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411 समाचार
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तारा तारिणी मंदिर

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पूर्णेश्वरी माँ तारा तारिणी , भारत के पूर्वीय राज्य‌ ओड़िशा के ब्रह्मपुर शहर से ३० km दूर ऋषिकुल्या‌ नदी के किनारे रहे पुण्यगिरी पहाड़ ( रत्नागिरी / तारिणी पर्बत/ कुमारी पहाड़) के ऊपर स्थित माँ का प्रसिद्ध शक्ति पीठ है। यह जागृत शक्ति पीठ भारत के ५२ शक्ति पीठों से एक है और यहाँ सती के स्थन गिरने का दावा किया जाता है। यहाँ माँ तारा और माँ तारिणी को आदि शक्ति के रूप में पूजा जाता है। भारत में रहे हुए ५२ शक्ति पीठों से ४ को तंत्र पीठ की मान्यता दी‌ गई है। माँ तारा तारिणी इन्हीं ४ तंत्र पीठों में से एक हैं। देवी भागवत के अनुसार श्रीहरि विष्णु के अनुरोध पर शनि देवी के शरीर में प्रवेश किए और शरीर को १०८ भाग में विभक्त कर दिया। और उनमें से ५२ भाग मुख्य पीठ के रूप में उभरे। हेवज्र तंत्र के अनुसार प्रसिद्ध तांत्रिक ग्रंथ हेवज्र तंत्र के अनुसार; तत्कालीन पश्चिमी भारत (अब पाकिस्तान) स्वात घाटी में {उद्रंख्य}, पंजाब उत्तर भारत में {जालंधर}, असम पूर्वी भारतीय में {कामरूप} और दक्षिणी भारत में स्थान कुंड के साथ पूर्णागिरी पहाड़ियों पर पूर्णेश्वरी माँ तारा तारिणी (तत्कालीन कलिंग और अब दक्षिण ओडिशा में) 4 प्रमुख तंत्र पीठ हैं। करिबन 2000 साल पहले रचिगई यह प्राचीन तंत्र में इन पीठ के लिए एक श्लोक भी समर्पित है। तारातारिणी शक्तिपीठ एक ऐतिहासिक परिचय: राम प्रसाद त्रिपाठी पौराणिक ग्रंथों के अनुसार; चार प्रमुख शक्ति पीठ जो तंत्र पीठ का मन्यता रखे है वो इसी प्रकार रहे। ओडिशा, ब्रह्मपुर में माँ तारा तारिणी पीठ(स्थन), पूरी जगन्नाथ मंदिर के परिसर में रहे बिमला (पाद), गुवाहाटी का कमक्षया पीठ (जोनि पीठ) और कोलकाता का दक्षिण कालिका (मुख खंड/पैर की अंगुली)। कालिका पुराण भी इस तथ्य को मान्यता देता है और इसमें वर्णित एक श्लोक में कहा गया है: बिमल़ा पादखंडनच स्तनखंडनच तारिणी (तारा तारिणी) कामाख्या योनिखंडनच मुखखंडनच कालिका अंग प्रत्यंग संगेन विष्णुचक्र क्षेतेन्यच’' उन चार शक्तिपीठों में विमला में पादखंड, तारा तारिणी में स्तनखंड, कामाख्या में योनिखंड और दक्षिण कालि में मुख खंड पड़ने के कारण चारों पीठों को मुख्य शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है। तारातारिणी शक्तिपीठ एक ऐतिहासिक परिचय: राम प्रसाद त्रिपाठी == तारा तारिणी शक्ति पीठ और तंत्र पीठ == पुराणों में वर्णित‌ सभी शक्ति पीठों भारत में शक्ति पासना का शुरुआत किया था। उसी सभी ५१/ ५२ शक्ति पीठों से ४ मुख्य पीठ को आदि शक्ति पीठ भी कहा जाता है। यहाँ माँ तारा और माँ तारिणी को आदि शक्ति के रूप में पूजा जाता है। अति प्राचीन काल से तारा तारिणी एक प्रचंड तंत्र पीठ रहा हैं। किसी भी काम को सिद्ध करने के लिए भक्त इसी पीठ में आते हैं । महात्मा वशिष्ठ के समय से मान्यता हैं कि तांत्रिक मंत्र के जाप करने से यहां सभी सिद्धि प्राप्त कि जा सकती है। == स्थान == मंदिर 19°29 'N 84°53' E. के स्थान पर रहे है और यहाँ ऋषिकुल्या नदी प्रबाहित है। ऋषिकुल्या कु भारत का महान नदी गंगा की भग्नि माना जाता है। यहाँ आने के लिए ज्तिया राजप्था के साथ साथ उनके निकटतम रेल स्टेसन ब्रह्मपुर और निकततम हवाई अड्डे भुवनेश्वर में उपलब्ध। == देवताओं == देवी तारा और तारिणी को प्रतिनिधित्व कर रहे हैं दो प्राचीन पत्थर की मूर्तियों। दोनों मूर्तियाँ सोने और चांदी के गहने.के साथ रहे है। दोनों मूर्तियों के बीच दो पीतल सिर रखा हुआ है , जिसे देबी जिबंट प्रतिमा कहा जाता है। जागृत शक्ति पीठ होने की है मान्यता। == इतिहास == जाति, वर्ण, धर्म से ऊपर कोई भी भक्त देवी के दर्शन सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक कर सकता है। यहां के मुख्य पर्वों में चत्र पर्व प्रधान है। हिन्दू कलेन्डर के चैत्र महीना जो मार्च एवं अप्रैल में आता है। उस महीने को बड़ा पवित्र माना जाता है। भक्तों का मानना है कि इस महीने के प्रत्येक मंगलवार को देवी के दर्शन करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं तथा आकांक्षाएं पूरी होती हैं। इसलिए मंगलवार को कम से कम 3 से 4 लाख श्रद्धालु भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं। इसी महीने के अंदर लाखों बच्चों का मुंडन भी करवाया जाता है। ये मान्यता है कि नवजात बच्चों का 1 साल पूरा होने के बाद यहां पर प्रथम मुण्डन करवाने से आयु, आरोग्य, अईसूर्य तथा बुद्धि मिलती है। इसके अतिरिक्त नवरात्र, दशहरा, साल के सभी मंगलवार, सक्रांति मुख्यपर्व के रूप में यहां पर मनाया जाता है। पहुुंचने की व्यवस्था ब्रह्मपुर शहर से यह जगह 30 कि.मी. की दूरी पर है। ब्रह्मपुर जो उड़ीसा का एक मुख्य शहरों है वो कोलकाता से चेन्नई जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 5, रायपुर से ब्रह्मपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 217, कोलकाता से चेन्नई मुख्य रेलवे स्टेशन से संयुक्त है। इसको छोड़कर आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल से अच्छी सड़कों की व्यवस्था ब्रह्मपुर तक है। एक प्रमुख स्टेशन होने के कारण भारत के सभी बड़े शहर और मेट्रो को टेªन से आने-जाने की व्यवस्था उपलब्ध है। ब्रह्मपुर पहुंचने के बाद टैक्सी, आॅटो एवं बस से इस जगह तक पहुुंचा जा सकता है। भुवनेश्वर, विशाखापटनम और पुरी से भी टैक्सी सेवा उपलब्ध है। भुवनेश्वर 170 कि.मी. और विशखापटनम 250 कि.मी. नजदीकी हवाईअड्डे है। व्यक्तिगत हैलीकोप्टर और चार्टर फ्लाईट उतरने की व्यवस्था ब्रह्मपुर हवाईअड्डे में उपलब्ध है। रहने की व्यवस्था तारातारीणी के पास रहने के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था नहीं है। फिर भी दिगंत, आई.बी. और उड़ीसा पर्यटन विभाग का अतिथि भवन पर्वत के नीचे उपलब्ध है। इस जगह से 25 कि.मी. की दूरी पर ब्रह्मपुर और 35 कि.मी. की दूरी पर गोपालपुर- अन- सी (जो की एक प्रसिद्ध समुद्र तटीय शहर है) वहां सभी वर्ग के यात्रियों के लिए ठहरने की तथा खाने पीने की भी व्यवस्था उपलब्ध है। प्राचीन शक्तिपीठ तारातारीणी के पास गोपालपुर (35 कि.मी.), तप्तपाणी 79 कि.मी., भैरवी 40 कि.मी., मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेख जउगढ़ 4 कि.मी. तथा एशिया की सबसे बड़ी झील चिलका 40 कि.मी. इत्यादि मुख्य प्रयटन स्थल हैं। == सन्दर्भ == तारातारिणी शक्तिपीठ एक ऐतिहासिक परिचय: राम प्रसाद त्रिपाठी == इन्हें भी देखें == शक्तिपीठ == बाहरी कड़ियाँ == तारातारिणी शक्तिपीठ :- उड़ीसा का प्रमुख हिन्दू देवस्थान