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पहाड़ी चित्रकला शैली
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right|thumb|300px|पहाड़ी शैली में नल-दमयन्ती कथा का चित्रण
पहाड़ी चित्रकला एक प्रमुख भारतीय चित्रकला शैली हैं।
पहाड़ी चित्रकला शैली के अन्य प्रकार
बसोहली शैली
. विद्वानों के अनुसार जम्मू और कश्मीर प्रदेश में स्थित बसोहली पहाड़ी शैली को विकास का पालन कहा जाता है। सन् १९१६ में ए के स्वामी ने पहाड़ी शैली को दो अलग -अलग शैली के रूप में माना।(१)का्नगडा्न (२)बसोहली।
=== गुलेरी शैली
लिखित मनीष ताम्बड़
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गढ़वाल शैली garhwali chitrakala ka vikas mugal kaal main hi shuru hua aur apne utkarsh ko bhi pahucha.
Haridas or enki pedi ko garhwali Chitrakal ka mahan kalkar mana jata hai
जम्मू शैली
कांगड़ा शैली
संसारचन्द्र के शाशन कल में विकसित हुई
पहाड़ी पेंटिंग (शाब्दिक अर्थ पहाड़ी क्षेत्र की पेंटिंग) एक वृहत शब्द है जिसका उपयोग भारतीय चित्रकला के रूप में किया जाता है। यह अधिकतर लघु रूप में किया जाता है एवं इसका उद्भव उत्तर भारत के हिमालय के पहाड़ी राज्यों में 17 वीं -19 वीं सदी के दौरान हुआ। जिनमे प्रमुख थे बसोहिली, मानकोट, नूरपुर, चंबा, कांगड़ा, गुलर, मंडी और गढ़वाल। Hindu Hill Kingdoms https://web.archive.org/web/20100330034200/http://www.vam.ac.uk/collections/asia/asia_features/sikhism/art/hindu/index.html 30 मार्च 2010 V&A Museum. Pahari https://web.archive.org/web/20170623095021/http://www.kamat.com/kalranga/art/pahari.htm 23 जून 2017 Kamat. इस कला में सिद्धहस्थ माने जाने वाले नैनसुख थे जिनका जन्म 18 वीं शताब्दी के मध्य में हुआ था। इसके बाद उनकी दो पीढ़ियों ने इस कला को आगे बढाया।
होली खेलती हुई राधा १७८८ की पेंटिंग
thumb|300px|Radha celebrating Holi, ca 1788.
thumb|300px|Sudama bows at the glimpse of Krishna's golden palace in Dwarka. ca 1775-1790 painting.
पहाड़ी शैली में चित्रित नल दमयंती की कथा जो महाभारत पर आधारित हैं
उत्पत्ति और क्षेत्र
द्वारका में कृष्ण के स्वर्ण महल की झलक पर सुदामा के द्वारा शीश झुकाना, 1775-17 90 की चित्रकारी
पहाड़ी चित्रकला स्कूल का विकास 17 वीं से १९ वी सदी के दौरान जम्मू से अल्मोड़ा और गढ़वाल एवं उप-हिमालयी भारत एवं हिमाचल प्रदेश में हुआ। प्रत्येक शैली में एक दुसरे से भिन्नता दिखाई पड़ती हैं। जैसे बसोली चित्रकला जो जम्मू और कश्मीर में बसोली से उत्पन्न हुई हैं में बड़े गहरे रंगों का प्रयोग होता हैं एवं कांगड़ा पेंटिंग् नाजुक एवं गीतात्मक शैली के होते हैं। कांगड़ा शैली अन्य स्कूलों के विकास से पहले पहाड़ी चित्रकला शैली का पर्याय बन गया था। कांगड़ा चित्रकला की शैली राधा और कृष्ण की चित्रों के साथ अपने शिखर पर पहुंच गई, जो जयदेव की गीता गोविंद से प्रेरित थी।
पहाड़ी चित्रकला का उद्भव मुगल चित्रकला से ही हुआ था। यदयपि इसे राजपूत राजाओं का भी सरंक्षण प्राप्त हुआ था जिन्होंने इस क्षेत्र के कई हिस्सों पर राज्य किया और इस तरह से भारतीय चित्रकला में एक नई मुहावरे को जन्म दिया। http://www.culturopedia.com/Painting/pahari.html Pahari 31 मई 2017 https://web.archive.org/web/20091211185646/http://www.culturopedia.com/Painting/pahari.html 11 दिसंबर 2009 dead
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Kangra Painting
Indian Court Painting, 16th-19th Century from the Metropolitan Museum of Art
क प्रमुख भारतीय चित्रकला शैली हैं
श्रेणी:आधार
श्रेणी:भारतीय चित्रकला