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हनन्याह और सफ़ीरा
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दाएँ|अंगूठाकार|हनन्याह की मृत्यु, राफ़ेल रचित चित्रकला, 1515
हनन्याह और उनकी पत्नी सफ़ीरा बाइबिल में प्रेरितों के काम के पाँचवे अध्याय में उल्लिखित यरुशलम के प्रारंभिक ईसाई कलीसिया के अनुयायी थे। वे पवित्र आत्मा से झूठ बोलने के बाद अचानक मर गए।
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कहानी
बाएँ|अंगूठाकार|ब्रेश्शा संदूक़ पर हनन्याह और सफ़ीरा, गत चौथी शताब्दीEarly Christian Art Volbach Wolfgang Fritz Hirmer Max 1961 Harry N. Abrams, Inc. New York 328
प्रेरितों 4:32 में लिखा है कि यीशु के पहले अनुयायियों की सारी संपत्ति साझे में थी, ताकि वे उनमें से ज़रूरतमंदों की मदद कर सकें। साइप्रस के एक लेवी, बरनबास के पास कुछ भूमि थी, जिसे उसने बेचकर पैसे प्रेरितों को दान दिया।प्रेरितों 4:32
हनन्याह और सफ़ीरा ने भी बरनबास जैसे अपनी भूमि बेची, लेकिन उसके दाम में से अपने लिए रखे। हनन्याह ने अपना दान पतरस को भेंट किया। पतरस ने कहा, "शैतान ने तेरे मन में यह बात क्यों डाली कि तू पवित्र आत्मा से झूठ बोले, और भूमि के दाम में से कुछ रख छोड़े?" पतरस ने बताया कि हनन्याह अपने पैसे को दे या रख सकता था, लेकिन उन्होंने उसमें से कुछ अपने लिए रख छोड़ा और यह कहा कि उन्होंने मनुष्यों से नहीं, बल्कि परमेश्वर से झूठ बोला है। अपने दुराचार के कारण हनन्याह गिर मरा और उसे गाड़ा गया था। जो लोग इस घटना के बारे में सुने, वह परमेश्वर से डरने लगे। हनन्याह की मृत्यु के लगभग तीन घंटे बाद उनकी पत्नी सफ़ीरा आई, जिसे पता नहीं था कि क्या हुआ। पतरस ने उनसे पूछा कि वह और उनके पति ने किस दाम पर अपनी भूमि बेची थी। सफ़ीरा भी हनन्याह जैसे झूठे दाम बताकर गिर मरी, और उन्हें अपने पति के पास गाड़ा गया था।प्रेरितों 5:1-11
संदर्भ
श्रेणी:जन्म वर्ष अज्ञात
श्रेणी:झूठ बोलना