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गुजराती लिपि
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गुजराती गुजराती, कच्छी, भीली, भिलोरी, गामीत, कुकना, वाघरी, वारली, वसावी, अवस्ताईhttp://scriptsource.org/cms/scripts/page.php?item_id=script_detail&key=Gujr ScriptSource - Gujarati 2017-02-13 1592–वर्तमान आबूगीदा मिस्री आदिम-सीनाई फ़ोनीशियाई अरामी ब्राह्मी गुप्त सिद्धम नागरीSalomon Richard Indian Epigraphy https://books.google.com/books?id=XYrG07qQDxkC Oxford University Press 1998 41 978-0-19-535666-3 देवनागरीMistry 1996 391मोड़ीकैथीनन्दिनागरीगुंजल गोंडी U+0A80–U+0AFF Gujr gu ગુજરાતી Gujarati Script Sample.svg 200px बाएँ-से-दाएँ
गुजराती लिपि (gu ગુજરાતી) गुजराती, कच्छी तथा अन्य और भाषाओं के लिए एक आबूगीदा है। यह भारत का एक आधिकारिक लिपि भी है। गुजराती लिपि में शिरोरेखा नहीं होती है।
उत्पत्ति
गुजराती लिपि, नागरी लिपि से व्युत्पन्न हुई है। गुजराती भाषा में लिखने के लिए देवनागरी लिपि को परिवर्तित करके गुजराती लिपि बनायी गयी थी। गुजराती भाषा और लिपि तीन अलग-अलग चरणों में विकसित हुईं - 10 वीं से 15 वीं शताब्दी, 15 वीं से 17 वीं शताब्दी और 17 वीं से 19 वीं शताब्दी। पहले चरण में प्राकृत, अपभ्रंश, पैशाची, शौरसेनी, मागधी और महाराष्ट्री का उपयोग हुआ। दूसरे चरण में, पुरानी गुजराती लिपि व्यापक उपयोग में थी। पुरानी गुजराती लिपि में सबसे पुराना ज्ञात दस्तावेज 1591-92 की आदि पर्व की एक हस्तलिखित पाण्डुलिपि है। यह लिपि पहली बार 1797 के एक विज्ञापन में छपी थी। तीसरा चरण है, आसानी से और तेजी से लेखन के लिए विकसित लिपि का विकास। इसमें शिरोरखा का उपयोग त्याग दिया गया, जो देवनागरी में होता है।
19 वीं शताब्दी तक इसका उपयोग मुख्य रूप से पत्र लिखने और हिसाब रखने के लिए किया जाता था, जबकि देवनागरी लिपि का उपयोग साहित्य और अकादमिक लेखन के लिए किया जाता था। इसे शराफी या वाणियाशाई कहा जाता था। यही लिपि आधुनिक गुजराती लिपि का आधार बनी। बाद में उसी लिपि को पांडुलिपियों के लेखकों ने भी अपनाया। जैन समुदाय ने भी धार्मिक ग्रंथों की प्रतिलिपि बनाने के लिए इसी लिपि के उपयोग को बढ़ावा दिया।
स्वर
स्वतंत्रस्वर मात्राક पर लगी मात्रादेवनागरी मेंतुल्य वर्ण खड़ी बोलीहिंदी में उच्चारणअ॰ध्व॰व विशेषकका नामTisdall 1892 20અકअəઆાકાआaकानोઇિકિइईiह्रस्व अज्जुઈીકીईदीर्घ अज्जुઉુકુउऊuह्रस्व वरड़ुंઊૂકૂऊदीर्घ वरड़ुंઋૃકૃऋरूɾuએેકેएऎ, ऐe, ɛएक मात्रઐૈકૈऐअयəjबे मात्रઓોકોओऒoकानो एक मात्रઔૌકૌऔअवəʋकानो बे मात्रઍૅકૅऍæઑૉકૉॵɔ
thumb|500px|center|गुजराती लिपि के ક वर्ण पर लगी विभिन्न मात्राएँ
व्यंजन
यहाँ प्रस्तुत हैं गुजराती लिपि के व्यंजन उनके हिंदी-देवनागरी और आई पी ए के साथ।
स्पर्शअनुनासिकअन्तःस्थऊष्मान्अघोषघोषअल्पप्राणमहाप्राणअल्पप्राणमहाप्राणकण्ठ्यકकkəખखkhəગगɡəઘघɡɦəઙङŋəतालव्यચचtʃəછछtʃhəજजdʒəઝझdʒɦəઞञɲəયयjəશशʃəमूर्धन्यટटʈəઠठʈhəડडɖəઢढɖɦəણणɳəરरɾəષषदन्त्यતतt̪əથथt̪həદदd̪əધधd̪ɦəનनnəલलləસसsəओष्ठ्यપपpəફफphəબबbəભभbɦəમमməવवʋə
ऊष्मान्હहɦəमूर्धन्यળळɭəક્ષक्षkʃəજ્ઞज्ञɡɲə
अहमदाबाद की पढ़ी-लिखी बोलिओं में ફ का उच्चार फ़ होता है।
अंक
अन्तरराष्ट्रीयअंक गुजरातीअंक नाम 0 ૦ मींडुं या शून्य 1 ૧ एकडो या एक 2 ૨ बगडो या बे 3 ૩ त्रगडो या त्रण 4 ૪ चोगडो या चार 5 ૫ पांचडो या पाँच 6 ૬ छगडो या छ 7 ૭ सातडो या सात 8 ૮ आठडो या आंठ 9 ૯ नवडो या नव
गुजराती की युनिकोड
गुजराती लिपि को यूनिकोड मानक में अक्टूबर 1991 में संस्करण 1.0 के रिलीज के साथ जोड़ा गया था। गुजराती के लिए यूनिकोड ब्लॉक U+0A80–U+0AFF है:
सँदर्भ
श्रेणी:लिपि
श्रेणी:गुजराती भाषा
श्रेणी:भाषा-विज्ञान
श्रेणी:ब्राह्मी परिवार की लिपियाँ