के बंर्तन में पानी चढ़ा देते हैं। उसके मुँह पर कपड़ा बाँध देते हैं, या जाली की चलनी इत्यादि रख देते हैं। किसी भी प्रकार से भाप का प्रयोग पकाने में किया जाय, भोजन लाभप्रद ही होता है। इस प्रकार पकाए गए भोजन के पोषक तत्व बहुत बड़ी मात्रा में सुरक्षित रहते हैं।
बेकिंग
इस प्रक्रिया से भोज्य पदार्थ न तो चिकनाई के माध्यम से, न पानी के माध्यम से और न भाप के माध्यम से पकाए जाते हैं। एक तरह से यह कहना अधिक उपयुक्त होगा कि ये उष्ण वायु में पकते हैं। एक विशेष प्रकार के चूल्हे हाते हैं, जिन्हें ओवेन या तंदूर कहते हैं। इन्हें आग जलाकर खूब गरम कर लेते हैं। जो वस्तु पकानी होती है उसे इसमें बंद कर देते हैं। वस्तुएँ ऊपर नीचे दोनों तरफ से सिक जाती हैं। पाव रोटी, बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, नानखटाई मुख्यत: इसी प्रकार बनाई जाती हैं। ओवेन या तंदूर कई तरह के होते हैं, पुरानी पद्धति के तो लकड़ी के कोयले से गरम कर लिए जाते हैं। अब बिजली द्वारा गरम किए जानेवाले ओवेन भी बन गए हैं। ये बहुत सुविधाजनक हैं।
स्टूइंग
यह प्रक्रिया कुछ कुछ उबालने की प्रक्रिया से मिलती हैं। इसमें भी माध्यम जल रहता है। अंतर केवल ताप का होता है। कच्चे भोज्य पदार्थ पानी में डालकर चूल्हे पर चढ़ा दिए जाते हैं आँच बहुत कम रखी जाती है, जिससे पानी खौले नहीं। धीमे धीमे मंदी आँच पर पकता रहे। इस प्रकार पकाए भोज्य पदार्थों के पोष तत्व उबालने की अपेक्षा अधिक सुरक्षित रहते हैं। समस्त प्रकार के सूप इसी प्रकार बनते हैं। पकने के लिए प्रयुक्त पानी भी सूप में काम जाता है, अत: पोषक तत्व नष्ट नहीं होते। कई प्रकार की तरकारी मिलाकर इसी प्रकार पकाई जाती है। कदाचित् इसीलिए इस प्रक्रिया को "स्टूइंग" कहते हैं।
सुरक्षित करना
भोज्य पदार्थों को सुरक्षित करने के कई माध्यम हैं। प्रमुख चीनी, नमक, अम्ल, तेल और सोडा क्रियोज़ोट हैं।
चीनी
चीनी के माध्यम से जैम, जेली, अचार और मुरब्बे बनाए जाते हैं। फलों को काटकर चीनी के साथ पकाते हैं। जब पकाते पकाते चाशनी खूब गाढ़ी होकर एकरस हो जाती है, तब उतारकर उसे ठंडा कर लेते हैं और डिब्बाबंदी कर देते हैं। इसी प्रकार जेली बनती है। अंतर इतना है कि इसमें फलों को पकाकर निकाला रस काम में लाते हैं और नीबू का रस भी मिलाते हैं। मीठे अचार भी चीनी या गुड़ के माध्यम से बनाए जाते हैं।
नमक
प्राय: अचार ही नमक के द्वारा सुरक्षित किए जाते हैं। नीबू और आम के अचार केवल नमक डालकर भी बनाए जाते हैं और महीनों चलते हैं।
अम्ल
प्राय: दो प्रकार के अम्ल, नीबू और सिरका, भोज्य पदार्थों को सुरक्षित करने के लिए प्रयुक्त होते हैं। इन माध्यमों से मुख्य रूप से अचार ही बनाए जाते हैं। शिकंजबीन में नीबू का रस और चीनी दोनों प्रयुक्त होते हैं।
तेल
तेल के माध्यम से अचार बनाए जाते हैं। तेल में बनाए अचार वर्षो चल सकते हैं। आम, कटहल, लहसोड़ा, मिर्च इत्यादि सबके अचार तेल से बनते हैं।
इन्हें भी देखें
पाकदर्पण - पाककला से संबन्धित प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ
बाहरी कड़ियाँ
जीरो ऑयल साउथ इंडियन कुक बुक (गूगल पुस्तक)
कोंकण कुकबुक (गूगल पुस्तक ; लेखक - संजीव कुमार)
रसोई की शब्दावली (शुचि की रसोई)
शुचि की रसोई से (रसोई से सम्बन्धित हिंदी चिट्ठा)
Culinary history timeline
NEAC - Network of European Alimentary Culture
The cooking wiki
wikiHow on How to Cook
सेहत और स्वाद
श्रेणी:भोजन
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