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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ारसी भाषा

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भारतीय फ़ारसी fa فارسیِ هندی fa fɑːɾˈsiː e hɪndi भारतीय उपमहाद्वीप Indo-European हिन्द-ईरानी भाषाएँ ईरानी भाषाएँ पश्चिमी ईरानी भाषाएँ दक्षिण-पश्चिमी ईरानी भाषाएँ फ़ारसी भाषा पुरानी फ़ारसी मध्य फ़ारसी प्रारम्भिक नयी फ़ारसी शास्त्रीय फ़ारसी बंगाल की फ़ारसी दक्खिनी फ़ारसी उत्तर भारतीय फ़ारसी कश्मीरी फ़ारसी पंजाबी फ़ारसी फ़ारसी लिपि dialect fa-034 अंगूठाकार| फ़रहंग-ए-जहाँगीर का एक पृष्ठ — मुग़ल सम्राट अकबर और जहाँगीर के काल में संकलित एक स्मारकीय शब्दकोश।https://iranicaonline.org/articles/india-xiv-persian-literature-in-india INDIA xiv. Persian Literature Casari Mario Encyclopaedia Iranica १०वीं से १९वीं शताब्दी के मध्य, भारतीय शब्दकोश‑परम्परा ने निरन्तर ईरान को पीछे छोड़ दिया। ब्रिटिश राज के पहले, फ़ारसी भाषा भारतीय उपमहाद्वीप की सम्पर्क भाषा थी और उत्तरी भारत में व्यापक रूप से प्रयुक्त राजकीय भाषा के रूप में प्रतिष्ठित थी। यह भाषा दक्षिण एशिया में विविध तुर्को–फ़ारसी और अफ़ग़ान सल्तनतों के माध्यम से आयी और ११वीं शताब्दी से स्थानीय भारतीय राजवंशों, जैसे सैय्यद वंश, तुग़लक़ वंश, ख़िलजी वंश, मुग़ल साम्राज्य, गुजरात सल्तनत और बंगाल सल्तनत, द्वारा संरक्षित और आश्रित की गयी। प्रारम्भ में यह भारत की मुस्लिम सल्तनतों द्वारा प्रयुक्त थी, किन्तु कालान्तर में अनेक ग़ैर मुस्लिम राजसत्ताओं ने भी इसे राजभाषा और प्रशासनिक भाषा के रूप में अपनाया। उदाहरणार्थ, सिख साम्राज्य में दरबार और प्रशासन में फ़ारसी को आधिकारिक प्रतिष्ठा प्राप्त थी। उपमहाद्वीप में राजनीति, साहित्य, शिक्षा तथा सामाजिक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में फ़ारसी ने संस्कृत का स्थान ले लिया। फ़ारसी का प्रसार भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लाम के राजनीतिक और धार्मिक विस्तार के साथ-साथ हुआ। तथापि, ऐतिहासिक दृष्टि से फ़ारसी ने एक ऐसी अ-सम्प्रदायिक, सर्वसमावेशी भाषा की भूमिका निभायी, जिसने उपमहाद्वीप के विविध समुदायों को एक साझा सांस्कृतिक धारा में जोड़ा। इसने एक व्यापक फ़ारसी पहचान के निर्माण में भी योगदान दिया, जिसके माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप ‘ईरान-ए-बज़ुर्ग’ अथवा ‘अजम’ की अन्तरराष्ट्रीय सांस्कृतिक परम्परा से जुड़ गया।Alam 2003 134 & 188 उपमहाद्वीप में फ़ारसी की ऐतिहासिक भूमिका की तुलना आधुनिक काल में अंग्रेज़ी की भूमिका से भी की जाती है।Abidi Gargesh 2008 103 मुग़ल साम्राज्य के क्रमिक पतन के साथ फ़ारसी का प्रभाव क्षीण होने लगा। ब्रिटिश सत्ता के विस्तार के साथ हिन्दुस्तानी और अंग्रेज़ी ने फ़ारसी का स्थान लेना आरम्भ किया। १८३७ ईस्वी में ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने फ़ारसी को राजकीय भाषा के रूप में समाप्त कर दिया, और ब्रिटिश राज के समय इसका प्रशासनिक प्रयोग लगभग लुप्त हो गया। फ़ारसी की भाषिक विरासत आज भी भारतीय उपमहाद्वीप की हिन्द-आर्य भाषाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। हिन्दुस्तानी के निर्माण में इसका आधारभूत योगदान रहा, और पंजाबी, सिन्धी, बांग्ला, गुजराती तथा कश्मीरी पर इसका प्रभाव विशेष रूप से प्रबल रहा। मराठी, राजस्थानी और उड़िया जैसी भाषाओं में भी फ़ारसी से लिये गये शब्दों की उल्लेखनीय मात्रा पायी जाती है। अंगूठाकार|मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब के अधीन जारी एक फ़रमान, जो फ़ारसी में लिखा गया था। मुग़ल वित्त विभाग में कार्यरत हिन्दू इन दस्तावेज़ों को लिखने में उत्कृष्टता के लिए जाने जाते थे, जिनका उपयोग शैक्षणिक संस्थानों में उदाहरण के रूप में किया जाता था।Abidi Gargesh 2008 106 अंगूठाकार|सिख साम्राज्य के फ़ौज-ए-ख़ास के लिए लिखी गई फ़ारसी सैन्य नियमावली, लगभग १८३० अंगूठाकार|शराफ़-नामा पाण्डुलिपि जो बंगाल के सुल्तान नसीरुद्दीन नसरत शाह के स्वामित्व में थी। इसमें सिकन्दर को रानी नुशबाह के साथ अपना सिंहासन साझा करते हुए दिखाया गया है। बाएँ|अंगूठाकार|346x346पिक्सेल|दक्कन में निर्मित एक फ़ारसी कविता। १७वीं शताब्दी। उपमहाद्वीपीय भाषाओं पर प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग ८०० वर्षों तक एक प्रतिष्ठित भाषा और सम्पर्क भाषा के रूप में प्रतिष्ठित रहने के कारण, शास्त्रीय फ़ारसी ने अनेक भारतीय भाषाओं, यहाँ तक कि ग़ैर हिन्द-आर्य भाषाओं, पर भी व्यापक प्रभाव डाला। सामान्यतः देखा गया है कि यह प्रभाव उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने पर अधिक प्रबल होता जाता है, अर्थात् हिन्द-ईरानी सीमाक्षेत्र के निकट। उदाहरणार्थ, हिन्द-आर्य भाषाओं पर फ़ारसी का प्रभाव सर्वाधिक है, पंजाबी, सिन्धी, कश्मीरी और गुजराती में यह अत्यधिक रूप से विद्यमान है, जबकि बांग्ला और मराठी में इसका प्रभाव मध्यम स्तर पर है। हिन्द-आर्य भाषाओं में सबसे बड़ा विदेशी तत्व फ़ारसी ही है। इसके विपरीत, द्रविड़ भाषाओं पर फ़ारसी का प्रभाव अपेक्षाकृत अल्प रहा है। फिर भी, इन भाषाओं में फ़ारसी के अनेक शब्द मिलते हैं, कुछ प्रत्यक्ष रूप से और कुछ दक्कनी (हिन्दुस्तानी की दक्षिणी शैली) के माध्यम से, क्योंकि दक्कन के इस्लामी शासकों ने फ़ारसी परम्परा को संरक्षण दिया।https://iranicaonline.org/articles/india-xviii-persian-elements-in-indian-languages Persian Elements in Indian Language Shackle Christopher Encyclopaedia IranicaThe Dravidian Languages Krishnamurti Bhadriraju Cambridge University Press 2003 9781139435338 478 हिन्दुस्तानी इस भौगोलिक प्रवृत्ति का एक उल्लेखनीय अपवाद है। यह एक हिन्द-आर्य सम्पर्क भाषा है, जो हिन्दी-पट्टी और पाकिस्तान में व्यापक रूप से बोली जाती है। इसका आधार कौरवी बोली है, जिसमें फ़ारसी के तत्त्व गहराई से समाहित हैं।https://iranicaonline.org/articles/india-xviii-persian-elements-in-indian-languages Persian Elements in Indian Language Shackle Christopher Encyclopaedia Iranica इसके दो औपचारिक रूप हैं, फ़ारसीकृत उर्दू (जो फ़ारसी-अरबी लिपि में लिखी जाती है) और अपफ़ारसीकृत, संस्कृतनिष्ठ हिन्दी (जो देवनागरी में लिखी जाती है)। बोलचाल के रूप में भी हिन्दुस्तानी में फ़ारसी का प्रभाव सभी हिन्द-आर्य भाषाओं की तुलना में सर्वाधिक हैThe Indo-Aryan Languages https://archive.org/details/indoaryanlanguag0000masi Masica Colin P. Cambridge University Press 1991 0-521-23420-4 71–73। अनेक फ़ारसी शब्द इतने सामान्य हो चुके हैं कि हिन्दी और उर्दू बोलने वाले उन्हें विदेशी नहीं मानते। इसका कारण यह है कि हिन्दुस्तानी का उद्भव इस्लामी दरबारों के संरक्षण में फ़ारसीकरण की प्रक्रिया के साथ हुआ। उर्दू, जो हिन्दुस्तानी का फ़ारसी-प्रधान रूप है, में यह प्रभाव और भी गहरा है; यहाँ तक कि “मकानात बराए फ़रोख़्त” (ur مکانات برائے فروخت बिक्री के लिए मकान) जैसे पूर्ण फ़ारसी वाक्यांश भी स्वाभाविक रूप से प्रयुक्त होते हैं। उर्दू में नये शब्दों के निर्माण हेतु भी फ़ारसी की ओर देखा जाता है, विशेषतः पाकिस्तान में।https://iranicaonline.org/articles/urdu Urdu Matthews David Encyclopaedia Iranica इन कारणों से फ़ारसी की अनेक विशेषताएँ उपमहाद्वीपीय भाषाओं में साझा रूप से पायी जाती हैं, यद्यपि उनका स्वरूप भाषा-भाषा में भिन्न होता है। यह भी उल्लेखनीय है कि उपमहाद्वीप में भाषाराजनीति के कारण मुस्लिम समुदायों में फ़ारसी-तत्त्वों का प्रयोग और भी अधिक प्रबल दिखाई देता है।https://iranicaonline.org/articles/india-xviii-persian-elements-in-indian-languages Persian Elements in Indian Language Shackle Christopher Encyclopaedia Iranica शब्दावली यह खण्ड भारतीय भाषाओं की शब्द सम्पदा पर फ़ारसी के सामान्य प्रभाव से सम्बन्धित है। उधार शब्द फ़ारसी शासन, प्रशासन और नगर-जीवन के प्रारम्भिक सम्पर्क-स्थलों ने हिन्द-आर्य भाषाओं में सबसे पहले फ़ारसी शब्दों को प्रवेश कराया। प्रारम्भिक काल में ये शब्द आवश्यकता के कारण लिये गये, नये वस्तुओं, अवधारणाओं और प्रशासनिक ढाँचों को व्यक्त करने हेतु। परन्तु समय के साथ फ़ारसी शब्द व्यापक स्तर पर भारतीय भाषाओं में समाहित होने लगे। विद्वान कूच्केविच फ़्राश के अनुसार कवियों और सूफ़ियों ने इस प्रक्रिया को अत्यन्त गति दी, वे फ़ारसी और स्थानीय भाषाओं दोनों में दक्ष थे, जिससे दोनों के बीच सम्पर्क और शब्दों का प्रसार सहज हुआ। मुग़ल काल में फ़ारसी की प्रतिष्ठा बढ़ने पर फ़ारसी शब्दों का समावेश केवल आवश्यकता से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव के रूप में भी होने लगा।Kuczkiewicz-Fraś 2012 40-45 आज फ़ारसी के उधार-शब्द लगभग सभी क्षेत्रों में मिलते हैं, और इनमें संज्ञाएँ सर्वाधिक हैं। अनेक शब्द दैनिक बोलचाल में सामान्य रूप से प्रयुक्त होते हैं। इनके उच्चारण आधुनिक ईरानी फ़ारसी से भिन्न हो सकते हैं, क्योंकि भारतीय भाषाओं ने शास्त्रीय फ़ारसी के वे रूप ग्रहण किये जो उपमहाद्वीप में प्रचलित थे। स्थानीय भाषाओं में स्वदेशीकरण (नैटिवाइज़ेशन) के कारण भी उच्चारण में परिवर्तन आया। एक सामान्य परिवर्तन यह है कि फ़ारसी के हाए- mukhtafi का रूप लम्बे ‘आ’ में बदल गया, जैसे शास्त्रीय फ़ारसी ताज़ह → ताज़ा, और आइनह → आइना (आधुनिक ईरानी फ़ारसी में ताज़ेह और आइनेह)। ध्वन्यात्मक परिवर्तनों के अतिरिक्त, कुछ शब्द आधुनिक फ़ारसी में अर्थ-परिवर्तन या प्राचीनता के कारण अपरिचित प्रतीत हो सकते हैं।Abidi Gargesh 2008 118Kuczkiewicz-Fraś 2012 153-154The Indo-Aryan Languages https://archive.org/details/indoaryanlanguag0000masi Masica Colin P. Cambridge University Press 1991 0-521-23420-4 71–73 नीचे भारतीय भाषाओं में पायी जाने वाली फ़ारसी शब्दावली की एक वर्गीकृत सूची दी जा रही है। यह सूची पूर्ण नहीं है, केवल प्रतिनिधिक है। +ऋण‑श्रेणीउदाहरणसंज्ञाएँव्यक्तिनाममुस्लिम नाम: اختر (अख़्तर), نواز (नवाज़), آفتاب (आफ़ताब), دلشاد (दिलशाद), شاه بانو (शाह बानो), زرینہ (ज़रीना) ग़ैर‑मुस्लिम नाम: سکندر (सिकन्दर), بہادر (बहादुर), شاه (शाह), چمن (चमन), روشن (रोशन), زوراور (ज़ोरावर), سرکار (सरकार)उपाधियाँخان بہادر (ख़ान बहादुर), رائے بہادر (राय बहादुर), یاور جنگ (यावर जंग), سالار جنگ (सालार जंग)शरीर के अंगبدن (बदन — शरीर), خون (ख़ून — रक्त), ناخن (नाख़ून — नख), سینہ (सीना — वक्ष), دل (दिल — हृदय), چہرہ (चेहरा — मुख), گردن (गर्दन — ग्रीवा), زبان (ज़बान/ज़ुबान — जीभ/भाषा), حلق (हल्क़ — कण्ठ)स्थान‑नाम (प्रत्यय)آباد (आबाद), ستان (स्तान), گنج (गंज), باغ (बाग़), سرائے (सराय)संबंध‑शब्दداماد (दामाद — जामाता), بیوی (बीवी — पत्नी), شوہر (शौहर — पति), برادر (बिरादर — भ्राता), ہم زلف (हमज़ुल्फ़ — साढ़ू)भोजनسبزی (सब्ज़ी — शाक), نان (नान — रोटी), قورمہ (क़ोरमा — तरकारी), گوشت (गोश्त — मांस), قیمہ (कीमा — कुट्टित‑मांस), تندوری (तन्दूरी— भुना हुआ)वस्त्रپوشاک (पोशाक — वस्त्र), پاجامہ (पजामा), قمیض (क़मीज़ — अंगरखा), جیب (जेब — कोष्ठक), استر (अस्तर — अन्तरस्तर)गृहغسل خانہ (ग़ुसलख़ाना — स्नानगृह), پاخانہ (पाख़ाना — शौचालय), باورچی خانہ (बावर्चीख़ाना — रसोईघर), دروازہ (दरवाज़ा — द्वार), دیوار (दीवार — भीत)आभूषणزیور (ज़ेवर — आभूषण), گلبند (गुलबन्द — कण्ठहार), دست بند (दस्तबन्द — कंगन), پازیب (पाज़ेब — पायल)फलسیب (सेब — सेवफल), انار (अनार — दाडिम), انگور (अंगूर — द्राक्ष), نارنگی (नारंगी — नारङ्ग), بادام (बादाम), کشمش (किशमिश)सब्ज़ियाँشلجم (शलगम), کدو (क़द्दू — कूष्माण्ड), شکر قند (सक़रकन्द — शकरकन्द)वनस्पतिچنار (चिनार), حنا (हिना — मेहँदी), بنفشہ (बनफ़शा), گلاب (गुलाब — पाटल), نیلوفر (नीलोफ़र — नीलकमल), نرگس (नर्गिस)जीव‑जंतुشیر (शेर — सिंह), خرگوش (ख़रगोश — शशक), بلبل (बुलबुल), باز (बाज़ — श्येन), کبوتر (कबूतर — कपोत)व्यवसायدرزی (दर्ज़ी — सूचिक), حجام (हज्जाम — नाई), سبزی فروش (सब्ज़ी‑फ़रोश — शाक‑विक्रेता), خانساماں (ख़ानसामा — रसोइया)कृषिفصل (फ़सल — शस्य), پیداوار (पैदावार — उत्पादन), ربی (रबी), خریف (ख़रीफ़), آب پاشی (आबपशी — सिंचाई), نہر (नहर), زمین (ज़मीन — भूमि)कालروز (रोज़ — दिन), سال (साल — वर्ष), زمانہ (ज़माना — युग/काल)क़ानूनعدالت (अदालत — न्यायालय), قانون (क़ानून — विधि), دستور (दस्तूर — संविधान), مدعی (मुद्दई — वादी), وکیل (वकील — अधिवक्ता), موکل (मुवक्किल — ग्राहक), عہد نامہ (अहदनामा — वसीयतनामा), بیان (बयान — वक्तव्य), گرفتاری (गिरफ़्तारी — ग्रहण)प्रशासनسرکار (सरकार — शासन), دربار (दरबार — राजसभा), بادشاہ (बादशाह — सम्राट), وزیر اعظم (वज़ीर‑ए‑आज़म — प्रधानमन्त्री), پیشوا, تحصیلدار, ضلع (ज़िला — जनपद)लेखनقلم (क़लम — लेखनी), دوات (दवात — मस्यपात्र), سیاہی (स्याही — मस्य), کاغذ (काग़ज़ — पृष्ठ)धर्म (ग़ैर‑अरबी)روزہ (रोज़ा — उपवास), نماز, خدا (ख़ुदा — ईश्वर), پیغمبر (पैग़म्बर — प्रवक्ता), بہشت (बिहिश्त — स्वर्ग), دوزخ (दोज़ख़ — नरक), پیر (पीर — गुरु/सूफ़ी‑संत)मापनگز (गज़ — हस्त), میل (मील), من (मन — मण), سیر (सेर), مربع (मुरब्बा — वर्ग)सैन्यسپاہی (सिपाही — पदाति), فوج (फ़ौज — सेना), توپ (तोप), توپچی (तोपची), توپ خانہ (तोपख़ाना)विविधآئینہ (आईना — दर्पण), بازار (बाज़ार — पण्यालय), دوست (दोस्त — मित्र), شہر (शहर — नगर)अन्यविशेषण/क्रिया‑विशेषणبالکل (बिलकुल — पूर्णतः), گرم (गर्म — उष्ण), تازہ (ताज़ा — नवीन), آزاد (आज़ाद — स्वतन्त्र)अव्ययکہ (कि — यत्), خود (ख़ुद — स्वयं), اگر (अगर — यदि), مگر (मगर — परन्तु), لیکن (लेकिन — किन्तु), افسوس (अफ़सोस — खेद), شاباش (शाबाश — साधु) अप्रत्यक्ष उधार भारतीय उपमहाद्वीप में पहुँची फ़ारसी, अरबी और तुर्की भाषाओं में ऐतिहासिक कारणों से, विशेषतः ईरान और मध्य एशिया के सांस्कृतिक क्षेत्र के कारण — शब्द‑सम्पदा का एक बड़ा साझा भण्डार विद्यमान था। परन्तु सामान्यतः यह स्वीकार किया जाता है कि उपमहाद्वीप में फ़ारसी के व्यापक प्रभुत्व के कारण, इन तीनों भाषाओं के शब्दों के स्थानान्तरण का मुख्य माध्यम फ़ारसी ही बनी।Kuczkiewicz-Fraś 2012 235-236 भारतीय भाषाओं में उपस्थित अधिकांश अरबी शब्द फ़ारसी के द्वारा आये। उदाहरणार्थ, ऊपर “क़ानून” श्रेणी में दिये गये अनेक शब्द अरबी मूल के हैं — जैसे ‘‘قانون’’ (क़ानून — नियम), ‘‘عدالت’’ (अदालत — न्यायालय), ‘‘وکیل’’ (वकील — अधिवक्ता) — परन्तु भारतीय भाषाओं में ये फ़ारसी के माध्यम से पहुँचे। इसी प्रकार ‘‘لیکن’’ (लेकिन — किन्तु) और ‘‘قلم’’ (क़लम — लेखनी) जैसे सामान्य शब्द भी फ़ारसी के द्वारा ही आये। इसका कारण यह है कि उपमहाद्वीप में आने से पूर्व ही फ़ारसी ने अरबी शब्द‑संपदा का एक विशाल भाग अपने भीतर समाहित कर लिया था।Abidi Gargesh 2008 115-116Qutbuddin Tahera 2007 Arabic in India: A Survey and Classification of Its Uses, Compared with Persian https://www.jstor.org/stable/20297278 Journal of the American Oriental Society 127 3 328 0003-0279 20297278 अरबी का भारतीय भाषाओं पर सर्वाधिक प्रभाव धार्मिक शब्दावली में दिखाई देता है — जैसे ‘‘نماز’’ (नमाज़ — प्रार्थना), ‘‘روزہ’’ (रोज़ा — उपवास), ‘‘خدا’’ (ख़ुदा — ईश्वर) — और इनमें से भी अनेक शब्द फ़ारसी के माध्यम से ही आये। फ़ारसी के प्रभाव से अरबी शब्दों के अर्थों में परिवर्तन भी हुआ; उदाहरणार्थ ‘‘فرصت’’ (फ़ुर्सत) मूल अरबी में ‘अवसर’ के अर्थ में है, परन्तु भारतीय भाषाओं में यह ‘अवकाश’ के अर्थ में प्रयुक्त होता है।Qutbuddin Tahera 2007 Arabic in India: A Survey and Classification of Its Uses, Compared with Persian https://www.jstor.org/stable/20297278 Journal of the American Oriental Society 127 3 328 0003-0279 20297278Kuczkiewicz-Fraś 2012 236-237 इसी कारण फ़ारसी‑अरबी प्रभाव को प्रायः ‘फ़ारसी‑अरबी’ (Perso‑Arabic) कहा जाता है। तथापि यह भी ध्यान योग्य है कि उपमहाद्वीप में अरबी के सभी शब्द केवल फ़ारसी के माध्यम से ही आये हों — यह निश्चित नहीं कहा जा सकता; प्रत्यक्ष अरबी उधार भी सम्भव हैं।https://scholar.google.com/scholar?hl=en&as_sdt=0%2C5&q=Turkic+in+India+and+its+elements+in+Hindi&btnG= Turkic in India and its elements in Hindi Agnieszka. Kuczkiewicz-Fraś 2001 998228783 तुर्की शब्द भी कुछ मात्रा में फ़ारसी के द्वारा भारतीय भाषाओं में आये। यह निश्चित रूप से बताना कठिन है कि कौन‑सा तुर्की शब्द प्रत्यक्ष है और कौन‑सा फ़ारसी‑माध्यम से, क्योंकि मध्यकालीन भारत में तुर्की का सीमित प्रयोग भी विद्यमान था। इसके अतिरिक्त यह भी सम्भव है कि तुर्की ने कुछ फ़ारसी शब्दों को भारतीय भाषाओं में पहुँचाने में भूमिका निभायी हो, क्योंकि स्वयं तुर्की भी पूर्वकाल में फ़ारसीकरण की प्रक्रिया से गुज़रा था।https://scholar.google.com/scholar?hl=en&as_sdt=0%2C5&q=Turkic+in+India+and+its+elements+in+Hindi&btnG= Turkic in India and its elements in Hindi Agnieszka. Kuczkiewicz-Fraś 2001 998228783 समास फ़ारसी ने भारतीय भाषाओं में ऐसे अनेक समास दिए हैं जिनमें फ़ारसी शब्द या प्रत्यय भारतीय मूलों के साथ जुड़ते हैं: समास‑रचनाएँशब्द/प्रत्ययउदाहरण–ख़ाना (خانه — ख़ाना — गृह)जेलख़ाना (कारागार), डाकख़ाना (डाकगृह), जुआख़ाना (जुआ‑गृह)–कार (کار — कार — कर्ता)कलाकार , पत्रकार , जानकार –दार (دار — दार — धारक/युक्त)फलदार (फल‑युक्त), धुएँदार (धूम्र‑युक्त), देनदार (ऋणी), भागीदार –बाज़ (باز — बाज़ — प्रवृत्ति‑युक्त)चालबाज़, पतंगबाज़ , धोखेबाज़ बे– (بے — बे — बिना/विना)बेचैन, बेघर ना– (نا — ना — अ‑/अन‑)नासमझ (असमझ), नाकारा (निष्फल/निष्क्रिय)स्रोत:Abidi Gargesh 2008 117https://iranicaonline.org/articles/india-xviii-persian-elements-in-indian-languages Persian Elements in Indian Language Shackle Christopher Encyclopaedia Iranica ध्वनिविज्ञान फ़ारसी के उधार‑शब्दों के माध्यम से अनेक भारतीय भाषाओं में कुछ नये ध्वनियाँ प्रविष्ट हुईं — जैसे ق (क़), خ (ख़), غ (ग़), ز (ज़), ف (फ़)। इन ध्वनियों का स्थानीय भाषाओं में क्रमशः क, ख, ग, ज, फ के रूप में स्वदेशीकरण हुआ; उदाहरणार्थ ‘‘خود’’ (ख़ुद) प्रायः ‘‘खुद’’ के रूप में और ‘‘غلام’’ (ग़ुलाम) ‘‘गुलाम’’ के रूप में बोला जाता है। तथापि, मूल फ़ारसी ध्वनियाँ भी भारतीय भाषाओं में वैध मानी जाती हैं, और विशेषतः ज़ तथा फ़ का प्रयोग अत्यन्त सामान्य है। देवनागरी लिपि ने इन ध्वनियों को सूचित करने के लिए नुक़्ता का प्रयोग अपनाया — जैसे क़, ख़, ग़, ज़, फ़। उर्दू में ये ध्वनियाँ — विशेषतः ق، خ، غ — मूल उच्चारण (تلفّظ, तलफ़्फ़ुज़) के रूप में अधिक संरक्षित हैं। पंजाबी, बांग्ला आदि की औपचारिक शैलियों में, विशेषतः मुस्लिम समुदायों में, यही प्रवृत्ति देखी जाती है। इसके अतिरिक्त ध्वनि ش (श) का व्यापक प्रयोग भी फ़ारसी शब्दावली के प्रवेश के कारण हुआ, यद्यपि यह ध्वनि संस्कृत‑उत्पन्न शब्दों में भी पायी जाती है।Kuczkiewicz-Fraś 2012 148 व्याकरण फ़ारसी का एक सूक्ष्म किन्तु उल्लेखनीय प्रभाव व्याकरणिक संरचनाओं के रूप में भी दिखाई देता है। इनमें प्रमुख हैं: १. इज़ाफ़त (اضافت) उदाहरण: ‘‘سلامِ عشق’’ (सलाम‑ए‑इश्क़), ‘‘شیرِ بنگال’’ (शेर‑ए‑बंगाल) यह संरचना सम्बन्ध या विशेषण‑सम्बन्ध को सूचित करती है और भारतीय भाषाओं में मुख्यतः साहित्यिक एवं औपचारिक प्रसंगों में प्रयुक्त होती है। २. संयोजक –ओ– (و) उदाहरण: ‘‘روز و شب’’ (रोज़‑ओ‑शब) अर्थ: ‘और’ इन संरचनाओं का सर्वाधिक प्रयोग उर्दू में मिलता है, जो हिन्दुस्तानी का फ़ारसीकृत रूप है। ३. संयोजक ‘‘कि/के’’ (کہ) भारतीय भाषाओं में ‘‘कि’’ का व्यापक प्रयोग — अर्थ ‘यत्/कि’ — फ़ारसी ‘‘کہ’’ से आया है। ४. उर्दू में फ़ारसी पूर्वसर्ग उर्दू ने फ़ारसी के अनेक पूर्वसर्ग सीधे अपनाये, जैसे: ‘‘از’’ (अज़ — से) ‘‘با’’ (बा — को/साथ) ‘‘بر’’ (बर — पर) ‘‘در’’ (दर — में) तथा पूर्वसर्गीय वाक्यांश जैसे ‘‘بعد ازاں’’ (बाद अज़ाँ — पश्चात्)। ५. फ़ारसी बहुवचन‑प्रत्यय उर्दू में फ़ारसी बहुवचन‑निर्माण भी मिलता है: ‘‘–ان’’ (–आन) ‘‘–ها’’ (–हा) इन व्याकरणिक तत्त्वों तथा विस्तृत फ़ारसी‑अरबी शब्द‑संपदा के कारण उर्दू में पूर्णतः फ़ारसी वाक्य भी स्वाभाविक रूप से स्वीकार्य हैं। यह शैली मुख्यतः औपचारिक, शैक्षिक और समाचार‑भाषा में दिखाई देती है, न कि सामान्य बोलचाल में।https://iranicaonline.org/articles/urdu Urdu Matthews David Encyclopaedia Iranicahttps://iranicaonline.org/articles/india-xviii-persian-elements-in-indian-languages Persian Elements in Indian Language Shackle Christopher Encyclopaedia Iranica लिपि प्रणालियाँ फ़ारसी के व्यापक प्रभाव के कारण उपमहाद्वीप की अनेक भाषाओं ने फ़ारसी‑अरबी लिपि को अपनाया — जैसे: हिन्दुस्तानी (उर्दू रूप में) पंजाबी (शाहमुखी) कश्मीरी इन लिपियों में स्थानीय ध्वनियों को सूचित करने हेतु फ़ारसी‑अरबी वर्णमाला में कुछ अतिरिक्त अक्षर जोड़े गये।Abidi Gargesh 2008 119Bashir, Elena (2016). "Perso-Arabic adaptations for South Asian languages". In Bashir, Elena (ed.) The Languages and Linguistics of South Asia, Chapter 9. De Gruyter Mouton. pp. 803-804. फ़ारसी द्वारा लोकप्रिय की गयी नस्तालीक़ (نستعلیق) सुलेख‑शैली आज उर्दू लेखन की मुख्य शैली है, और पाकिस्तान में पंजाबी लेखन की भी प्रमुख शैली है।The Indo-Aryan languages 2007 Routledge Dhanesh Jain, George Cardona 978-1-135-79711-9 London 58–59 648298147https://iranicaonline.org/articles/urdu Urdu Matthews David Encyclopaedia Iranica भारत-ईरानी संस्कृति दोभाषी लिसान उद-दावत, फ़ारसी-अरब प्रभावित गुजराती भारतीय पत्थरों पर फ़ारसी शिलालेख (पुस्तक) नोट सन्दर्भ श्रेणी:फ़ारसी श्रेणी:भारत का सांस्कृतिक इतिहास