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411 समाचार
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प्रतुलचन्द्र गांगुली

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प्रतुलचन्द्र गाङ्गुली thumb|महान क्रान्तिकारी प्रतुलचन्द्र गाङ्गुली प्रतुलचन्द्र गांगुली 16 अप्रैल 1894 चालताबाड़ी ग्राम, चांदपुर, नारायणगंज (इस समय बांग्लादेश में) ५ जुलाई १९५७ कोलकाता बंगाली भारतीय हिन्दू भारतीय भारत ब्रिटिश विरोधी स्वतंत्रता आन्दोलन के नायक स्वाधीनता के पूर्व अनुशीलन समिति, भारतीय राष्ट्रीय कंग्रेस, प्रतुल चंद्र गांगुली (जन्म 16 अप्रैल 1894 - मृत्यु 5 जुलाई 1957) भारतीय उपमहाद्वीप के ब्रिटिश विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन में एक प्रमुख क्रांतिकारी थे। आरंभिक जीवन प्रतुल चंद्र गांगुली का जन्म बंगाल के नारायणगंज के चांदपुर के पास चालताबाड़ी गांव में अपने मामा के घर हुआ था। विद्यार्थी जीवन के दौरान ही उन्होंने अनुशीलन समिति की नारायणगंज शाखा में अपने क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत की। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से एक नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। 1908-09 में उन्होंने अपने क्रांतिकारी प्रयासों को विस्तार देने के लिए घर छोड़ दिया। क्रांतिकारी जीवन अनुशीलन समिति की ढाका शाखा के मुख्य आयोजक पुलिन बिहारी दास की गिरफ्तारी के बाद, प्रतुल चंद्र गांगुली और त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती ने अनुशीलन समिति का कार्यभार संभाला और समिति का पुनर्गठन किया। 1914 में बरिशाल षडयंत्र मामले में उन पर अभियोग चला और उन्हें दस वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई। परन्तु १० वर्ष की अवधि पूरी होने के पहले ही उन्हें छोड़ दिया गया था और 1924 में फिर से गिरफ्तार किया गया था। वे ढाका जिला कांग्रेस समिति, बंगाल कांग्रेस समिति और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अध्यक्ष बने।https://peoplepill.com/people/pratul-chandra-ganguli/ Pratul Chandra Ganguli: Indian revolutionary (1884-1957) - Biography and Life PeoplePill peoplepill.com en-US 2020-03-28 1929 में वे ढाका शहर से बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए थे। 1930 में उन्होंने राजशाही में बंगाल प्रांतीय कांग्रेस के सम्मेलन की अध्यक्षता की। उन्हें पुनः गिरफ्तार किया गया और 1938 तक बिना मुकदमे के हिरासत में रखा गया। 1939 में पूर्वी बंगाल नगरपालिका निर्वाचन क्षेत्र से एम० एल० ए० चुने गए। जेल में उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया। उन्होंने जेल में अनशन किया जिसका साथ सुभाष चंद्र बोस ने भी दिया। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद सुभाष चंद्र के छिपकर भारत से बाहर बच निकलने पर उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया और 1946 तक विभिन्न जेलों में कैद रखा गया। 1947 में भारत के विभाजन के बाद, वे कलकत्ता आ गये और १९५७ में अपनी मृत्यु तक वहीं रहे।সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান, প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ২৯২, 978-81-7955-135-6 सन्दर्भ श्रेणी:1884 में जन्मे लोग श्रेणी:१९५७ में निधन श्रेणी:1894 में जन्मे लोग श्रेणी:Pages using infoboxes with thumbnail images