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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

बुलू इमाम

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बुलू इमाम (जन्म: 3 अगस्त 1942, हज़ारीबाग, झारखंड) भारत के प्रख्यात पर्यावरणविद्, पुरातत्व शोधकर्ता, लेखक और जनजातीय कला संरक्षण के अग्रणी व्यक्तित्व हैं। वे विशेष रूप से झारखंड की सोहराय और कोहबर भित्ति चित्र परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए जाने जाते हैं। एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे इमाम ने प्रारंभिक जीवन में वन्यजीवन और शिकार की परंपरा को अपनाया, परंतु कोयला खनन से जंगलों के विनाश को देखकर वे पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर बचाने के आंदोलन से जुड़ गए। हज़ारीबाग क्षेत्र में प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और पत्थर उपकरणों की खोज और दस्तावेजीकरण ने उन्हें आदिवासी कला की प्राचीन जड़ों पर गहन शोध के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ट्राइबल वुमेन आर्टिस्ट्स’ कोऑपरेटिव (Tribal Women Artists’ Cooperative (TWAC)) की स्थापना कर ग्रामीण महिला कलाकारों को संगठित किया और उनकी पारंपरिक कला को घरों की दीवारों से निकालकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों तक पहुँचाया। हज़ारीबाग में स्थापित संस्कृति संग्रहालय उनके दशकों के शोध, संग्रह और संरक्षण कार्य का केंद्र है। उनके प्रयासों से न केवल आदिवासी कला को वैश्विक पहचान मिली, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी अधिकारों के मुद्दों को भी व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री (2019) सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाज़ा गया। बुलू इमाम का कार्य कला, पर्यावरण और इतिहास—तीनों को एक जीवित सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखने की प्रेरणा देता है। Bulu Imam: A Lifetime of Working with Adivasi Art and the Environment https://www.sahapedia.org/bulu-imam-lifetime-working-adivasi-art-and-the-environment Sahapedia 14 February 2026 मई 2026 InternetArchiveBot इन्हें भी देखें जस्टिन इमाम सन्दर्भ श्रेणी:1942 में जन्मे लोग श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:पद्मश्री, 2019