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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

खसखस

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thumb|right|खस का पौधा thumb|खस की जड़ें खस या खसखस (Khus Khus) एक सुगंधित पौधा है। इसका वानस्पतिक नाम वेटिवीरिआ जिजेनिऑयडीज (Vetiveria) है जिसकी व्युत्पत्ति तमिल के शब्द वेटिवर से हुई प्रतीत होती है। यह सुगंधित, पतले एकवर्ध्यक्ष (Racemes) का लंबे पुष्पगुच्छवाला वर्षानुवर्षी पौधा है। इसकी अनुशूकी का जोड़ा सीकुररहित होता है, जिसमें से एक अवृंत और पूर्ण तथा दूसरा वृंतयुक्त और पृंपुष्पी होता है। अवृंत अनुशूकि में बारीक कंटक होते हैं। इसका प्रकंद (rhizoma) बहुत सुगंधित होता है। प्रकंद का उपयोग भारत में इत्र बनाने और ओषधि के रूप में प्राचीन काल से हो रहा है। पौधे एलएच की जड़ों का उपयोग विशेष प्रकार का पर्दा बनाने में होता है जिसे ‘खस की टट्टी’ कहते हैं। इसको ग्रीष्म ऋतु में कमरे तथा खिड़कियों पर लगाते हैं और पानी से तर रखते हैं जिससे कमरे में ठंडी तथा सुगंधित वायु आती है और कमरा ठंडा बना रहता है। प्रकंद के वाष्प आसवन से सुगंधित वाष्पशील तेल प्राप्त होता है जिसका उपयोग इत्र बनाने में होता है। फूलों की गंध को पकड़ रखने की इसमें क्षमता पर्याप्त होती है। यह सघन गुच्छेदार घास राजस्थान एवं भारत के अन्य राज्यों में स्वजात उगती पाई जाती है। राजस्थान में भरतपुर तथा अजमेर जिलों में यह खूब उगती है। इस पादप के मजबूत डंठल प्रकद से निकले हुए लगभग 2 मीटर तक ऊंचे, सघन गुच्छों में, मजबूत स्पंजी जड़ों वाले होते हैं। इसकी जड़ों से प्राप्त तेल इत्र उद्योग में प्रसाधन सामग्री बनाने व साबुन का सुगंध प्रदान करने में प्रयुक्त होता है। खस तेल का अध्याम, शूल व दुराग्राही उल्टियों में वातानुलोमक के रूप में प्रयोग होता है। यह उद्दीपक, स्वेदनकारी व शीतलक माना जाता है। इसके अतिरिक्त आमवात, कटिवेदना व मोच में भी इससे मालिश करने पर आराम मिलता है।http://www.deshbandhu.co.in/print/7389/9 विलक्षण एवं गुणकारी वनौषधियां 16 जुलाई 2016 https://web.archive.org/web/20160807195636/http://www.deshbandhu.co.in/print/7389/9 7 अगस्त 2016 live खस घास को खेती की भूमि सुधार हेतु भी उपयोग में ली जा सकती है नदी झील और नालों की जल प्रदूषण को रोकने हेतु खस का उपयोग प्राकृतिक जल शुद्धीकरण की तरह उपयोग में लाई जा सकती है बरसात के महीनों में अत्यधिक मात्रा में बारिश होने की वजह से भूस्खलन मिट्टी कटाव होकर के खेत की मिट्टी नदी में प्रवाहित हो जाती है जिस वजह से जल प्रदूषण बढ़ जाता है नदी नालो झील में मिट्टी कटाव को रोकने हेतु नदियों के तट में खस घास का रोपण https://web.archive.org/web/20210428150119/https://janglekheti.blogspot.com/2021/04/water-treatment-of-contaminated-waters.html 28 अप्रैल 2021 कर देनी चाहिए https://web.archive.org/web/20210428150119/https://janglekheti.blogspot.com/2021/04/water-treatment-of-contaminated-waters.html 28 अप्रैल 2021 सन्दर्भ श्रेणी:वनस्पति