411 REFERENCE · Wikipedia
टेक्टाइट
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
टेक्टाइट Two tektites.JPG उल्कापिंड के प्रभाव से पृथ्वी के मलबे के पिघलने से बने दो स्प्लैश-फॉर्म टेक्टाइट। सिलिकेट-समृद्ध प्राकृतिक कांच, लेचेटेलिएराइट पूर्णतः कांच जैसी (Vitreous / Glassy)
टेक्टाइट बजरी के आकार के ऐसे प्राकृतिक पिंड होते हैं जो काले, हरे, भूरे या धूसर रंग के प्राकृतिक कांच से बने होते हैं। इनका निर्माण पृथ्वी पर उल्कापिंडों के अत्यधिक तीव्र प्रभाव के दौरान हवा में उछले मलबे के पिघलने और तेजी से ठंडा होने के कारण होता है।
इस शब्द का आविष्कार ऑस्ट्रियाई भूवैज्ञानिक फ्रांज एडुआर्ड सुएस (1867-1941) द्वारा किया गया था, जो ग्रीक शब्द टेक्टोस से प्रेरित था, जिसका अर्थ "पिघला हुआ" होता है।स्प्रिंगर बर्लिन: भूवैज्ञानिक फ्रांज ई. सुएस और टेक्टाइट शब्द का इतिहास इनका आकार आमतौर पर मिलीमीटर से लेकर सेंटीमीटर तक होता है। मिलीमीटर के आकार वाले छोटे टेक्टाइट्स को माइक्रोटेक्टाइट कहा जाता है।फ्रेंच, बी. एम. (1998). ट्रेसेस ऑफ कैटास्ट्रोफी: ए हैंडबुक ऑफ शॉक-मेटामॉर्फिक इफेक्ट्स। लूनर एंड प्लेनेटरी इंस्टीट्यूट, ह्यूस्टन।
मुख्य भू-रासायनिक विशेषताएं
यद्यपि टेक्टाइट देखने में पृथ्वी की ज्वालामुखी चट्टान ओब्सीडियन जैसे कांच जैसी लगती हैं, लेकिन इनकी भौतिक और रासायनिक विशेषताएं ज्वालामुखी कांच से बिल्कुल अलग होती हैं:मैककॉल, जी. जे. एच. (2001). टेक्टाइट्स इन द जियोलॉजिकल रिकॉर्ड: स्कायर ऑफ ग्लास फ्रॉम द स्काई। द जियोलॉजिकल सोसाइटी पब्लिशिंग हाउस, यूके।
क्रिस्टल का पूर्ण अभाव: ओब्सीडियन के विपरीत, टेक्टाइट पूरी तरह से कांच जैसी होती हैं और इनमें सूक्ष्म क्रिस्टल या फेनोक्रिस्ट बिल्कुल नहीं पाए जाते।
अत्यंत कम जल मात्रा: टेक्टाइट में पानी की मात्रा नाममात्र की (<0.02%) होती है। जब ओब्सीडियन को गर्म किया जाता है, तो पानी के कारण वह झागदार हो जाता है, जबकि टेक्टाइट को गर्म करने पर कोई झाग या बुलबुले नहीं बनते।ओ'कीफ, जे. ए. (1976). टेक्टाइट्स एंड देयर ओरिजिन। एल्सेवियर साइंटिफिक पब्लिशिंग कंपनी, एम्स्टर्डम।
लेचेटेलिएराइट की प्रचुरता: इनके भीतर शुद्ध सिलिका कांच यानी लेचेटेलिएराइट के कण पाए जाते हैं, जो केवल अत्यधिक उच्च तापमान और दबाव पर ही बन सकते हैं।
अवसादी चट्टानों से समानता: 75% से अधिक सिलिका होने के बावजूद, इनका रासायनिक और समस्थानिक संगठन स्थानीय मूल चट्टानों के बजाय पृथ्वी की शेल और अन्य अवसादी चट्टानों से मेल खाता है।
टेक्टाइट का वर्गीकरण
आकारिकी और भौतिक विशेषताओं के आधार पर टेक्टाइट्स को मुख्य रूप से चार समूहों में विभाजित किया गया है:मोंटेनारी, ए. और कोएबरल, सी. (2000). इम्पैक्ट स्ट्रेटोग्राफी: द इटालियन रिकॉर्ड। स्प्रिंगर-वेरलाग, न्यूयॉर्क।
लघु|दाएँ|220px|परतदार संरचना और खनिज समावेशन को दर्शाता मुओंग नोंग इंडोचिनाइट का एक नमूना।
स्प्लैश-फॉर्म टेक्टाइट: ये सेंटीमीटर आकार के सामान्य टेक्टाइट होते हैं जो गोले, दीर्घवृत्त, आंसुओं की बूंदों या डम्बल के आकार के होते हैं। इनका निर्माण अंतरिक्ष में उछले पिघले हुए मलबे के तेजी से घूमने और जमने के कारण होता है।
एयरोडायनामिक रूप से आकारित: ये मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र में पाए जाते हैं। जब अंतरिक्ष से ठोस हो चुके कांच के पिंड दोबारा पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करते हैं, तो हवा के घर्षण के कारण उनके चारों ओर एक गोट या छल्ला बन जाता है।
मुओंग नोंग-प्रकार: ये आकार में काफी बड़े (10 सेमी से अधिक और 24 किलोग्राम तक भारी) और अनियमित होते हैं। इनकी बनावट परतदार होती है और इनमें ज़िरकोन, बैडिलेयिट तथा कोएसाइट जैसे उच्च-दबाव वाले खनिजों के समावेशन पाए जाते हैं।
माइक्रोटेक्टाइट: इनका आकार 1 मिलीमीटर से कम होता है। ये मुख्य रूप से गहरे समुद्र के तलछटों में पाए जाते हैं और इनका रंग पारदर्शी, पीला या हल्का भूरा होता है।
प्रमुख विस्तीर्ण क्षेत्र और संबद्ध क्रेटर
पृथ्वी पर मुख्य रूप से चार बड़े भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान की गई है जहाँ ये टेक्टाइट फैले हुए मिलते हैं। वैज्ञानिकों ने इनके भू-रासायनिक गुणों और आयु के आधार पर इन्हें प्राचीन उल्कापिंड क्रेटरों से सफलतापूर्वक जोड़ा है:कोएबरल, सी. (1994). टेक्टाइट ओरिजिन बाई हाइपरवेलोसिटी एस्टेरॉइडल ऑर कॉमेटरी इम्पैक्ट। जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका, बोल्डर।
नाम और क्षेत्र संबद्ध प्रभाव क्रेटर क्रेटर का व्यास आयु (मिलियन वर्ष) टेक्टाइट के प्रकार ऑस्ट्रेलियासियन क्षेत्र(ऑस्ट्रेलिया और द.पू. एशिया) अभी तक पुष्टि नहीं हुई अज्ञात 0.77 – 0.78 ऑस्ट्रेलियाइट (काला), इंडोचिनाइट (काला), फिलिपिनाइट (काला) मध्य यूरोपीय क्षेत्र(चेक गणराज्य और जर्मनी) नॉर्डलिंगर रीस क्रेटर(जर्मनी) 24 किमी 15.1 ± 0.1 मोल्दावाइट (हरा) आइवरी कोस्ट क्षेत्र(घाना और हाथी दांत तट) बोसुमतवी क्रेटर(घाना) 10 किमी 1.07 इवोराइट (काला) उत्तरी अमेरिकी क्षेत्र(संयुक्त राज्य अमेरिका) चेसापीक बे क्रेटर(अमेरिका) 40 किमी 35.5 ± 0.3 बेडियासिट (टेक्सास), जॉर्जियाइट (जॉर्जिया-हरा)
लघु|बाएँ|200px|चेक गणराज्य में पाया जाने वाला एक सुंदर हरा मोल्दावाइट (Moldavite) टेक्टाइट।
इसके अलावा भूवैज्ञानिकों द्वारा मध्य अमेरिका (बेलीज़, होंडुरास, निकारागुआ) में भी एक नए विस्तीर्ण क्षेत्र की खोज की जा रही है, जिसकी उत्पत्ति का संभावित स्रोत निकारागुआ का 'पेंटास्मा इम्पैक्ट क्रेटर' माना जा रहा है।पोवेनमायर, एच., हैरिस, आर. एस. और कॉर्नेक, जे. एच. (2011). द न्यू सेंट्रल अमेरिकन टेक्टाइट एंड स्ट्रेउन फील्ड। 42वीं लूनर एंड प्लेनेटरी साइंस कॉन्फ्रेंस, abstract no. 1224.
उत्पत्ति के सिद्धांत
स्थलीय प्रभाव सिद्धांत (सर्वसम्मत वैज्ञानिक मत): आज के समय में खगोलविदों और भूवैज्ञानिकों के बीच यह पूर्ण सहमति है कि टेक्टाइट पूरी तरह से पृथ्वी के मलबे से बने पिंड हैं। जब कोई विशाल उल्कापिंड या पुच्छल तारा अत्यधिक तीव्र गति से पृथ्वी की सतह से टकराता है, तो सतह की चट्टानें और अवसाद क्षण भर में वाष्पीकृत और पिघल जाते हैं। यह पिघला हुआ तरल पदार्थ अत्यधिक गति से वायुमंडल से बाहर अंतरिक्ष की सीमा तक उछल जाता है। जैसे ही यह मलबा दोबारा वायुमंडल में प्रवेश करता है, यह ठंडी हवा के संपर्क में आकर कांच की छोटी बूंदों और पिंडों के रूप में जम जाता है और क्रेटर से हजारों किलोमीटर दूर तक गिरकर 'विस्तीर्ण क्षेत्र' का निर्माण करता है।कोएबरल, सी. (1990). द जियोकेमिस्ट्री ऑफ टेक्टाइट्स: एन ओवरव्यू। टेक्टोनोफिज़िक्स, 171:405-422.
गैर-स्थलीय सिद्धांत (ऐतिहासिक विवाद): अतीत में टेक्टाइट की उत्पत्ति को लेकर भारी वैज्ञानिक विवाद रहा है। वर्ष 1897 में डच भूवैज्ञानिक रोजियर वेरबेक ने पहली बार यह विचार रखा था कि ये पिंड चंद्रमा के ज्वालामुखियों के फटने के कारण पृथ्वी पर गिरे हैं।वेरबेक, आर. डी. एम. (1897). ओवर ग्लास्कोगेल्स वैन बिलिटन। रॉयल एकेडमी ऑफ साइंसेज एट एम्स्टर्डम, पृष्ठ 421–425। 1950 से 1990 के दशक तक नासा के वैज्ञानिक जॉन ए. ओ'कीफ और एयरोडायनामिस्ट डीन आर. चैपमैन ने भी विंड टनल परीक्षणों और जटिल कंप्यूटर मॉडलों के आधार पर यह तर्क दिया था कि ऑस्ट्रेलियाई टेक्टाइट चंद्रमा के 'टायचो क्रेटर' से निकले मलबे का हिस्सा हैं।चैपमैन, डी. आर. (1971). ऑस्ट्रेलियासियन टेक्टाइट जियोग्राफिक पैटर्न एंड रे ऑफ ओरिजिन। जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च। 76(26):6309-6338.
हालांकि, जब अपोलो अभियानों द्वारा चंद्रमा की चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाए गए और उनकी रासायनिक जांच की गई, तो यह साबित हो गया कि चंद्रमा की सतह पर ऐसा कोई रासायनिक संगठन नहीं है जो टेक्टाइट से मेल खाता हो। इसके बाद चंद्रमा से उत्पत्ति का सिद्धांत पूरी तरह खारिज हो गया और स्थलीय प्रभाव सिद्धांत स्थापित हुआ।हीडे, के. और हीडे, जी. (2011). विट्रियस स्टेट इन नेचर—ओरिजिन एंड प्रॉपर्टीज। चेमी डेर एर्डे, 71(4):305–335.
इन्हें भी देखें
शेल
बेंटोनाइट
रेगोलिथ
सन्दर्भ
श्रेणी:भूविज्ञान