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411 समाचार
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हिजरत

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हिज्राह या हिजरत (Hegira or Hijrah (هِجْرَة) हज़रत मुहम्मद ﷺ का अपने अनुयाइयों (सहाबा) के साथ, शहर मक्का से शहर मदीना जिस का पुराना नाम यथ़रिब था, को सन ६२२ ई में प्रवास है। जून, 622 ई में, शहर मक्का में हज़रत मुहम्मद ﷺ को पता चला कि उनकी हत्या का प्रयास किया जा रहा है, इस सन्दर्भ में, शहर मक्का छोड़ कर यथ़रिब (मदीना) प्रवास किए। इनके साथ इनके दोस्त और सहाबी अबू बक्र भी थे। Moojan Momen (1985), An Introduction to Shi'i Islam: History and Doctrines of Twelver Shi'ism, Yale University Press, New edition 1987, p. 5. यस्रिब को 'मदीनत-अन-नबी' का नाम दिया गया। अर्थात प्रेशित का नगर। बाद में अन-नबी बोलना कम होगया, सिर्फ मदीना कहलाने लगा। मदीना क मतलब "शहर" है। F. A. Shamsi, "The Date of Hijrah", Islamic Studies 23 (1984): 189-224, 289-323 (JSTOR link 1 https://web.archive.org/web/20160304090126/http://www.jstor.org/stable/20847270 4 मार्च 2016 + JSTOR link 2 https://web.archive.org/web/20161226152008/http://www.jstor.org/stable/20847277 26 दिसंबर 2016 ). हिजरी और हिज्राह में अन्तर है, अक्सर यह दोनों शब्दों को लेकर एक ही शब्द समझ जाते हैम, जब कि ऐसा नहीं है, दोनों अलग अलग शब्द हैं। हिज्री इस्लामी कालदर्शक है, तो हिज्रत हज़रत मुहम्मद का मदीना को सफ़र करना है। पहली हिजरत मुसलमानों का पहला प्रवास 615 https://books.google.com/books?id=2pwuAh0ujPMC&pg=PA30 Muslim Travellers: Pilgrimage, Migration and the Religious Imagination Dale F. Eickelman University of California Press 1990 30 978-0-520-07252-7 https://books.google.com/books?id=KlNHBQAAQBAJ&pg=PA15 Theology of Migration in the Abrahamic Religions Elaine Padilla, Peter C. Phan (editors) Palgrave Macmillan 2014 15 978-1-137-00104-7 या रजब (सितंबर-अक्तूबर) 613Fazlur Rehman Shaikh (2001). Chronology of Prophetic Events. London: Ta-Ha Publishers Ltd. pp. 91 को हज़रत मुहम्मद ने अपने अनुयाइयों से कहा कि मक्का के लोग मुसलमानों को सताने लगे हैं, मक्का में दिन दूभर होगये हैं, इस लिये इथियोपिया के नेगस जो ईसाई धर्म का मानने वाला सच्चा ईसाई है, वह एकेश्वरोपासकों की क़द्र करता है, वहां चले जायें। तब अनुयाई अबिसीनिया गये। लैकिन मक्का वाले इथियोपिया के बादशाह के पास जाकर मुसलमानों को उनके हवाले करने को कहा। लैकिन राजा नहीं माना, और मुसलमानों को वहीं रहने की इजाज़त दे दी। https://books.google.com/books?id=61elBgAAQBAJ&pg=PA55 Islam, Christianity and the Mystic Journey: A Comparative Exploration Ian Richard Netton Edinburgh University Press 2011 55 978-0-7486-4082-9 अन्नबी मुहम्मद ﷺ की हिजरत (प्रवास) नगर मक्का था, 620 ई तीर्थयात्रा का मौसम था, मदीना से आये "बनू खज़्रज" के छ्ः लोगों से मुलाक़ात की, उन्हे इस्लाम के बारे में बताय और क़ुरान के चन्द आयात पढ़ कर सुनायाSell Edward Edward Sell (priest) The Life of Muhammadﷺ http://www.muhammadanism.org/Canon_Sell/muhammad/life_muhammad.pdf 19 January 2013 1913 The Christian Literary Society for India. Madras 70 https://web.archive.org/web/20131031202846/http://www.muhammadanism.org/Canon_Sell/muhammad/life_muhammad.pdf 31 अक्तूबर 2013 dead Holt P. M. P. M. Holt Lambton Ann K. S. Lewis Bernard Bernard Lewis The Cambridge History of Islam https://archive.org/details/cambridgehistory00holt_798 2000 कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस 978-0-521-21946-4 39 इन बातों से खुश होकर उन्होंने इस्लाम क़बूल किया।Shibli Nomani. Sirat-un-Nabi. Vol 1. Lahore. और 621 ई मे, उन में से पाँच लोग अपने साथ सात लोगों को लाये। यह बारह ने हज़रत मुहम्मद को बताया कि शहर मदीना में इसलाम फैल रहा है, और प्रतिग्या की कि वह मुहम्मद को प्रेशित मानते हैं, तोहीद पर विश्वास लाते है, और बुराइयाँ जैसे चोरी, व्यभिचार और क़त्ल से दूर रहेंगे। इस प्रतिग्या को "अक़बा का पहला प्रतिग्या" कहते हैं।Khan (1980), p.70.Holt, Lambton, and Lewis (2000), p. 40.Sell (1913), p. 71. इन की दरख़्वास्त पर हज़रत मुहम्मद ﷺ ने "मुसाब इब्न उमैर" को मदीना भेजा कि मदीने वालों को इसलाम का पाठ पढायें। मदीना में लोग इसलाम के छाते तले आये। अगले साल 622 ई के तीर्थयात्रा में, मदीना से बनू आस और खजरज जाती के ७५ मुसलमान मक्का आए और हज़रत मुहम्मद ﷺ को अपना साथ दिया, और मदीना आने पर सम्पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। मदीना के विभिन्न जातियों के दरमियान झगड़ों को दूर करने के लिये दूत के रूप आने का निमन्त्रण भी दिया। Hitti Philip Khuri Philip Khuri Hitti History of the Arabs 1946 Macmillan and Co. London 116 इस को अल-अक़बह का अहद कहते हैं Holt, et al (2000), p. 40.Khan (1980), p. 73. यह एक राजनीती व धार्मिक कामियाबी थी जो नबी को और उनके अनुयाइयों को मदीना हिजरत करने का मौका मिला। Sell (1913), p. 76. इन अहदों के बाद, मुहम्मद ने अपने अनुयायियों को प्रोत्साहित किया कि वह मदीना जाएँ, और दो महीनों के अन्तर में सारे मुसलमान मक्का से मदीना जाएँ। हिजरत की काल पट्टी मुसल्मानों का नया साल या इस्लामी कैलेंडर जिसे "हिजरी तकवीम" भी कहते है, इसको हजरत उमर ने 638 or 17 AH में शुरू किया। यह हिज्री शका माना जाने लगा। नीचे दिये गए काल पट्टी में, हजरत मुहम्मद की जीवन काल के हिजरत के बारे में फजलुर्रह्मान शेख और एफ ए शम्सी ने लिखा है। दिन जूलियन और इस्लामी तिथियां रचना एफ़.ऍ.षम्सी जूलियन और इस्लामी तिथियां रचना फ़ज़्लुर रह्मान शेख घटनादिन 1गुरुवार9 सितंबर 62226 सफ़र, हि 117 जून 622 1 रबीउल अव्वल, हि 1क़ुरैश नायकों का कान्फ़रेन्स और मुहम्मद साहब का मक्काह से विदा होनादिन् 5 सोमवार13 सितंबर1 रबीअल अव्वल21 जून 5 रबीउल अव्वलसौर गुफा से निकलना 12Monday20 सितंबर 8 रबीउल् अव्वल28 जून 12 रबीउल अव्वल कुबा में पहुन्चना दिन 16शुक्रवार24 सितंबर12 रबीअल अव्वल 2 जूलै16 रबीअल अव्वलयस्रिब (मदीना) में प्रवेशदिन 26सोमवार4 अक्तूबर22 रबीअल अव्वल अंतिमतः मदीना में क़याम यह भी देखिए बद्र की लड़ाई सीरत उन-नबी सन्दर्भ 30em बाहरी कड़ियाँ Incident of the cave IslamiCity.com article on the Hijrah Articles, audios on the Hijrah श्रेणी:इस्लाम श्रेणी:मुहम्मद