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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ब्रह्मगुप्त सर्वसमिका

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ब्रह्मगुप्त सर्वसमिका एक बीजीय सर्वसमिका है जो भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलविद ब्रह्मगुप्त द्वारा रचित ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त में आयी है। इसे निम्नलिखित रूप में लिखा जा सकता है - उदाहरण के लिये (माना n = 1), यह सर्वसमिका सभी पूर्णांकों एवं सभी परिमेय संख्याओं के लिये सत्य है। ब्रह्मगुप्त ने इस सर्वसमिका को निम्नलिखित श्लोक में निबद्ध किया है- मूलं द्विधा इष्टवर्गाद् गुणकगुणाद् इष्ट युत विहिनान च । आद्यवधो गुणकगुणः सह अन्त्यघातेन कृतं अन्त्यम् ॥६४॥ वज्रवधैक्यं प्रथमं प्रक्षेपः क्षेपबधतुल्यः प्रक्षेपशोधकहृते मूले प्रक्षेपके रूपे॥ ६५॥ (अनुवाद : ‘From the square of an assumed number multiplied by the गुणक, add or subtract a desired quantity and obtain the root, and place them twice. The product of the first [pair of roots] multiplied by the गुणक increased by the product of the last [pair of roots] is the [new] greater root (अन्त्य-मूलम्)। The sum of the products of the cross multiplication (वज्रवधैकम्) is the first [new] root (प्रथम मूलम्). The [new] क्षेप is the product of similar additive or subtractive quantities. When the क्षेप is equal (तुल्य), the root [first or last] is to be divided by it to turn the [new] क्षेप into unity’)http://www.insa.nic.in/writereaddata/UpLoadedFiles/IJHS/Vol52_1_2017_Art01.pdf Indian Journal of History of Science,52.1 (2017) 1-16DOI:10.16943/ijhs/2017/v52i1/41294Some Features of the Solutions of कुट्टक and वर्गप्रकृति 4 मई 2018 https://web.archive.org/web/20180504225306/http://www.insa.nic.in/writereaddata/UpLoadedFiles/IJHS/Vol52_1_2017_Art01.pdf 4 मई 2018 dead निम्नलिखित सर्वसमिका ब्रह्मगुप्त की सर्वसमिका का एक विशेष रूप है जिसे ब्रह्मगुप्त - फिबोनकी सर्वसमिका कहते हैं। यह सर्वसमिका डायोफैन्टस की 'अरिथमैटिका' नामक ग्रन्थ में है जो तीसरी शताब्दी की रचना है। यह सर्वसमिका दो योगों का गुणनफल, जिन में प्रत्येक गुणक स्वयं दो वर्गों का योग हो, को दो वर्गों के योग के रूप में अभिव्यक्त करती है। ब्रह्मगुप्त सर्वसमिका के अन्य रूप ब्रह्मगुप्त सर्वसमिका का विस्तार कर के २, ४, ८, १६ आदि वर्गों के लिये सर्वसमिकाएँ निकाली जा सकतीं हैं। ब्रह्मगुप्त - फ़िबोनाच्ची सर्वसमिका:FibonacciIdentity Fibonacci Identity (x₁² + x₂²) · (y₁² + y₂²) = z₁² + z₂² आयलर चतुःवर्ग सर्वसमिका:EulerFour-SquareIdentity Euler Four-Square Identity (x₁² + x₂² + x₃² + x₄²) · (y₁² + y₂² + y₃² + y₄²) = z₁² + z₂² + z₃² + z₄² डेगेन अष्ट वर्ग सर्वसमिका:DegensEight-SquareIdentity Degen's Eight-Square Identity (x₁² + x₂² + x₃² +…+ x₈²) · (y₁² + y₂² + y₃² +…+ y₈²) = z₁² + z₂² + z₃² +…+ z₈² फिस्तर षोडष वर्ग सर्वसमिका:Tito Piezas III: Pfister's 16-Square Identity https://web.archive.org/web/20160917055317/https://sites.google.com/site/tpiezas/0021c 17 सितंबर 2016 (x₁² + x₂² + x₃² +…+ x₁₆²) · (y₁² + y₂² + y₃² +…+ y₁₆²) = (z₁² + z₂² + z₃² +…+ z₁₆²) फिस्तर ने १९६७ में सिद्ध किया कि सिद्धान्ततः २ के सभी पूर्णांक घातों (2ⁿ) के लिये सर्वसमिकाएँ प्राप्त की जा सकतीं हैं। उपयोग ब्रह्मगुप्त ने उपरोक्त सर्वसमिका का उपयोग वर्ग - प्रकृति (पेल का समिकरण) हल करने के लिए किया, जो कि निम्नलिखित है - x2 − Ny2 = 1. Using the identity in the form ब्रह्मगुप्त दो 'त्रिक' (triples) (x1, y1, k1) तथा (x2, y2, k2) निर्मित करते थे जो समीकरण x2 − Ny2 = k, के हल थे। इन दो त्रिकों से वे तीसरा त्रिक निर्मित करते थे - इस प्रकार वे समीकरण x2 − Ny2 = 1 का एक हल से आरम्भ करते हुए अनन्त हल निकाल लेते थे। इस आधार पर कहा जा सकता है कि ब्रह्मगुप्त की इस विधि में गणितीय आगमन के बीज छिपे हैं। भास्कर द्वितीय ने सन् ११५० में वर्गप्रकृति (पेल समीकरण) का सामान्य हल बताया था जिसे चक्रवाल विधि कहते हैं। चक्रवाल विधि भी ब्रह्मगुप्त सर्वसमिका पर ही आधारित है।2002 Mathematics and its history John Stillwell 2 Springer 978-0-387-95336-6 72–76 https://books.google.com/books?id=WNjRrqTm62QC&pg=PA72 4 मई 2018 https://web.archive.org/web/20140102125527/http://books.google.com/books?id=WNjRrqTm62QC&pg=PA72 2 जनवरी 2014 live सन्दर्भ इन्हें भी देखें ब्रह्मगुप्त ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त चक्रवाल विधि वर्गप्रकृति ब्रह्मगुप्त मैट्रिक्स भारतीय गणित भारतीय गणितज्ञों की सूची बाहरी कड़ियाँ Brahmagupta's identity at PlanetMath Brahmagupta Identity on MathWorld Brahmagupta-Fibonacci identity A Collection of Algebraic Identities श्रेणी:बीजगणित श्रेणी:भारतीय गणित श्रेणी:ब्रह्मगुप्त श्रेणी:प्राथमिक बीजगणित श्रेणी:गणितीय सर्वसमिकाएँ