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बोक ग्लोब्यूल
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बोक ग्लोब्यूल (Bok globule) खगोल विज्ञान में ब्रह्मांडीय धूल और गैस के अत्यधिक घने, ठंडे और अलग-थलग पड़े बादलों को कहा जाता है। ये मुख्य रूप से एक प्रकार की 'श्याम नीहारिका' होते हैं। इन बादलों का घनत्व इतना अधिक होता है कि ये अपने पीछे स्थित पृष्ठभूमि के तारों या अन्य चमकदार नीहारिकाओं से आने वाले 'दृश्य प्रकाश' को पूरी तरह से सोख या रोक लेते हैं, जिससे ये अंतरिक्ष में एक काले धब्बे या छेद की तरह दिखाई देते हैं। बोक ग्लोब्यूल ब्रह्मांड में तारों के निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण और सक्रिय क्षेत्रों में से एक माने जाते हैं।Bok Bart J. Reilly Edith F. Small Dark Nebulae Astrophysical Journal 1947 105 255 10.1086/144901
खोज और नामकरण
इन रहस्यमय अंधेरे बादलों की पहचान पहली बार 1940 के दशक में डच-अमेरिकी खगोलशास्त्री बार्ट बोक और उनकी सहयोगी एडिथ रेली ने की थी।
1947 में प्रकाशित अपने शोध पत्र में, बार्ट बोक ने यह परिकल्पना प्रस्तुत की कि ये छोटे और घने बादल वास्तव में "तारों के कोकून" हैं जो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में सिकुड़ रहे हैं। उन्होंने भविष्यवाणी की कि इन बादलों के भीतर गैस और धूल जमा होकर अंततः नए तारों और तारा प्रणालियों का निर्माण करेंगे। उस समय इस सिद्धांत को सिद्ध करना बहुत मुश्किल था क्योंकि ये बादल दृश्य प्रकाश को पार नहीं होने देते थे, लेकिन 1990 के दशक में इन्फ्रारेड टेलीस्कोप के विकास के बाद बोक की यह परिकल्पना पूरी तरह से सच साबित हुई।Launhardt Ralf Sargent A. I. Dust and Gas in Active and Quiescent Bok Globules Astronomy and Astrophysics 382 3 2002 1039-1051"Star formation in small globules – Bart Bok was correct"
भौतिक विशेषताएँ और संरचना
बोक ग्लोब्यूल आमतौर पर विशाल 'आणविक बादलों' के बाहरी किनारों पर या एच II क्षेत्रों के पास पाए जाते हैं।
द्रव्यमान और आकार: एक ठेठ बोक ग्लोब्यूल का द्रव्यमान हमारे सूर्य से 2 से 50 गुना तक हो सकता है। इनका आकार अंतरिक्ष में लगभग 1 प्रकाश-वर्ष के व्यास के बराबर होता है।
तापमान: ये ब्रह्मांड के सबसे ठंडे स्थानों में से एक हैं। इनका आंतरिक तापमान 3 से 15 केल्विन (लगभग -270 °C) तक गिर सकता है।
रासायनिक संरचना: ये मुख्य रूप से ठंडी 'आणविक हाइड्रोजन', हीलियम गैस, और कार्बन मोनोऑक्साइड से बने होते हैं। इनमें भारी मात्रा में सिलिकेट धूल के कण होते हैं, जो प्रकाश को रोकने का मुख्य कारण हैं।Stahler Steven W. Palla Francesco The Formation of Stars Wiley-VCH 2004 978-3527405596 210-215
तारों का जन्म
बोक ग्लोब्यूल के भीतर का अत्यधिक कम तापमान और उच्च घनत्व 'गुरुत्वाकर्षण पतन' के लिए आदर्श परिस्थितियाँ पैदा करता है।
जब ग्लोब्यूल के भीतर की ठंडी गैस अपने ही भारी गुरुत्वाकर्षण के कारण सिकुड़ने लगती है, तो उसके केंद्र में दबाव और तापमान बढ़ने लगता है। यह प्रक्रिया लाखों वर्षों तक चलती है और अंततः एक आदि-तारे को जन्म देती है। जब इस आदि-तारे का केंद्र इतना गर्म हो जाता है कि नाभिकीय संलयन शुरू हो सके, तो एक नया तारा (अक्सर एक से अधिक तारों की प्रणाली) पैदा होता है। नए तारे के जन्म के बाद उसका शक्तिशाली विकिरण बचे हुए गैस और धूल के बादल को उड़ा देता है।Yun João Lin Clemens Dan P. Star formation in small globules - Bart Bok was right The Astrophysical Journal Letters 365 1990 L73-L76 10.1086/185891globules. 1 Formation, evolution and morphology
प्रमुख खगोलीय उदाहरण
बर्नार्ड 68: यह ओफ़ियुकस तारामंडल में स्थित सबसे प्रसिद्ध और अच्छी तरह से अध्ययन किया गया बोक ग्लोब्यूल है। यह पृथ्वी से लगभग 500 प्रकाश-वर्ष दूर है।
थैकरे ग्लोब्यूल: यह 'IC 2944' नामक नीहारिका में स्थित बोक ग्लोब्यूल्स का एक अत्यंत ही प्रसिद्ध समूह है, जिसकी तस्वीरें हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा खींची गई हैं।https://science.nasa.gov/ Hubble Views of Bok Globules NASA Science 25 जून 2026
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
नासा (NASA) - नीहारिकाएँ और तारों का निर्माण
श्रेणी:नीहारिकाएँ
श्रेणी:खगोल विज्ञान