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411 समाचार
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बक़ी इब्न मखलद

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बक़ी इब्न मखलद أبو عبد الرحمن بقي بن مخلد القرطبي ar بقي بن مخلد القرطبي.png बक़ी इब्न मखलद का अरबी सुलेख (कैलीग्राफी) में नाम 817 ई. (201 हिजरी) कोर्डोबा, अल-अंदलुस 889 ई. (276 हिजरी) कोर्डोबा, अल-अंदलुस इस्लामी विद्वान, मुहद्दिस, मुफ़स्सिर अल-अंदलुस में हदीस अध्ययन की शुरुआत, 'मुसनद' और 'तफ़्सीर' 9वीं शताब्दी इस्लाम अबू अब्द-अर-रहमान बक़ी इब्न मखलद अल-कुर्तुबी (أبو عبد الرحمن بقي بن مخلد القرطبي; 817 – 889 ई.), जिन्हें आमतौर पर बक़ी इब्न मखलद के नाम से जाना जाता है, 9वीं शताब्दी के दौरान अल-अंदलुस (वर्तमान स्पेन) के एक इस्लामी विद्वान थे। उन्होंने मुख्य रूप से हदीस (पैगंबर मुहम्मद के कथन) और तफ़्सीर (क़ुरआन की व्याख्या) के क्षेत्र में कार्य किया। ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के अनुसार, मुहम्मद बिन वदाह के साथ मिलकर, उन्हें अल-अंदलुस में हदीस के व्यवस्थित अध्ययन को स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है।Mu'ammar Nuri 1988 al-Imam Abu 'Abd al-Rahman Baqi ibn Makhlad Manshurat 'Ukaz CasablancaRaisuddin A. N. M. 1988 Baqī b. Makhlad al-Qurtubī (201–276/818–889) and his contribution to the study of ḥadīth literature in Muslim Spain Islamic Studies 27 2 161–168 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा यात्रा (रिहला) बक़ी इब्न मखलद का जन्म 817 ईस्वी (201 हिजरी) में अल-अंदलुस की राजधानी कोर्डोबा में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्वानों के अधीन हुई। उच्च शिक्षा और हदीस के संकलन के लिए उन्होंने मध्य पूर्व की एक लंबी यात्रा की, जिसे इस्लामी शैक्षणिक परंपरा में 'रिहला' (Rihla) कहा जाता है। अकबर दीया अल-उमरी और अल-ज़हबी (Al-Dhahabi) के ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उनकी यह यात्रा 14 वर्षों तक चली। इस दौरान उन्होंने मक्का, मदीना, मिस्र, दमिश्क और बगदाद की यात्रा की।Akram Diya al-Umari, Baqī ibn Makhlad al-Qurṭubī wa-muqaddimat musnaduh, Beirut, 1984. बगदाद में, उन्होंने प्रसिद्ध विद्वान अहमद इब्न हनबल (Ahmad ibn Hanbal) से शिक्षा प्राप्त की। दस्तावेज़ बताते हैं कि उस समय इब्न हनबल को राजनीतिक कारणों से सार्वजनिक रूप से पढ़ाने से रोक दिया गया था, इसलिए बक़ी इब्न मखलद ने एक भिक्षुक का वेष बनाकर उनसे व्यक्तिगत रूप से हदीस का ज्ञान प्राप्त किया था।Al-Dhahabi Siyar A‘lam al-Nubala’ 13 प्रमुख अकादमिक कार्य बक़ी इब्न मखलद ने अपने जीवन काल में दो प्रमुख ग्रंथ रचे, जिनका उल्लेख बाद के कई इतिहासकारों और विद्वानों ने किया है: मुसनद (Musnad): यह हदीसों का एक विशाल संग्रह था। पारंपरिक मुसनद (जहाँ हदीसों को सुनाने वाले साथियों या 'सहाबा' के नाम के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है) से अलग, बक़ी इब्न मखलद ने इसे साथियों के नाम के साथ-साथ न्यायशास्त्र (Fiqh) के अध्यायों के अनुसार भी वर्गीकृत किया था। इब्न हज़्म (Ibn Hazm) जैसे विद्वानों ने इसके आकार और संरचनात्मक संगठन का विस्तार से उल्लेख किया है।Ibn Hazm al-Ihkam fi Usul al-Ahkam 1 तफ़्सीर (Tafsir): उन्होंने क़ुरआन की एक विस्तृत व्याख्या भी लिखी थी। इब्न हज़्म और अल-सुयुती (Al-Suyuti) के अनुसार, इस तफ़्सीर को उस समय की सबसे व्यापक और प्रामाणिक व्याख्याओं में से एक माना जाता था। दुर्भाग्यवश, उनके ये दोनों मूल ग्रंथ वर्तमान में पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हैं और इतिहास में खो गए हैं।Nastiar M.A. Miski M. 2023 Ṭabaqāt al-Mufassirīn by al-Suyūṭī and the Affirmation of Non-Sunni Mufassir Authority: A Historiographical Analysis QOF: Jurnal Studi Al-Qur’an dan Tafsir 7 2 143–162 विरोध और संघर्ष जब बक़ी इब्न मखलद मध्य पूर्व से कोर्डोबा लौटे, तो उन्होंने हदीस पर आधारित न्यायशास्त्र का प्रचार करना शुरू किया। उस समय अल-अंदलुस में पूरी तरह से 'मालकी' (Maliki) विचारधारा का वर्चस्व था, और वहां के स्थानीय न्यायविदों (फ़ुक़हा) को यह नया हदीस-केंद्रित दृष्टिकोण स्वीकार्य नहीं था। इसाबेल फिएरो (Isabel Fierro) और मैनुएला मारिन (Manuela Marín) के शोध के अनुसार, स्थानीय विद्वानों ने बक़ी इब्न मखलद पर नास्तिकता (Heterodoxy) का आरोप लगाया और उनका कड़ा विरोध किया।Fierro Bello Isabel 1987 La Heterodoxia en Al-Andalus durante el periodo Omeya Instituto Hispano-Arabe de Cultura Madrid 80–88 उनके शिक्षण पर रोक लगाने की मांग की गई। हालाँकि, तत्कालीन उमय्यद अमीर 'मुहम्मद प्रथम' (Muhammad I of Córdoba) ने उनकी विद्वता का परीक्षण करने के बाद उन्हें राज्य का संरक्षण प्रदान किया और उन्हें पढ़ाने की अनुमति दी।Marín Manuela 1980 Baqī b. Majlad y la introducción del estudio del ḥadīt̲ en al-Andalus Al-Qanṭara 1 165–208 मृत्यु और विरासत बक़ी इब्न मखलद का निधन 889 ईस्वी (276 हिजरी) में कोर्डोबा में हुआ। उनके कार्यों ने अल-अंदलुस में इस्लामी न्यायशास्त्र के अध्ययन की दिशा को प्रभावित किया और भविष्य के विद्वानों के लिए हदीस विज्ञान के द्वार खोले। चार्ल्स पेल्लट (Charles Pellat) और इब्न कसीर (Ibn Kathir) जैसे इतिहासकारों ने उन्हें अल-अंदलुस के बौद्धिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना है।Pellat Charles Baḳī ibn Makhlad The Encyclopaedia of Islam, New Edition 1 956b-957aIbn Katheer al-Bidaya wa al-Nihaya 11 94 सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ विकिडाटा पर बक़ी इब्न मखलद (Q12198825) श्रेणी:9वीं सदी के इस्लामी विद्वान श्रेणी:अल-अंदलुस के लोग श्रेणी:मुहद्दिस श्रेणी:889 में निधन श्रेणी:2026 विकि लव्ज़ रमजान प्रतियोगिता के लेख