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हरछठ
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दिसम्बर 2019
हरछठ पूजा ( हलषष्ठी) यह त्यौहार भादों कृष्ण पक्ष की छठ को मनाया जाता है। इसी दिन श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था।
व्रत की पात्रता
यह व्रत पुत्र अवाम पुत्रवती दोनों महिलाएं करती है इसके अलावा गर्भवती और संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालीं महिलाएं भी इस व्रत को करती है
छत्तीसगढ़ में महिलाएं बृहद रूप में इसकी पूजा करती है. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश मे भी महिलाएं इस पूजा को करती हैं ।
व्रत में खाद्य पदार्थ
इस व्रत में पेड़ों के फल बिना बोया अनाज jaise pashar chawal आदि खाने का विधान है।केवल पड़िया (भैंस का बच्चा ) वाली भैंस का दूध।
पूजन का विधान
यह पूजन सभी पुत्रवती महिलाएं (सौभाग्यवती और विधवा ) करती हैं। यह व्रत पुत्रों की दीर्घ आयु और उनकी सम्पन्नता के लिए किया जाता है। इस व्रत में महिलाएं प्रति पुत्र के हिसाब से छह छोटे मिटटी या चीनी के वर्तनों में पांच या सात भुने हुए अनाज या मेवा भरतीं हैं। जारी (छोटी कांटेदार झाड़ी) की एक शाखा ,पलाश की एक शाखा और नारी (एक प्रकार की लता ) की एक शाखा को भूमि या किसी मिटटी भरे गमले में गाड़ कर पूजन किया जाता है। महिलाएं पड़िया वाली भैंस के दूध से बने दही और महुवा (सूखे फूल) को पलाश के पत्ते पर खा कर व्रत का समापन करतीं हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ जगहों पर दीवार पर छट माता बना कर भी पूजा की जाती है ।
बाहरी कड़ियाँ
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श्रेणी : हिन्दू त्यौहार