Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

बाजीराव द्वितीय

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

दिसम्बर 2017 दिसम्बर 2017 right|thumb|300px|बाजीराव द्वितीय बाजीराव द्वितीय (१७७५ – 1 जनवरी, १८५१), सन १७९६ से १८१८ तक मराठा साम्राज्य के पेशवा थे। इनके समय में मराठा साम्राज्य का पतन होना शुरू हुआ। इनके शासनकाल में अंग्रेजों के साथ संघर्ष शुरू हुआ। बाजीराव द्वितीय आठवाँ और अन्तिम पेशवा (1796-1818) थे। वह रघुनाथराव (राघोवा) का पुत्र थे। उनके प्रधानमंत्री नाना फडणवीस की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति के लिए भारी हाथापाई हुई। पेशवा बाजीराव द्वितीय को पद से हटा दिया गया। तत्कालीन विषम परिस्थितियों में उन्हें अंग्रेज़ों की सहायता स्वीकार करनी पड़ी। अंग्रेज़ों ने तब पेशवा पर सहायक गठबंधन ( subsidiary alliance) थोप किया। बेसीन की संधि (1802) ने उन्हें 26 लाख की आय वाले क्षेत्र को अंग्रेज़ों को सौंपने के लिए मजबूर किया। प्रमुख मराठा राज्यों ने संधि को अपमानजनक माना। इस प्रकार दूसरा आंग्ल-मराठा युद्ध (1803-1806) छिड़ गया। मराठों द्वारा बहादुर प्रतिरोध के बावजूद,वे युद्ध हार गये। सहायक गठबंधन को स्वीकार करना पड़ा। अंग्रेज़ों को दोआब, अहमदनगर, ब्रोच और पहाड़ी क्षेत्र मिले। पेशवा के पसंदीदा त्र्यंबकजी द्वारा गायकवाड़ के प्रधानमंत्री गंगाधर शास्त्री की हत्या के फलस्वरूप पेशवा बाजीराव द्वितीय ब्रिटिश विरोधी बन गए । अंग्रेज़ों ने त्र्यंबकजी को गिरफ्तार कर लिया लेकिन वे पेशवा की मदद से भागने में सफल रहे। पेशवा पर एक मराठा परिसंघ बनाने और अंग्रेज़ों के खिलाफ सिंधिया, होल्कर और भोंसले के साथ साजिश रचने का आरोप लगाया गया। इसलिए, अंग्रेज़ों ने पेशवा को 1817 में पूना में एक नई संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया। तदनुसार, पेशवा को मराठा परिसंघ के प्रमुख पद से इस्तीफा देना पड़ा और कोंकण अंग्रेज़ों को सौंपना पड़ा। गायकवाड़ की स्वतंत्रता को भी मान्यता देनी पड़ी। पेशवा बाजीराव इस अपमान को सहन नहीं कर सके। उन्होनें पूना रेज़िडेंसी को जला दिया। जनरल स्मिथ ने पूना पर अधिकार कर लिया। पूना के पतन के बाद पेशवा सतारा पहुँचा। सतारा पर भी जनरल स्मिथ का कब्जा हो गया। उसके बाद जनरल स्मिथ ने पेशवा की सेना को अष्ट, किरकी और कोरगाँव में हराया। यह तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध था। 1818 में पेशवा के आत्मसमर्पण के साथ युद्ध समाप्त हो गया। अंग्रेज़ों ने पेशवाई को समाप्त कर दिया और पेशवा के सभी प्रभुत्वों पर कब्जा कर लिया। 1851 में अपनी मृत्यु तक, पेशवा बाजी राव को वार्षिक पेंशन के साथ बिठूर में रहना पड़ा। होल्करों से पराजय नाना फड़नवीस की मृत्यु के बाद उसके रिक्त पद के लिए दौलतराव शिन्दे और जसवन्तराव होल्कर में प्रतिद्वन्द्विता शुरू हो गई। शिन्दे और होल्कर ने पेशवा को अपने नियंत्रण में लेने के लिए पूना के फाटकों के बाहर युद्ध शुरू कर दिया। बाजीराव द्वितीय ने शिन्दे का साथ दिया, लेकिन होल्कर की सेना ने उन दोनों की संयुक्त सेना को पराजित कर दिया। अंग्रेज़ों से सन्धि नाना फडणवीस की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति के लिए भारी हाथापाई हुई। पेशवा बाजीराव द्वितीय को हटा दिया गया था। तत्कालीन विषम परिस्थितियों में उन्हें अंग्रेज़ों की सहायता स्वीकार करनी पड़ी। अंग्रेज़ों ने तब पेशवा पर सहायक गठबंधन ( subsidiary alliance) थोप किया। बेसीन की संधि (1802) ने उन्हें 26 लाख की आय वाले क्षेत्र को अंग्रेज़ों को सौंपने के लिए मजबूर किया। प्रमुख मराठा राज्यों ने संधि को अपमानजनक माना। इस प्रकार दूसरा आंग्ल-मराठा युद्ध (1803-1806) छिड़ गया। मराठों द्वारा बहादुर प्रतिरोध के बावजूद, युद्ध हार गया। सहायक गठबंधन को स्वीकार करना पड़ा। अंग्रेज़ों को दोआब, अहमदनगर, ब्रोच और पहाड़ी क्षेत्र मिले। संधि के द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध पेशवा बाजीराव को अच्छे नहीं लगे। उसने मराठा सरदारों में व्याप्त रोष और असंतोष का फ़ायदा उठाकर उन्हें अंग्रेज़ों के विरुद्ध दुबारा संगठित किया। आत्मसमर्पण व मृत्यु पेशवा के पसंदीदा त्र्यंबकजी द्वारा गायकवाड़ के प्रधान मंत्री गंगाधर शास्त्री की हत्या के फलस्वरूप पेशवा बाजीराव द्वितीय ब्रिटिश विरोधी बन गए । अंग्रेज़ों ने त्र्यंबकजी को गिरफ्तार कर लिया लेकिन वे पेशवा की मदद से भागने में सफल रहे। पेशवा पर एक मराठा परिसंघ बनाने और अंग्रेज़ों के खिलाफ सिंधिया, होल्कर और भोंसले के साथ साजिश रचने का आरोप लगाया गया। इसलिए, अंग्रेज़ों ने पेशवा को 1817 में पूना में एक नई संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया। तदनुसार, पेशवा को मराठा परिसंघ के प्रमुख पद से इस्तीफा देना पड़ा और कोंकण अंग्रेज़ों को सौंपना पड़ा। गायकवाड़ की स्वतंत्रता को भी मान्यता देनी पड़ी। पेशवा बाजीराव इस अपमान को सहन नहीं कर सके। उन्होंने पूना रेज़िडेंसी को जला दिया। जनरल स्मिथ ने पूना पर अधिकार कर लिया। पूना के पतन के बाद पेशवा सतारा पहुँचा। सतारा पर भी जनरल स्मिथ का कब्जा हो गया। उसके बाद जनरल स्मिथ ने पेशवा की सेना को अष्ट, किरकी और कोरगाँव में हराया। यह तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध था। 1818 में पेशवा के आत्मसमर्पण के साथ युद्ध समाप्त हो गया। अंग्रेजों ने पेशवाई को समाप्त कर दिया और पेशवा के सभी प्रभुत्वों पर कब्जा कर लिया। 1851 में अपनी मृत्यु तक, पेशवा बाजीराव को वार्षिक पेंशन के साथ बिठूर में रहना पड़ा। इन्हें भी देखें भीमा कोरेगाव की लडाई श्रेणी:मराठा साम्राज्य