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छत्तीसगढ़
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छत्तीसगढ़ IN-CT.svg रायपुर रायपुर 2,55,45,198 189 1,35,192 33 हिन्दी, छत्तीसगढ़ीhttp://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf Report of the Commissioner for linguistic minorities: 50th report (July 2012 to June 2013) Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, Government of India PDF 12 जुलाई 2017 8 जुलाई 2016 https://web.archive.org/web/20160708012438/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf dead 1 नवम्बर 2000 छत्तीसगढ़ सरकार रमन डेका विष्णुदेव साय एकसदनीयविधान सभा (90 सीटें) राज्य सभा (5 सीटें)लोक सभा (11 सीटें) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय 49 CG IN-CT https://cgstate.gov.in/ Map Chhattisgarh state and districts.png
छत्तीसगढ़ भारत का एक राज्य है। इसका गठन १ नवम्बर २००० को हुआ था और यह भारत का २६वां राज्य है। पहले यह मध्य प्रदेश के अन्तर्गत था। संसाधन संपन्न राज्य, यह देश के लिए बिजली और इस्पात का एक स्रोत है, जिसका उत्पादन कुल स्टील का 15% है।http://cg.gov.in/power/power1.htm Chhattisgarh State – Power Hub https://web.archive.org/web/20101120182905/http://cg.gov.in/power/power1.htm 20 November 2010 yes 22 July 2011 छत्तीसगढ़ भारत में सबसे तेजी से विकसित राज्यों में से एक है।http://india.gov.in/knowindia/st_chhattisgarh.php Chhattisgarh -Steel https://web.archive.org/web/20110707025600/http://india.gov.in/knowindia/st_chhattisgarh.php 7 July 2011 yes 22 July 2011
इतिहास
रामायणकालीन छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ प्राचीनकाल के दक्षिण कोशल का एक हिस्सा है और दक्षिण कौशल से पहले दंडकारण्य गोंड लोगों का प्राचीन निवास स्थान भी था और इसका इतिहास पौराणिक काल तक पीछे की ओर चला जाता है। पौराणिक काल का 'कोशल' प्रदेश, कालान्तर में 'उत्तर कोशल' और 'दक्षिण कोशल' नाम से दो भागों में विभक्त हो गया था इसी का 'दक्षिण कोशल' वर्तमान छत्तीसगढ़ कहलाता है। इस क्षेत्र के महानदी (जिसका नाम उस काल में 'चित्रोत्पला' था) का मत्स्य पुराणमत्स्यपुराण क none, महाभारतमहाभारत ख none के भीष्म पर्व तथा ब्रह्म पुराणब्रह्मपुराण ग none के भारतवर्ष वर्णन प्रकरण में उल्लेख है। वाल्मीकि रामायण में भी छत्तीसगढ़ के बीहड़ वनों तथा महानदी का स्पष्ट विवरण है। स्थित सिहावा पर्वत के आश्रम में निवास करने वाले श्रृंगी ऋषि ने ही अयोध्या में राजा दशरथ के यहाँ पुत्र्येष्टि यज्ञ करवाया था जिससे कि तीनों भाइयों सहित भगवान श्री राम का पृथ्वी पर अवतार हुआ। राम के काल में यहाँ के वनों में ऋषि-मुनि-तपस्वी आश्रम बना कर निवास करते थे और अपने वनवास की अवधि में राम यहाँ आये थे।
इतिहास में इसके प्राचीनतम उल्लेख सन 639 ई० में प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्मवेनसांग के यात्रा विवरण में मिलते हैं। उनकी यात्रा विवरण में लिखा है कि दक्षिण-कौसल की राजधानी सिरपुर थी। बौद्ध धर्म की महायान शाखा के संस्थापक बोधिसत्व नागार्जुन का आश्रम सिरपुर (श्रीपुर) में ही था। इस समय छत्तीसगढ़ पर सातवाहन वंश की एक शाखा का शासन था। महाकवि कालिदास का जन्म भी छत्तीसगढ़ में हुआ माना जाता है। प्राचीन काल में दक्षिण-कौसल के नाम से प्रसिद्ध इस प्रदेश में मौर्यों, सातवाहनों, वकाटकों, गुप्तों, राजर्षितुल्य कुल, शरभपुरीय वंशों, सोमवंशियों, नल वंशियों, कलचुरियों का शासन था। छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय राजवंशो का शासन भी कई जगहों पर मौजूद था। क्षेत्रिय राजवंशों में प्रमुख थे: बस्तर के नल और नाग वंश, कांकेर के सोमवंशी और कवर्धा के फणि-नाग वंशी। बिलासपुर जिले के पास स्थित कवर्धा रियासत में चौरा नाम का एक मंदिर है जिसे लोग मंडवा-महल भी कहा जाता है। इस मंदिर में सन् 1349 ई. का एक शिलालेख है जिसमें नाग वंश के राजाओं की वंशावली दी गयी है। नाग वंश के राजा रामचन्द्र ने यह लेख खुदवाया था। इस वंश के प्रथम राजा अहिराज कहे जाते हैं। भोरमदेव के क्षेत्र पर इस नागवंश का राजत्व 14 वीं सदी तक कायम रहा। गोंडवाना उदय 1200 ईस्वी में हुआ।और तब कल्चुरी राजाओं ने गोंड राजाओं की प्रधानता स्वीकार कर ली। छत्तीसगढ़ में गोंड अनुसूचित जनजाति में आते हैं किंतु इनका क्षेत्रीय दृष्टिकोण से क्षत्रिय वर्ण है।शुक्ल शिवप्रसाद 2020-04-04 संशय की एक रात और मूल्यबोध https://doi.org/10.54903/haridra.v1i01.7802 HARIDRA 1 01 18–20 10.54903/haridra.v1i01.7802 2582-9092
1200 ईस्वी में कलचुरी राजाओं के पतन के बाद छत्तीसगढ़ गोंडवाना साम्राज्य का भग था। 1200 ईस्वी से लेकर 1600 ईस्वी तक यहां गोंड राजाओं का राज रहा। उसके बाद 1650- 1818छत्तीसगढ़ मराठा सामंती राज्य के अंतर्गत आता था। फिर मराठों ने ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि कर ली। इस तरह यह भाग ब्रिटिश राज्य के अंदर आ गया। sharma Pratibha kaushik anju Chawla Naman Vansh Vansh 2024 Unveiling Emotions Through Sentiment Analysis https://doi.org/10.2139/ssrn.4759907 SSRN Electronic Journal 10.2139/ssrn.4759907 1556-5068
आजादी से पहले यहां 14 रियासतें थी।
*बस्तर सबसे बड़ी रियासत थी और शक्ति सबसे छोटी रियासत थी।
1)बस्तर रियासत:
वंश:काकतीय वंश (दक्षिण भारत)
क्षेत्र:33,830 वर्ग किलोमीटर।
2)सरगुजा रियासत:
वंश: रक्सेल
क्षेत्र:15,682 वर्ग किलोमीटर।
3) जशपुर रियासत:
वंश:चौहान
क्षेत्र:5,045 वर्ग किलोमीटर।
4) कोरिया रियासत:
वंश:चौहान
क्षेत्र:4,224 वर्ग किलोमीटर।
5)रायगढ़ रियासत:
वंश:राजगोंड
क्षेत्र:3,849 वर्ग किलोमीटर
6) कांकेर रियासत:
वंश: चन्द्रा
क्षेत्र:3,706 वर्ग किलोमीटर।
7)खैरागढ़ रियायत:
वंश:नागवंशी
क्षेत्र:2,411 वर्ग किलोमीटर।
8)नंदगांव(राजनंदगांव) रियासत:
वंश:बैरागी ब्राह्मण
क्षेत्र:2,225 वर्ग किलोमीटर।
9) चांगभाकर रिसायत:
वंश:चौहान
क्षेत्र:2,223 वर्ग किलोमीटर।
10) कवर्धा रियासत:
वंश:राजगोंड
क्षेत्र:2,067 वर्ग किलोमीटर।
11)उदयपुर रियासत:
वंश:रक्सेल
क्षेत्र:2,741 वर्ग किलोमीटर।
12)सारंगढ़ रियासत:
वंश:राजगोंड
क्षेत्र:1,399 वर्ग किलोमीटर।
13) छुईखदान रियासत:
वंश:बैरागी ब्राह्मण
क्षेत्र:451 वर्ग किलोमीटर।
14) सक्ती रियायत:
वंश:राजगोंड
क्षेत्र:357 वर्ग किलोमीटर।
भूगोल
छत्तीसगढ़ के उत्तर में उत्तर प्रदेश और उत्तर-पश्चिम में मध्यप्रदेश का शहडोल संभाग, उत्तर-पूर्व में उड़ीसा और झारखंड, दक्षिण में तेलंगाना और पश्चिम में महाराष्ट्र राज्य स्थित हैं। यह प्रदेश ऊँची नीची पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ घने जंगलों वाला राज्य है। यहाँ साल, सागौन, साजा और बीजा और बाँस के वृक्षों की अधिकता है। यहाँ सबसे ज्यादा मिस्रित वन पाया जाता है। सागौन की कुछ उन्नत किस्म भी छत्तीसगढ़ के वनो में पायी जाती है। छत्तीसगढ़ क्षेत्र के बीच में महानदी और उसकी सहायक नदियाँ एक विशाल और उपजाऊ मैदान का निर्माण करती हैं, जो लगभग 80 कि॰मी॰ चौड़ा और 322 कि॰मी॰ लम्बा है। समुद्र सतह से यह मैदान करीब 300 मीटर ऊँचा है। इस मैदान के पश्चिम में महानदी तथा शिवनाथ का दोआब है। इस मैदानी क्षेत्र के भीतर हैं रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जिले के दक्षिणी भाग। धान की भरपूर पैदावार के कारण इसे धान का कटोरा भी कहा जाता है। मैदानी क्षेत्र के उत्तर में है मैकल पर्वत शृंखला। सरगुजा की उच्चतम भूमि ईशान कोण में है। पूर्व में उड़ीसा की छोटी-बड़ी पहाड़ियाँ हैं और आग्नेय में सिहावा के पर्वत शृंग है। दक्षिण में बस्तर भी गिरि-मालाओं से भरा हुआ है। छत्तीसगढ़ के तीन प्राकृतिक खण्ड हैं : उत्तर में सतपुड़ा, मध्य में महानदी और उसकी सहायक नदियों का मैदानी क्षेत्र और दक्षिण में बस्तर का पठार। राज्य की प्रमुख नदियाँ हैं - महानदी, शिवनाथ, खारुन, अरपा, पैरी तथा इंद्रावती नदी। http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/chgr0002.htm#bhog छत्तीसगढ़ 16 अप्रैल 2008 एचटीएम टीडीआईएल 25 फ़रवरी 2008 https://web.archive.org/web/20080225013155/http://tdil.mit.gov.in/coilnet/ignca/chgr0002.htm#bhog dead
छत्तीसगढ़ का विभाजन
एक नये राज्य छत्तीसगढ़ की शुरुआती मांग सन १९२० में उठी। इसी प्रकार की अनेक मांगें उठती रही लेकिन कभी एक संगठित रूप से कोइ मांग नहीं की गयी। संगठित रूप से पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की सर्वप्रथम १९२४ में रायपुर की कांग्रेस यूनीट द्वारा की गयी और बाद में त्रिपुरा में भारतीय कांग्रेस की वार्षिक सत्र में चर्चा की गयी। एक क्षेत्रीय कांग्रेस संगठन बनाने की भी मांग उठी।
अर्थव्यवस्था
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था मुख्यतः खनिज संसाधनों, ऊर्जा उत्पादन, इस्पात उद्योग और कृषि पर आधारित है। राज्य देश के कुल इस्पात उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है और इसे ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने विधानसभा में अपना वार्षिक बजट प्रस्तुत किया। यह बजट विष्णुदेव साय सरकार का तीसरा बजट था, जिसे वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा पेश किया गया। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बजट में बुनियादी ढांचे, कृषि, सामाजिक कल्याण और आदिवासी विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।Chhattisgarh Budget 2026 https://navbharattimes.indiatimes.com/state/chhattisgarh/raipur/chhattisgarh-budget-2026-live-updates-fm-om-prakash-choudhary-present-budget-today-key-announcements/liveblog/128738443.cms Navbharat Times 24 February 2026Chhattisgarh Budget 2026-27 Live Updates https://hindi.news18.com/news/chhattisgarh/raipur-chhattisgarh-budget-2026-27-live-updates-op-chaudhary-bjp-congress-details-local18-10214125.html News18 Hindi 24 February 2026 जून 2026 InternetArchiveBot
जिले
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छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय यहाँ सिर्फ 16 जिले थे पर बाद में 2 नए जिलो की घोषणा की गयी जो कि नारायणपुर व बीजापुर थे। पर इसके बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 15 अगस्त 2011 को 9 और नए जिलो की घोषणा की जो 1 जनवरी 2012 से अस्तित्व में आ गये, इस तरह अब छत्तीसगढ़ में कुल 27 जिले हैं।
कवर्धा जिला *कांकेर जिला (उत्तर बस्तर) कोरबा जिला कोरिया जिला जशपुर जिला जांजगीर-चम्पा जिला दन्तेवाड़ा जिला (दक्षिण बस्तर) दुर्ग जिला धमतरी जिला बिलासपुर जिला बस्तर जिला महासमुन्द जिला राजनांदगांव जिला रायगढ जिला रायपुर जिला सरगुजा जिला नारायणपुर जिला बीजापुर बेमेतरा बालोद जिला बलोदाबाज़ार बलरामपुर गरियाबंद सूरजपुर कोंडागांव जिला मुंगेली सुकमा
कला एवं संस्कृति
आदिवासी कला काफी पुरानी है। प्रदेश की आधिकारिक भाषा हिन्दी है और लगभग संपूर्ण जनसंख्या उसका प्रयोग करती है। प्रदेश की आदिवासी जनसंख्या हिन्दी की एक उपभाषा छत्तीसगढ़ी बोलती है।
thumb|महुआ
thumb|सल्फी से तैयार प्रसिद्द बस्तर बीयर
thumb|छत्तीसगढ़ में तेंदू पत्ता एकत्रण
साहित्य
छत्तीसगढ़ी साहित्य छत्तीसगढ़ के प्रमुख साहित्यकार
छत्तीसगढ़ साहित्यिक परम्परा के परिप्रेक्ष्य में अति समृद्ध प्रदेश है। इस जनपद का लेखन हिन्दी साहित्य के सुनहरे पृष्ठों को पुरातन समय से सजाता-संवारता रहा है।" छत्तीसगढ़ी भाषा अर्धभागधी की दुहिता एवं अवधी की सहोदरा है " (पृ 21, प्रकाशक रविशंकर विश्वविद्यालय, 1973)। " छत्तीसगढ़ी और अवधी दोनों का जन्म अर्धमागधी के गर्भ से आज से लगभग 1080 वर्ष पूर्व नवीं-दसवीं शताब्दी में हुआ था।"डॉ॰ भोलानाथ तिबारी, अपनी पुस्तक " हिन्दी भाषा" में लिखते है - " छत्तीसगढ़ी भाषा भाषियों की संख्या अवधी की अपेक्षा कहीं अधिक है और इस दृ से यह बोली के स्तर के ऊपर उठकर भाषा का स्वरुप प्राप्त करती है।"
भाषा साहित्य पर और साहित्य भाषा पर अवलंबित होते है। इसीलिये भाषा और साहित्य साथ-साथ पनपते है। परन्तु हम देखते है कि छत्तीसगढ़ी लिखित साहित्य के विकास अतीत में स्पष्ट रूप में नहीं हुई है। अनेक लेखकों का मत है कि इसका कारण यह है कि अतीत में यहाँ के लेखकों ने संस्कृत भाषा को लेखन का माध्यम बनाया और छत्तीसगढ़ी के प्रति ज़रा उदासीन रहे। इसीलिए छत्तीसगढ़ी भाषा में जो साहित्य रचा गया, वह करीब एक हज़ार साल से हुआ है।
अनेक साहित्यको ने इस एक हजार वर्ष को इस प्रकार विभाजित किया है :
छत्तीसगढ़ी गाथा युग - सन् 1000 से 1500 ई. तक
छत्तीसगढ़ी भक्ति युग - मध्य काल, सन् 1500 से 1900 ई. तक
छत्तीसगढ़ी आधुनिक युग - सन् 1900 से आज तक
यह विभाजन किसी प्रवृत्ति की सापेक्षिक अधिकता को देखकर किया गया है। एक और उल्लेखनीय बत यह है कि दूसरे आर्यभाषाओं के जैसे छत्तीसगढ़ी में भी मध्ययुग तक सिर्फ पद्यात्मक रचनाएँ हुई है।
लोकगीत और लोकनृत्य
छत्तीसगढ़ के लोकगीत और लोकनृत्य
छत्तीसगढ़ की संस्कृति में गीत एवं नृत्य का बहुत महत्व है। यहाँ के लोकगीतों में विविधता है। गीत आकार में अमूमन छोटे और गेय होते है एवं गीतों का प्राणतत्व है -- भाव प्रवणता। छत्तीसगढ़ के प्रमुख और लोकप्रिय गीतों में से कुछ हैं: भोजली, पंडवानी, जस गीत, भरथरी लोकगाथा, बाँस गीत, गऊरा गऊरी गीत, सुआ गीत, देवार गीत, करमा, ददरिया, डण्डा, फाग, चनौनी, राउत गीत और पंथी गीत। इनमें से सुआ, करमा, डण्डा व पंथी गीत नाच के साथ गाये जाते हैं।
खेल
छत्तीसगढ़ी बाल खेलों में अटकन-बटकन लोकप्रिय सामूहिक खेल है। इस खेल में बच्चे आंगन परछी में बैठकर, गोलाकार घेरा बनाते है। घेरा बनाने के बाद जमीन में हाथों के पंजे रख देते है। एक लड़का अगुवा के रूप में अपने दाहिने हाथ की तर्जनी उन उल्टे पंजों पर बारी-बारी से छुआता है। गीत की अंतिम अंगुली जिसकी हथेली पर समाप्त होती है वह अपनी हथेली सीधी कर लेता है। इस क्रम में जब सबकी हथेली सीधे हो जाते है, तो अंतिम बच्चा गीत को आगे बढ़ाता है। इस गीत के बाद एक दूसरे के कान पकड़कर गीत गाते है।
फुगड़ी
बालिकाओं द्वारा खेला जाने वाला फुगड़ी लोकप्रिय खेल है। चार, छः लड़कियां इकट्ठा होकर, ऊंखरु बैठकर बारी-बारी से लोच के साथ पैर को पंजों के द्वारा आगे-पीछे चलाती है। थककर या सांस भरने से जिस खिलाड़ी के पांव चलने रुक जाते हैं वह हट जाती है।
लंगड़ी
यह वृद्धि चातुर्थ और चालाकी का खेल है। यह छू छुओवल की भांति खेला जाता है। इसमें खिलाड़ी एड़ी मोड़कर बैठ जाते है और हथेली घुटनों पर रख लेते है। जो बच्चा हाथ रखने में पीछे होता है बीच में उठकर कहता है।
खुडुवा (कबड्डी)
खुड़वा पाली दर पाली कबड्डी की भांति खेला जाने वाला खेल है। दल बनाने के इसके नियम कबड्डी से भिन्न है। दो खिलाड़ी अगुवा बन जाते है। शेष खिलाड़ी जोड़ी में गुप्त नाम धर कर अगुवा खिलाड़ियों के पास जाते है - चटक जा कहने पर वे अपना गुप्त नाम बताते है। नाम चयन के आधार पर दल बन जाता है। इसमें निर्णायक की भूमिका नहीं होती, सामूहिक निर्णय लिया जाता है।
डांडी पौहा
डांडी पौहा गोल घेरे में खेला जाने वाला स्पर्द्धात्मक खेल है। गली में या मैदान में लकड़ी से गोल घेरा बना दिया जाता है। खिलाड़ी दल गोल घेरे के भीतर रहते है। एक खिलाड़ी गोले से बाहर रहता है। खिलाड़ियों के बीच लय बद्ध गीत होता है। गीत की समाप्ति पर बाहर की खिलाड़ी भीतर के खिलाड़ी किसी लकड़े के नाम लेकर पुकारता है। नाम बोलते ही शेष गोल घेरे से बाहर आ जाते है और संकेत के साथ बाहर और भीतर के खिलाड़ी एक दूसरे को अपनी ओर करने के लिए बल लगाते है, जो खींचने में सफल होता वह जीतता है। अंतिम क्रम तक यह स्पर्द्धा चलती है।
जातियां
छत्तीसगढ़ की जातियाँ
छत्तीसगढ़ मॆं कई जातियां और जनजातियां हैं। जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य की कुल जनसंख्या में से 30.62 प्रतिशत (78.22 लाख) जनसंख्या अनुसूचित जनजातियों की है। अघरीया, गोंड, भुंजिया, कंवर, बिंझवार ,उरांव, हल्बा, भतरा, सवरा आदि प्रमुख जनजातियॉ है। अबूझमाड़िया, कमार, बैगा, पहाड़ी कोरवा तथा बिरहोर राज्य के विशेष पिछड़ी जनजातियाँ हैं। इनके अतिरिक्त अन्य जनजाति समूह भी है, जिनकी जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है।
पर्यटन स्थल
नवागढ़
सेतगंगा
चित्रकोट जलप्रपात
तीरथगढ़ जलप्रपात
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान
कैलाश गुफा
गंगरेल बांध
सिरपुर
मल्हार
भोरमदेव मंदिर
मैनपाट
(जल विहार बुका) हसदेव नदी के चारो तरफ हरे भरे पहाड़ियों से घिरा जलमग्न सुंदर प्राकृतिक सौंदय से परिपूर्ण मिनीमाता बांगो बांध का भराओ वाला जगह है जो कोरबा जिला के मड़ई गांव से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।यहां नाविक रहते है जो जल विहार कराते है ।
(केंदई जल प्रपात)केंदई जलप्रपात कोरबा जिला मुख्यालय से 85 किलोमीटर की दूरी पर अम्बिकापुर रोड पर स्थित है इस पर सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है।जलप्रपात के नीचे जाने पर इंद्रधनुष की सुंदर चित्र बनती है जो मनमोहक है देखा जा सकता है। तथा चारो ओर हरे भरे पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
(गोल्डन आइलैंड)गोल्डन आइलैंड केंदई ग्राम से सात किलोमीटर मीटर साउथ में है जहां तक सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है।जो हसदेव नदी पर एक लैंड बना हुआ है जहां नाविक भी रहते है जो कभी भी जल विहार करा सकते है।जो बहुत ही आनंदमय जगह है।तथा पिकनिक स्पॉट भी है।
बमलेश्वरी मंदिर
बाहरी कड़ियाँ
आधिकारिक जालस्थल https://web.archive.org/web/20170710221623/http://cgstate.gov.in/ 10 जुलाई 2017
छत्तीसगढ़ ज्ञानमंथन (इतिहास) https://web.archive.org/web/20170518171839/http://cggyanmanthan.com/a-homepage-section/ 18 मई 2017
इन्हें भी देखें
छत्तीसगढ़ी भाषा
छत्तीसगढ़ के लोकसभा सदस्य
छत्तीसगढ़ के उत्सव
छत्तीसगढ़ के आदिवासी देवी देवता
छत्तीसगढ़ का खाना
छत्तीसगढ़ के मेले
टीका टिप्पणी
क. मत्स्यपुराण क none"मन्दाकिनीदशार्णा च चित्रकूटा तथैव च।
तमसा पिप्पलीश्येनी तथा चित्रोत्पलापि च।।"
मत्स्यपुराण - भारतवर्ष वर्णन प्रकरण - 50/25)
ख. महाभारत ख none"चित्रोत्पला" चित्ररथां मंजुलां वाहिनी तथा।
मन्दाकिनीं वैतरणीं कोषां चापि महानदीम्।।"
https://cgcollegeinfo.in/
- महाभारत - भीष्मपर्व - 9/34
ग. ब्रह्मपुराण ग none"चित्रोत्पला वेत्रवपी करमोदा पिशाचिका।
तथान्यातिलघुश्रोणी विपाया शेवला नदी।।"
ब्रह्मपुराण - भारतवर्ष वर्णन प्रकरण - 19/31)
सन्दर्भ
श्रेणी:छत्तीसगढ़
श्रेणी:भारत के राज्य