411 REFERENCE · Wikipedia
वसंतोत्सव
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
वसंतोत्सव का आरंभ माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी (वसंत पंचमी) से हो जाता है। यह दिन नवीन ऋतु के आगमन का सूचक है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से होली और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। लोग वासंती वस्त्र धारण कर गायन, वाद्य एवं नृत्य में विभोर हो जाते हैं। वसंत पंचमी का उत्सव मदनोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण तथा कामदेव इस उत्सव के अधिदेवता हैं।
कामशास्त्र में ‘सुवसंतक’ नामक उत्सव की चर्चा आती है। ‘सरस्वती कंठाभरण’ में लिखा है कि सुवसंतक वसंतावतार के दिन को कहते हैं। वसंतावतार अर्थात जिस दिन बसंत पृथ्वी पर अवतरित होता है। यह दिन वसंत पंचमी का ही है। ‘मात्स्यसूक्त’ और ‘हरी भक्ति विलास’ आदि ग्रंथों में इसी दिन को बसंत का प्रादुर्भाव दिवस माना गया है। इसी दिन मदन देवता की पहली पूजा का विधान है। कामदेव के पंचशर (शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध) प्रकृति संसार में अभिसार को आमंत्रित करते हैं।http://www.bhaskar.com/2008/02/11/0802110026_edit.html संवेदनहीन समाज के लिए संजीवनी 8 मार्च 2008 एचटीएमएल दैनिक भास्कर https://web.archive.org/web/20080830000828/http://www.bhaskar.com/2008/02/11/0802110026_edit.html 30 अगस्त 2008 live चैत्र कृष्ण पंचमी को वसंतोत्सव का अंतिम दिन रंग खेलकर रंग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। हर्षवर्धन के बाद तक, अर्थात सातवीं-आठवीं शताब्दी तक वसन्तोत्सव मनाए जाने के प्रमाण हैं। "वसन्तोत्सव", वसन्त ऋतु के दिनों में एक महीने का उत्सव, जिसमें विवाह योग्य युवक-युवतियाँ अपनी इच्छा से अपना जीवनसाथी चुनती थीं और समाज उसे पूरी प्रतिष्ठा के साथ मान्यता देता था।
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय पर्व
श्रेणी:होली