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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

रक्तचापमापी

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मार्च 2020 मार्च 2020 right|thumb|200px|एलेक्ट्रॉनिक रक्तचापमापी रक्तचापमापी यह रक्तचाप को मापने के लिए एक उपकरण है, जिसमें साधारणतः एक स्फीतयोग्य रबड़ कफ़ होता है जो हाथ पर लगाया जाता है और एक मापन उपकरण के पार्श्व में पारा के एक स्तंभ से जुड़ा होता है, जिससे सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप के निर्धारण किया जा सकता है। इसे कफ़ में दबाव को धीरे-धीरे बढ़ाकर और इसे धीरे-धीरे छोड़ते हुए किया जाता है। प्रकार १) साधारण रक्तचापमापी (मैनुअल रक्तचापमापी) - इसमें दाबमापी यंत्र के साथ-साथ एक आला की भी जरूरत पड़ती है। इन्हें प्रयोग करने वाला प्रशिक्षित होना जरूरी है अन्यथा गलत माप होने की आशंका होती है। २) स्वचालित रक्तचापमापी (आटोमटिक) - ये सबकुछ (फुलाना, रक्त-संचार का अनुभव करना आदि) स्वयं करता है और रक्तचाप की माप बताता है। ये डिजिटल या यांत्रिक प्रकार के हो सकते हैं। रक्तचाप रक्तचाप रक्तचाप रक्त का वह दबाव है जो रक्तवाहिनियों की दीवारों पर पड़ता है। उच्च रक्तचाप, जिसे अतिरुधिरतनाव (hypertension) कहते हैं, धमनीगत रोग है। हृदय, जिसका अन्य अंगों से धमनियों द्वारा संबंध होता है, स्पंदन द्वारा रक्त का परिसंचरण कर, शारीरिक अंगों का पोषण करता हैं। धमनियाँ अपने लचीलेपन द्वारा रुधिर को आगे बढ़ाती हैं, परंतु चिंता, क्रोध, अतिपरिश्रम तथा अन्य मानसिक परिवर्तनों के कारण यह लचीलापन कम हो जाता है, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो जाती है। इसके फलस्वरूप धमनियों की दीवार पर रक्त का दबाव बढ़ जाता है। इसी को "उच्च रक्तचाप' कहते हैं। इस अवस्था में सिर घूमना, पलकों का भारीपन, चेहरे पर लाली, मानसिक विकृति, अरुचि, थकावट, क्षुधानाश इत्यादि लक्षण प्रकट होते हैं। इसी समय रक्तचाप का मापन करना चाहिए। रक्तचाप निम्नलिखित दो प्रकार का होता है : (१) प्रकुंचन (Systolic) रक्तचाप अधिकतम रक्तचाप होता है, जो हृदय के आकुंचन काल के समय उत्पन्न होता है। (२) अनुशिथिलन (Diastolic) रक्तचाप न्यूनतम रक्तचाप है, जो हृदय के प्रसार काल में उत्पन्न होता है। प्रकुंचन रक्तचाप आयु के अनुसार निम्नलिखित होता है : बाल्यावस्था ७५ से ९० श् मिलीमीटर किशोरावस्था ९० से ११० मिलीमीटर युवावस्था--- १०० से १२० मिलीमीटर प्रौढ़ावस्था--- १२० से १३० मिलीमीटर वृद्धावस्था--- १४० से १५० मिलीमीटर आयु के अनुसार प्रकुंचन रक्तचाप निकालने के लिए सामान्यत: आयु में ९० जोड़ देते हैं। १६० से अधिक रक्तचाप विकृति का सूचक है। युवा व्यक्तियों में औसत अनुशिथिलन रक्तचाप ८० मिलीमीटर होता है और ४० वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों में लगभब ९० मिलीमीटर होता है। भावावेश के कारण हृदय की गति तीव्र होने से रक्तचाप बढ़ता है। सब व्यक्तियों का रक्तचाप एक सा नहीं होता। एक ही व्यक्ति का रक्तचाप भी समय समय पर बदलता है। स्त्रियों का पुरुषों से कुछ कम होता है। भारी शरीरवाले व्यक्ति का रक्तचाप हलके भारवाले व्यक्ति से कुछ कम रहता है। कसरत करते समय कुछ बढ़ जाता है। कुछ व्यक्तियों का रक्तचाप सामान्य रक्तचाप से कम रहता है। इसका किसी रोग से संबंध नहीं है। ऐसे व्यक्ति उच्च रक्तचापवाले व्यक्तियों से अधिक दीर्घजीवी पाए गए हैं, क्योंकि इनमें उस अति रुधिर तनाव की संभावना नहीं रहती, जिससे उच्च रक्तचापवाले व्यक्तियों की बहुधा मृत्यु होती है। रक्तचाप मापन यंत्र १८९६ ई. में प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ॰ रिगरोसी ने रुधिरदाबमापी (sphygmomanometer) यंत्र का आविष्कार किया था। इस यंत्र में एक पंप होता है, जिससे रबर की एक नलिका लगी रहती है। यह नलिका आगे चलकर दो भागों में विभक्त हो जाती है, जिससे एक भाग का संबंध पारदयंत्र से रहता है। बाहुबंधक समरूप से बाहु पर कस कर बाँध दिया जाता है और पंप से हवा भरी जाती है। उसी समय कोहनी के सामने के भाग में स्टेथोस्कोप रखकर प्रत्येक स्पंदन के समय की ध्वनि सुनी जाती है। जब बाहुबंधक में वायु का दबाव धमनीगत रक्तचाप से अधिक हो जाता है, तब धमनी दब जाती है और ध्वनि सुनाई नहीं देती, इसके फलस्वरूप पारदयंत्र में भी कंपन नहीं दिखता। अब पंप के पेंच को ढीला करके बाहुबंधक से वायु धीरे धीरे निकाली जाती है। इस समय जैसे ही स्टेथस्कोप से ध्वनि सुनाई दे पारदयंत्र पर लगे पैमाने पर पारे का पाठ्यांक देखा जाता है। यही पाठ्यांक प्रकुंचन रक्तचाप होता है। अधिक वायु निकालने से ध्वनि तीव्रतर होती जाती है, फिर अस्पष्ट हो जाती है तथा अंत में बंद हो जाती है। ध्वनि के एकदम बंद होने के पूर्व अस्पष्ट ध्वनि के समय पारदयंत्र के पाठ्यांक को देख लिया जाता है। यही पाठ्यांक अनुशिथिलन रक्तचाप होता है। मलबंध, भावावेश, शारीरिक और मानसिक परिश्रम की अधिकता, रक्तवाहिनियों में रक्त की कमी, हृदय की शक्ति तथा रक्त वाहनियों के परिधीय (peripheral) प्रतिरोध में कमी, रक्त की सांद्रता, रक्तवाहिनियों की प्रत्यास्थता, रक्तवाहिनियों का आयतन, श्वास संबंधी परिणाम तथा शीत एव उष्णता की कमी बेशी से रक्तचाप में परिवर्तन होता है। बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:चिकित्सा उपकरण श्रेणी:रक्तचाप