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सिपहसालार
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सिपहसालार (fa سپهسالار) या इस्पहसालार 10वीं से 15वीं शताब्दी तक इस्लामी दुनिया में एक उपाधि थी, जिसे वरिष्ठ सेनापतियों को दिया जाता था।
श्रेणी:सैन्य पद
श्रेणी:फ़ारसी शब्द
श्रेणी:प्रधान सेनापति
श्रेणी:ईरान में उपाधियाँ
श्रेणी:उस्मानी उपाधियाँ
श्रेणी:सफ़वी साम्राज्य की सरकार
इस्लामी पूर्व और फ़ारस
यह उपाधि मध्य फ़ारसी शब्द स्पाह-सालार (pal-Avst 𐬯𐬞𐬁𐬵⸱𐬯𐬁𐬮𐬁𐬭) से व्युत्पन्न,"Kursi-i hazrat Zartosht", Nirangs. जो 9वीं शताब्दी के पाज़ंद ग्रंथों में उल्लिखित है। यह पुरानी सासानी उपाधि सिपहबद के समान था, जिसका प्रयोग इस्लामी काल में केवल तबरिस्तान और ख़ुरासान के शासकों के लिए सीमित था।Bosworth Digby 1978 208 सिपहसालार उपाधि गत 10वीं शताब्दी के इस्लामी दुनिया में लोकप्रिय बना, जब ईरानी मुस्लिम राजवंश सत्ता में आए थें। 'प्रधान सेनापति' के अर्थ में, सिपहसालार का प्रयोग अरबी उपाधियों हाजिबुल हुज्जाब (ar حاجب الحجاب), हाजिबुल कबीर (ar حاجب الكبير) या साहिबुल जैश (ar صاحب الجيش) के समांतर किया जाता था।Bosworth Digby 1978 208
बुवैहियों में, इसे दो विद्रोही तुर्की सेनापतियों सुबुक्तगीन और अल्पतगीन को दिया गया था। शताब्दी के अंत की ओर बुवैही राज्यों की बढ़ती अस्थिरता हेतु, इस्पहसालार का अर्थ केवल 'सेनापति' या 'अधिकारी' रहा।Bosworth Digby 1978 208 सफ़्फ़ारी शासक ख़लफ़ इब्न अहमद (963 1002) के तहत, यह उपाधि प्रधान सेनापति को दी जाती थी, जबकि हाजिबुल हुज्जाब दास सैनिकों के सेनापति थे।Bosworth Digby 1978 208 तुर्की राजवंशों में, अरबी और फ़ारसी उपाधियों को तुर्की उपाधि सुबाशी से बदल दिए गए थें। ग़ज़नवियों ने सिपहसालार और उनके अरबी समरूपों का प्रयोग प्रधान सेनापतियों के लिए किया, किंतु सेना के कुछ विभागों के सेनापति भी सिपहसालार कहलाते थें, जबकि सालार और हाजिब कनिष्ठ सेनापतियों को दिया जाता था।Bosworth Digby 1978 208 सलजूक़ साम्राज्य और रूम सल्तनत ने इस्पहसालार-ए-बुज़ुर्ग (fa اسپهسالار بزرگ) या अमीर-ए-इस्पहसालार (fa امیر اسپهسالار) जैसे रूपों के साथ-साथ विभिन्न अरबी, फ़ारसी और तुर्की उपाधियाँ प्रधान सेनापतियों, महत्वपूर्ण प्रदेशों के सेनापतियों एवं राज्यपालों को दिया, तथा इसका प्रयोग 'जनरल अधिकारी' के अर्थ में किया।Bosworth Digby 1978 208–209 ख़्वारज़्मशाहों ने भी सीमान्त प्रदेशों के सेनापतियों को एक अनोखी उपाधि, क़ीर इस्फ़हसलार (fa قیر اسفهسالار) दी।Bosworth Digby 1978 209
मंगोल विजयों से उपाधि का प्रयोग समाप्त हुआ, और उसकी जगह तुर्की एंव मंगोल वाले दिए गए, किन्तु इसका प्रयोग गीलान और दैलम में लागू रहा।Bosworth Digby 1978 209 फ़ारस में, सफ़वी शाह अब्बास प्रथम (1587 1629) ने सिपहसालार को पुनर्स्थापित किया, जिससे उस समय तक जारी अरबी उपाधिअमीर अल-उमरा प्रतिस्थापित हुआ। सिपहसालार का पद अज़रबैजान के बेगलेरबेगी द्वारा सम्भाला जाता था। 1664/77 इसे फिर से विस्थापित किया गया था, जिसके बाद युद्ध के समय में केवल एक सरदार को नियुक्त किया जाता था।Bosworth Digby 1978 209 गत क़ाजार राजवंश में उपाधि सिपहसालार-ए-आज़म (fa سپهسالار اعظم) के रूप में लौट आई। इसे वज़ीर-ए-आज़म मिर्ज़ा हुसैन ख़ान को दी गई थी, जिन्होंने 1871 को तेहरान में सिपहसालार मस्जिद का निर्माण किया। 1910 में, इसे वज़ीर-ए-आज़म मुहम्मद वली ख़ान तुनिकाबुनी को दी गई थी।Bosworth Digby 1978 209Katouzian 2006 26–27, 35, 203
कॉकेशस और मशरिक़
बुवैही, और ख़ास में सलजूक़ प्रभाव से सिपहसालार और अन्य फ़ारसी उपाधियाँ मशरिक़ और कॉकेशस के ईसाई देशों तक भी फैली। आर्मीनियाई भाषा में, इसे स्पाहसालार (hy Սպասալար) कहा जाता था। जॉर्जिया राज्य में अमीरस्पासालारी सेनापति की उपाधि थी।Bosworth Digby 1978 209 यह उपाधि का प्रयोग सीरिया और इराक़ के अताबेगों और बाद में अय्यूबियों में भी था, किन्तु यह अनोखे तौर से अताबेगों की व्यक्तिगत उपाधि थी।Bosworth Digby 1978 209–210
फ़ातिमी मिस्र में, इस्फ़हसलार सेनापति का पद था, जिसे साहिब अल-बाब के साथ सैन्य आयोजन के लिए नियुक्त किया जाता था।Bosworth Digby 1978 209 मिस्र के ममलूक भी दोनों इस्फ़हसलार और उसकी निसबत अल-इस्फ़हसलारी (ar الإسفهسلاري) का प्रयोग करते थे, किन्तु उसे बाद में समाप्त किया गया था। फिर भी इसका उल्लेख 1475 में किया गया था, किन्तु उस समय ममलूक सुल्तान के अंगरक्षकों को भी इस्बहसलार (ar إصبهسلار) कहा जाता था।Bosworth Digby 1978 210 उस्मानी साम्राज्य में भी सिपहसालार एक उपाधि थी, किंतु एक सेनापति के लिए साधारण शब्द सरदार और सरास्कर थे।Bosworth Digby 1978 210
दक्षिण एशिया
ग़ज़नवियों के माध्यम से उपाधि का प्रयोग अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तरी भारत पर शासन करने वाले ग़ोरी राजवंश में आया। ग़ोरियों के तहत, इस्फ़हसालार का अर्थ मुख्य सेनापति था, किन्तु 13वीं शताब्दी में इसे सौ घुड़सवारों के सेनापति को कहा जाता था, और तुग़लक़ों के तहत केवल दस सैनिकों के सेनापति को इस्फ़हसालार माना जाता था।Bosworth Digby 1978 210 इसके अलावा, यह 14वीं से 15वीं शताब्दी तक "सामान्य अधिकारी" (लोदी राजवंश के तहत) या "मुख्य सेनापति" (बंगाल सल्तनत या दक्खिन सल्तनत में) के लिए उपाधि रही। मुग़ल साम्राज्य में, इसे ख़ानख़ानान (ख़ानों के ख़ान) को दिया जाता था, ख़ासकर जब वह सम्राट की जगह सेना की नेतागिरी करते थे।Bosworth Digby 1978 210
संदर्भ