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पारम्परिक थाई मालिश
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thumb|थाई मालिश
पारम्परिक थाई मालिश, जिसे थाई योग मालिश के नाम से भी जाना जाता है, केवल शरीर को विश्राम देने की विधि नहीं, बल्कि एक समृद्ध और प्राचीन उपचार परंपरा का जीवंत स्वरूप है। इस पद्धति में एक्यूप्रेशर, भारतीय आयुर्वेद के गूढ़ सिद्धांतों तथा योगासन की संतुलित तकनीकों का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।A comparative study of Thai massage and Swedish massage relative to physiological and psychological measures जर्नल ऑफ बॉडीवर्क एंड मूवमेंट थेरेपीज़ 10 4 266–275 10.1016/j.jbmt.2005.08.006 2006 कोवेन वर्जीनिया एस. बर्केट ली ब्रेडिमस जोशुआ इवांस डैनियल आर. लैमी सैंड्रा न्यूहाउसर थेरेसा शोजई लॉडन थाई भाषा में इसे प्रायः “नुआत फेन थाई” (นวดแผนไทย), अर्थात ‘थाई शैली की मालिश’, या “नुआत फेन बोरान” (นวดแผนโบราณ), अर्थात ‘प्राचीन शैली की मालिश’ कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक थाई चिकित्सा व्यवसाय अधिनियम, बीई 2556 (2013) के अनुसार इसका औपचारिक नाम “नुआत थाई” (นวดไทย) निर्धारित किया गया है,Traditional Thai Medical Professions Act, BE 2556 (2013). जो इसकी सांस्कृतिक और विधिक मान्यता को भी दर्शाता है।
यह चिकित्सा पद्धति केवल शारीरिक उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का एक समग्र प्रयास है। इसकी जड़ें सदियों पुरानी परंपराओं में गहराई तक समाई हुई हैं, जहाँ स्पर्श, ऊर्जा और संतुलन के माध्यम से स्वास्थ्य की पुनर्स्थापना की जाती है। इसी सांस्कृतिक और चिकित्सीय महत्त्व को मान्यता देते हुए, दिसंबर 2019 में यूनेस्को ने पारंपरिक थाई मालिश को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में सम्मिलित किया,Nuad Thai, traditional Thai massage https://ich.unesco.org/en/RL/nuad-thai-traditional-thai-massage-01384 यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संयुक्त राष्ट्र 13 दिसंबर 2019विपतायोतिन अपिन्या Unesco lists Nuad Thai as an 'intangible cultural heritage' https://www.bangkokpost.com/thailand/general/1815379/unesco-lists-nuad-thai-as-an-intangible-cultural-heritage#cxrecs_s 13 दिसंबर 2019 Bangkok Post 13 दिसंबर 2019Unesco heritage: Traditional Thai massage added to 'cultural heritage' list https://www.bbc.com/news/world-asia-50770641 13 दिसंबर 2019 बीबीसी न्यूज़ 13 दिसंबर 2019 जो इस अद्वितीय परंपरा के वैश्विक महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
अभ्यास
thumb|थाई मसाज मुद्रा
पारंपरिक थाई मालिश का अभ्यास एक विशिष्ट और सुव्यवस्थित पद्धति पर आधारित है, जिसमें “सेन” नामक ऊर्जा रेखाओं के साथ गहन और सटीक दाब-प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में भारतीय आयुर्वेद के सिद्धांतों और योगासन की लयात्मक गतियों का समन्वय स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। सामान्यतः इस उपचार में तेल या लोशन का उपयोग नहीं किया जाता, और इसे ग्रहण करने वाला व्यक्ति हल्के एवं ढीले वस्त्र धारण करता है, जिससे शरीर की स्वाभाविक गति बनी रहे।
इस पद्धति की एक प्रमुख विशेषता है—चिकित्सक और प्राप्तकर्ता के बीच निरंतर शारीरिक संपर्क। यहाँ केवल मांसपेशियों को रगड़ने तक सीमित न रहकर, शरीर को संतुलित ढंग से दबाया, खींचा, फैलाया और हल्के रूप से संचालित किया जाता है,A concise description of traditional Thai massage (Nuad Thai / Nuad Boran) https://thaihealingalliance.com/about-thai-massage-2/ 13 जून 2015 थाई हीलिंग एलायंस इंटरनेशनल जिससे ऊर्जा का प्रवाह सहज रूप से सक्रिय हो सके। यह प्रक्रिया शरीर को लचीला बनाते हुए भीतर छिपे तनाव को मुक्त करती है।
थाई मालिश केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव भी है। इसमें बौद्ध शिक्षाओं पर आधारित “मेट्टा” अर्थात् प्रेम और करुणा की भावना को अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। अनुभवी चिकित्सकों के अनुसार, इस अभ्यास की वास्तविक प्रभावशीलता तभी प्रकट होती है जब चिकित्सक स्वयं ध्यानमग्न होकर पूर्ण एकाग्रता और करुणा के भाव के साथ उपचार प्रदान करता है।चो काम थाई Advanced Thai Yoga Massage: Postures and Energy Pathways for Healing हीलिंग आर्ट्स प्रेस 2011 978-1-59477-952-7 वरमोंट यही तत्व इस प्राचीन विधा को साधारण मालिश से अलग, एक गहन और समग्र उपचार कला के रूप में स्थापित करता है।
इतिहास
thumb|left|बैंकॉक के फ्रा नाखोन जिले में स्थित वाट फो मंदिर में सेन रेखाओं पर एक्यूप्रेशर बिंदुओं के चित्र।
थाई मालिश, ठीक थाई पारंपरिक चिकित्सा की भाँति, भारतीय तथा दक्षिण-पूर्व एशियाई चिकित्सा परंपराओं के गहन प्रभावों का एक संतुलित और समन्वित रूप है। आज जिस रूप में इसका अभ्यास किया जाता है, वह संभवतः उन्नीसवीं शताब्दी में विभिन्न उपचार पद्धतियों के संगठित संश्लेषण का परिणाम है, जब पूरे राज्य में प्रचलित विविध परंपराओं को एक सुव्यवस्थित ढाँचे में रूपांतरित किया गया।साल्गुएरो पियर्स Traditional Thai Medicine: Buddhism, Animism, Ayurveda https://archive.org/details/traditionalthaim0000salg होहम प्रेस 2007 978-1890772673 फॉरेस, स्कॉटलैंड
इतिहास की दृष्टि से, सुखोथाई काल में वाट पा मामुआंग के पत्थर के शिलालेखों में थाई मालिश का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जहाँ रोगों के उपचार हेतु मालिश के प्रयोग का वर्णन किया गया है। इसके उपरांत अयुत्थाया काल में इस परंपरा को संस्थागत स्वरूप प्राप्त हुआ—पारंपरिक मालिश विभाग की स्थापना की गई और चिकित्सकों को उनकी विशिष्ट विशेषज्ञता के आधार पर वर्गीकृत किया गया। यह दर्शाता है कि यह विधा केवल लोक-परंपरा तक सीमित न रहकर एक सुविचारित और संगठित चिकित्सा प्रणाली के रूप में विकसित हुई।
इस प्राचीन परंपरा के आध्यात्मिक आधार के रूप में जीवक कोमारभच्च का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। पाली बौद्ध ग्रंथों के अनुसार वे लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध के चिकित्सक थे। प्राचीन साहित्य में उनके असाधारण चिकित्सकीय कौशल, औषधीय वनस्पतियों के गहन ज्ञान तथा अपने समय के महत्वपूर्ण व्यक्तियों—यहाँ तक कि स्वयं बुद्ध—के उपचार में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका का विस्तार से वर्णन मिलता है।Origin and evolution of traditional Thai massage https://thaihealingalliance.com/wp-content/uploads/An-Overview-of-Traditional-Thai-Massage.pdf थाई हीलिंग एलायंस इंटरनेशनल 13 जून 2015उल्यानोव यूरी 2022-05-02 History of Thai Massage: A Journey Through Healing Therapy https://www.thai-massage-school.org/post/history-of-thai-massage-a-journey-through-healing-therapy 2023-09-25 Школа Юрия Ульянова en इस प्रकार, जीवक कोमारभच्च को न केवल एक महान वैद्य, बल्कि इस संपूर्ण चिकित्सा परंपरा के प्रेरणास्रोत और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में देखा जाता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:हस्त चिकित्सा
श्रेणी:पारम्परिक चिकित्सा