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411 समाचार
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पमेहसी परगना

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मेहसी परगना (अंग्रेज़ी: Mehsi Pargana) उत्तर बिहार के ऐतिहासिक चंपारण क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक, राजस्व और न्यायिक इकाई थी। इस मेहसी परगना का राजधानी मेहसी ही था । ऐतिहासिक स्रोतों में मेहसी का संबंध परगना प्रशासन, काज़ी के न्यायिक आसन, भूमि-राजस्व व्यवस्था तथा क्षेत्रीय संचार नेटवर्क से मिलता है। मेहसी का ऐतिहासिक महत्व विशेष रूप से मुगलकालीन प्रशासन और बाद की चंपारण की राजस्व व्यवस्था में इसकी भूमिका से जुड़ा था। मध्यकालीन बिहार के प्रशासन पर आधारित अध्ययनों में मेहसी को सरकार चंपारण के एक महल के रूप में दर्ज किया गया है। == नाम और ऐतिहासिक पहचान == मेहसी परगना का नाम मेहसी नगर से संबंधित था। चंपारण जिला गजेटियर के अनुसार, मुहम्मदन शासन के दौरान मेहसी में काज़ी का आसन था और इसी स्थान के नाम से परगना को मेहसी परगना कहा गया। गजेटियर मेहसी के इस ऐतिहासिक न्यायिक और प्रशासनिक महत्व को विशेष रूप से दर्ज करता है। इस प्रकार मेहसी नगर और मेहसी परगना का संबंध केवल नाम का नहीं था, बल्कि प्रशासनिक और न्यायिक गतिविधियों से भी जुड़ा था। == मुगल प्रशासन == === सरकार चंपारण और मेहसी महल === मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक ढाँचे में सरकार एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती प्रशासनिक इकाई थी और उसके अंतर्गत विभिन्न महल तथा राजस्व क्षेत्र आते थे। अबुल फ़ज़ल के प्रशासनिक विवरण पर आधारित आधुनिक अध्ययन में मेहसी को सरकार चंपारण के महलों में शामिल किया गया है। उसी अध्ययन में मेहसी को एक विस्तृत नगर और “an administrative quarter of some note” के रूप में वर्णित किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि मेहसी का महत्व केवल राजस्व-संग्रह तक सीमित नहीं था, बल्कि यह मुगलकालीन प्रशासनिक भूगोल में उल्लेखनीय स्थान रखता था। === अकबर का काल === चंपारण जिला गजेटियर में मेहसी परगना के संबंध में अकबर के शासनकाल का उल्लेख मिलता है। गजेटियर के अनुसार, मेहसी परगना अकबर के शासनकाल में महरूम खान को प्रदान किया गया था। यह उल्लेख मेहसी को अकबर के काल में विकसित हो रही मुगल राजस्व एवं प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़ता है। हालांकि उपलब्ध स्रोत के आधार पर परगना की स्थापना का कोई निश्चित वर्ष निर्धारित करना उचित नहीं है। === 1648 की शाहजहाँ-कालीन सनद === मेहसी परगना के अस्तित्व का एक महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष अभिलेखीय प्रमाण 6 मई 1648 की शाहजहाँ-कालीन सनद है। इसमें बिहार के “pargana Mehsi (Bihar)” का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। सनद में गोपाल कस्बे और रौज़ा शम्सुद्दीन से संबंधित भूमि एवं अनुदान का विवरण दिया गया है। 1648 का यह प्रमाण विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसमें मेहसी को सीधे परगना के रूप में दर्ज किया गया है। इससे कम-से-कम 17वीं शताब्दी के मध्य तक मेहसी परगना के अस्तित्व की पुष्टि होती है। === भूमि और राजस्व अनुदान === मुगलकालीन प्रशासन में मेहसी परगना भूमि-अनुदान और राजस्व व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ था। एक बाद के शोध में मुगलकालीन अभिलेखों के आधार पर Madohabad village, pargana Mehsi, suba Bihar में भूमि-अनुदान का उल्लेख किया गया है। इस प्रकार उपलब्ध अभिलेखीय प्रमाण मेहसी को मुगलकालीन भूमि, राजस्व और अनुदान व्यवस्था में सक्रिय प्रशासनिक इकाई के रूप में प्रस्तुत करते हैं। == प्रशासनिक एवं न्यायिक केंद्र == मेहसी का महत्व केवल राजस्व इकाई के रूप में नहीं था। चंपारण जिला गजेटियर के अनुसार, मुहम्मदन शासन के दौरान यहाँ काज़ी का आसन था। बाद के औपनिवेशिक काल में भी मेहसी की न्यायिक भूमिका दिखाई देती है। गजेटियर मेहसी को पुराने चंपारण का “Sadar or chief civil station” बताता है। यहाँ कुछ समय के लिए मुंसिफ की अदालत भी स्थित थी। इस प्रकार मेहसी की ऐतिहासिक भूमिका में प्रशासन, न्याय और राजस्व—तीनों का समावेश दिखाई देता है। == परगना का प्रशासनिक केंद्र == ऐतिहासिक स्रोतों में मेहसी नगर और मेहसी परगना का सीधा संबंध मिलता है। गजेटियर के अनुसार, मेहसी में काज़ी का आसन था और परगना का नाम इसी स्थान से जुड़ा था। इस आधार पर मेहसी को मेहसी परगना का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र माना जाता है। बाद के ब्रिटिश कालीन विवरण में इसे चंपारण के प्रमुख नागरिक केंद्र के रूप में दर्ज किया गया है। == अठारहवीं शताब्दी == 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मेहसी परगना की पहचान बनी रही। राजेंद्र प्रसाद की पुस्तक Satyagraha in Champaran में 1771 के राजनीतिक पुनर्गठन के संदर्भ में मेहसी और बाबरा परगनों का उल्लेख मिलता है। इससे पता चलता है कि 18वीं शताब्दी में भी मेहसी एक मान्य प्रशासनिक-राजस्व क्षेत्र के रूप में विद्यमान था। === 1791 का पुनर्गठन === 1791 के Decennial Settlement के समय मेहसी और बाबरा परगनों के शिवहर राज से संबंध का उल्लेख मिलता है। 1793 के Permanent Settlement के समय इस व्यवस्था की पुष्टि की गई थी। बाद के प्रशासनिक पुनर्गठन में क्षेत्र की पुरानी परगना व्यवस्था में परिवर्तन हुआ। == ब्रिटिश काल == ब्रिटिश शासन के दौरान चंपारण की प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। पुराने परगना-आधारित ढाँचे को नई जिला, थाना और राजस्व इकाइयों के साथ समायोजित किया गया। इसके बावजूद मेहसी स्थानीय प्रशासनिक और नागरिक केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण रहा। जिला गजेटियर में इसे पुराने चंपारण के Sadar or chief civil station के रूप में दर्ज किया गया है और यहाँ न्यायिक गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। == राजस्व प्रशासन == औपनिवेशिक प्रशासनिक विवरणों में मेहसी को चंपारण की प्रमुख fiscal divisions में शामिल किया गया है। मेहसी, सिमरौन और मझौरा जैसे परगनों का संबंध राजस्व प्रशासन से था। परगना व्यवस्था में भूमि-राजस्व संग्रह, स्थानीय प्रशासन और न्यायिक अधिकारों का महत्वपूर्ण स्थान था। मेहसी का इतिहास इन सभी भूमिकाओं से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। == सड़क, संचार और क्षेत्रीय संपर्क == मेहसी की भौगोलिक स्थिति ने इसे चंपारण और तिरहुत के बीच संपर्क के लिए महत्वपूर्ण बनाया। ऐतिहासिक संचार नेटवर्क में मेहसी का संबंध मोतिहारी, बेतिया और मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख केंद्रों से था।<ref name="Yang">{{cite