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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

टंट्या भील

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मामा टंट्या भील टंट्या Tantia bhil dacoit.jpg The Tribes and Castes of the Central Provinces of India (1916) में किये गए चित्रण में टंट्या मामा 26 जनवरी 1842 पंधाना, मध्य प्रदेश, भारत 4 दिसंबर 1889 जबलपुर, मध्य प्रदेश, भारत फांसी पातालपानी, मध्य प्रदेश 'रॉबिनहुड ऑफ इंडिया' (द न्यूयॉर्क टाइम्स दिनांक १० नवंबर १८८९ को प्रकाशित खबर अनुसार), आदिवासियों का मसीहा, महा विद्रोही, मालिक। शिक्षा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है किंतु टंट्या भील पाड़ा -वाडा़-दुडा-कोयामुरी-पेनकडा़-थाना-वाना-गावठाण-कूडा़ यानी पारंपरिक रूढ़िवादी ग्राम सभा का प्रतिनिधित्व करते थे और अंग्रेजी सहित कई भाषाएं जानते थे। किशन जीवनी भावसिंह टंट्या भील (टंट्या या टंट्या मामा) का जन्म 26 जनवरी 1842 को हुआ था जिसका उल्लेख मराठी, गोंडी, भिल्ली एवं उन्य आदिवासी बोली भाषाओं के लोक गितो में उनके जन्म से संबंधित उल्लेख मिलते हैं। 26 जनवरी 1842 – 4 दिसंबर 1889) 1878 और 1889 के बीच भारत में सक्रिय एक क्रान्तिकारी थे। द न्यूयॉर्क टाइम्स मे 10 नवंबर 1889 में प्रकाशित खबर में टंट्या भील को 'रॉबिनहुड ऑफ इंडिया' की पदवी से नवाजा गया था ।वे भारतीय "रॉबिन हुड" के रूप में ख्‍यात हैं। जान हेन्ड्राप ने उन्हें लिविंग गाड याने जींदा भगवान कहा, उन्हें (गाड आफ जस्टिस आफ द वर्ल्ड)विश्व न्याय के देवता कहा जाता है । टंट्या भील आदिवासी समुदाय के सदस्य थे उनका वास्तविक नाम टंड्रा था, उनसे सरकारी अफसर या धनिक लोग ही भयभीत थे, आम जनता उसे 'टंटिया मामा' कहकर उसका आदर करती थी । टंट्या भील का जन्म मध्‍य प्रदेश के खंडवा जिले की पंधाना तहसील के ग्राम बड़दा (बिरडा) में 26 जनवरी 1842 को हुआ था।बी.एस. फारसिया Bharat Mein Svatantrata Tatha Lokatantraatmak Ganarajy Ka Uday बुक्सक्लिनिक पब्लिशिंग https://www.google.co.in/books/edition/Bharat_Mein_Svatantrata_Tatha_Lokatantra/tiM6EAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%9F%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%AD%E0%A5%80%E0%A4%B2+%E0%A4%95%E0%A4%BE+%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AE&pg=PA86&printsec=frontcover 27 जुलाई 2021 एक नए शोध के अनुसार उन्होंने 1857 में हुए पहले स्‍वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों द्वारा किये गए दमन के बाद अपने जीवन के तरीके को अपनायाRamaṇikā Guptā; Anup Beniwal (1 January 2007). Tribal Contemporary Issues: Appraisal and Intervention. Concept Publishing Company. pp. 18–. ISBN 978-81-8069-475-2. । टंट्या को पहली बार 1874 के आसपास "खराब आजीविका" के लिए गिरफ्तार किया गया था। एक साल की सजा काटने के बाद उनके जुर्म को चोरी और अपहरण के गंभीर अपराधों में बदल दिया गया। सन 1878 में दूसरी बार उन्‍हें हाजी नसरुल्ला खान यूसुफजई द्वारा गिरफ्तार किया गया था। मात्र तीन दिनों बाद वे खंडवा जेल से भाग गए और एक विद्रोही के रूप में शेष जीवन जियाCentral Provinces (India) (1908). Nimar. Printed at the Pioneer Press. pp. 45। इंदौर की सेना के एक अधिकारी ने टंट्या को क्षमा करने का वादा किया था, लेकिन घात लगाकर उन्‍हें जबलपुर ले जाया गया, जहाँ उन पर मुकदमा चलाया गया और 4 दिसंबर 1889 को उसे फाँसी दे दी गई। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश देवडे़ बिरसावादी के अनुसार- "शुरुआत में टंट्या भील के विद्रोही प्रवृत्ति को उनके परिवार समाज और राष्ट्र पर हुए अन्याय और अत्याचार को जोड़कर देखा गया । उन्हें डकैत लुटेरा इस प्रकार की उपाधि सामंतवादी जमीदारों द्वारा दी गई क्योंकि यह लोग टंट्या के खिलाफ अंग्रेजी हुकूमत की पुलिस की मदद मांगना चाहते थे इसलिए टंट्या भील को आरोपित किया गया । टंट्या भील का परिवार भी इस अन्याय और शोषण का शिकार हुआ थ। टंट्या भील वंशज परिवार आज मजदूर का जीवन जी रहे हनकी सरकार की सभी योजनाओं से वंचित है ग्राम कोठड़ा तहसील झिरनिया जिन खरगोन है एवं जमीदार पाटिल के पास गिरवी थी जिसका जबरन कब्जा कर ब्याज के रूप में वसूली जैसी बातों ने मानो गरीब किसानों, आदिवासियों के परिवार को नेस्तनाबूद कर दिया। वह निरंतर श्रम करने के बावजूद भी पेट भर खाना नहीं खा सकते थे ऐसी स्थिति में महाविद्रोही टंट्या भील का निर्माण हुआ था।" अन्य महत्वपूर्ण एकलव्य तांतिया भील मंदिर राणा पूंजा राजा मांडलिक राजा धन्ना भील राजा कोटिया भील राजा बांसिया भील राजा डुंगरीया भील मनसुख भाई वसावा दिवालीबेन भील कृशण भिल रेन्गू कोरकू बाहरी कड़ियाँ आदिवासियों का रॉबिनहुड था टंट्या भील आदिवासियों के लिए देवता है आजादी के सेनानी टंट्या भीलदिसंबर 2021 InternetArchiveBot एक अनपढ़ आदिवासी ने नींद उड़ा दी थी अंग्रेज सरकार की क्रांतिकारी योद्धा टंट्या भील (टंट्या मामा) https://web.archive.org/web/20230528070941/https://www.niharikatimes.com/tantia-bhil/ 28 मई 2023 टंट्या (गूगल पुस्तक (उपन्यास); लेखक - बाबा भांड] श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी