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मौलाना मज़हरुल हक़
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अगस्त 2020
मौलाना मज़हरूल हक़ Mazharul_Haque.jpg भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस yes 1887 12 22 ब्रह्मपुर, पटना, बिहार yes 1930 1 2 1886 12 22 सारन, भारत धर्मशास्त्री, शिक्षाविद, राजनीतिक कार्यकर्ता और स्वतंत्रता सेनानी, वकील
मौलाना मज़हरूल हक़ (22 दिसम्बर 1886 – 2 जनवरी 1930), को पटना जिले के मानेर थाना के ब्रह्मपुर में हुआ था। एक शिक्षाविद्, एक वकील, स्वतंत्रता कार्यकर्ता और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के एक स्वतंत्रता सेनानी थे। अपने पूरे कार्यकाल में मज़हरुल हक़ हिंदू-मुस्लिम एकता के समर्थक रहे। भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने अपनी पुस्तक, इंडिया डिवाइडेड, उन्हें समर्पित की और उन्हें "एक धर्मनिष्ठ मुसलमान और भावुक देशभक्त" बताया। Raza Syed 2013 Mazharul Haque: An Icon of Communal Harmony https://www.jstor.org/stable/44158857 Proceedings of the Indian History Congress 74 555–563 44158857
1981 में भारतीय डाक सेवा द्वारा उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया गया और 1998 में उनकी स्मृति में पटना में मौलाना मज़हरुल हक़ अरबी और फ़ारसी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। http://heritagetimes.in/maulana-mazharul-haque-who-strongly-believed-in-sacrificing-personal-interests-for-achieving-common-interests/ Maulana Mazharul Haque, who strongly believed in sacrificing personal interests for achieving common interests Heritage times.com https://www.deccanherald.com/amp/content/471328/bihar-vidyapeeth-founded-gandhi-revived.html Bihar Vidyapeeth Founded by Gandhi to be revived. Kumar Abhay Deccan herald. 29 September 2020 Raza Sayed 2009–2010 Mazharul Haque: A pioneer of Sadaqat Ashram and Bihar Vidyapith. https://www.jstor.org/stable/44147718 Proceedings of the Indian History Congress 70 705–712 44147718 29 September 2020 https://www.firstpost.com/india/with-gandhian-heritage-campus-in-shambles-what-is-bihar-vidyapeeths-future-4250795.html/amp With Gandhian heritage, campus in shambles, what is Bihar Vidyapeeth's future? Khan MI Firstpost.com 29 September 2020
उन्होंने गांव में एक घर का निर्माण किया और इसका नाम ‘आशियाना’ रखा। 1927 में पंडित मोतीलाल नेहरु, 1928 में श्रीमती सरोजनी देवी, पं मदन मोहन मालवीय, के.एफ. नरिमन, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ने फरीदपुर में इनके घर ‘आशानिया’ का दौरा किया। वह शेख अमुदुल्ला के तीन बच्चों में एकमात्र बेटे थे| उनकी बहनों के नाम में गफरुनीषा और कानीज फातमा थे। उनके पिता एक अमीर जमीनदार थे।
1891 के बाद का जीवन
1891 में बैरिस्टर बनकर भारत लौटने पर वे न्यायिक सेवा में शामिल हो गया। 1896 में उसने वकालत शुरू की। 1906 तक उन्होंने छपरा छोड़कर पटना में वकालत शुरू कर दी थी और उसी वर्ष बिहार कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष चुना गया। https://books.google.com/books?id=1Ds_0Lz67uwC&dq=mazharul+haque%C2%A0&pg=PA13 Mazharul Haque Kumar Nirmal 2009 Hemkunt Press 9788190761307 15–25
1910 और 1911 में वे इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल ऑफ़ इंडिया के सदस्य चुना गया। 1911 में मौलाना की अध्यक्षता में एक तीसरा "बिहार राज्य सम्मेलन" आयोजित किया गया जिसमें अलग बिहार राज्य की माँग की गई। https://books.google.com/books?id=1Ds_0Lz67uwC&dq=mazharul+haque%C2%A0&pg=PA13 Mazharul Haque Kumar Nirmal 2009 Hemkunt Press 9788190761307 15–25
उन्होंने 1916 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग की संधि में सक्रिय भूमिका निभाई। वे 1916 में एनी बेसेंट द्वारा शुरू किए गए होमरूल आंदोलन में शामिल हुए और 1917 में चंपारण सत्याग्रह में सक्रिय रूप से भाग लिया। महात्मा गांधी के अतिथि पटना में उनके घर "सिकंदर मंजिल" पर आए। https://books.google.com/books?id=1Ds_0Lz67uwC&dq=mazharul+haque%C2%A0&pg=PA13 Mazharul Haque Kumar Nirmal 2009 Hemkunt Press 9788190761307 15–25
1919 में वे खिलाफत आंदोलन में सक्रिय रहे और 1920 में गांधीजी के आह्वान पर असहयोग आंदोलन में शामिल हो गया। 1921 में गांधीजी प्रभावित हुए और उन्होंने पटना में "सदाकत आश्रम" (सत्य का निवास) की स्थापना की। इसी आश्रम से हक ने " मदरलैंड " नामक एक साप्ताहिक पत्रिका शुरू की। वे हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे। उनका कथन था, "चाहे हम हिंदू हों या मुसलमान, हम एक ही नाव पर सवार हैं। अगर हम जीतेंगे, तो डूबेंगे, हम साथ-साथ डूबेंगे।" https://books.google.com/books?id=1Ds_0Lz67uwC&dq=mazharul+haque%C2%A0&pg=PA13 Mazharul Haque Kumar Nirmal 2009 Hemkunt Press 9788190761307 15–25
उन्होंने 1926 में सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा की लेकिन महात्मा गांधी, मौलाना आज़ाद और नेहरू जैसे नेताओं के साथ पत्र-व्यवहार जारी रखा। 2 जनवरी 1930 को उनका निधन हो गया। सीवान में एक आवासीय कॉलोनी का नाम उनके नाम पर रखा गया है। https://books.google.com/books?id=1Ds_0Lz67uwC&dq=mazharul+haque%C2%A0&pg=PA13 Mazharul Haque Kumar Nirmal 2009 Hemkunt Press 9788190761307 15–25
अंगूठाकार|भारतीय डाक द्वारा 1981 में जारी एक स्मारक डाक टिकट
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ
श्रेणी:स्वतंत्रता सेनानी