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सईद अहमद अकबराबादी
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Islam Saeed Ahmad Akbarabadi Saeed Ahmad Akbarabadi.jpg 1908 Agra, United Provinces, British India yes 1985 05 24 1908 Karachi, Sindh, Pakistan
सईद अहमद अकबराबादी (१९०८-२४ मई १९८५) एक भारतीय इस्लामी विद्वान और उर्दू भाषा के लेखक थे जिन्होंने नदवातुल मुसन्नीफीन की सह-स्थापना की थी। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में धर्मशास्त्र संकाय के डीन के रूप में कार्य किया।
अकबराबादी जामिया कास्मिया मदरसा शाही, दारुल उलूम देवबंद, सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली और ओरिएंटल कॉलेज, लाहौर के पूर्व छात्र थे। उन्होंने जामिया इस्लामिया तालीम, मदरसा-ए-आलिया, फतेहपुरी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, कालीकट विश्वविद्यालय और मैकगिल विश्वविद्यालय में पढ़ाया। उन्होंने फेहम-ए-कुरान, ग़ुलामन -ए-इस्लाम, सिद्दीक-ए-अकबर और मुसलमानो का उरूज-ओ-ज़वाल सहित कई पुस्तकें लिखीं। उनके छात्रों में मुहम्मद जिया-उल-हक और मुशीर-उल-हक़ शामिल हैं।
जन्म और शिक्षा
सईद अहमद अकबराबादी का जन्म 1908 में औपनिवेशिक भारत के आगरा शहर में हुआ था।https://archive.org/download/2VolumeBookOnTheHistoryOfDarAlUlumDeoband/HistoryOfTheDarulUloomDeoband-VolumeTwo1981.pdf History of The Dar al-Ulum Deoband (Volume 2) Syed Mehboob Rizwi Idara-e-Ehtemam, Dar al-Ulum Deoband 1981 112 Prof. Murtaz Husain F. Quraishi 5 June 2019Syed Mehboob Rizwi. History of The Dar al-Ulum Deoband (Volume 2) (PDF). Translated by Prof. Murtaz Husain F. Quraishi (1981 ed.). Idara-e-Ehtemam, Dar al-Ulum Deoband. p. 112. Retrieved 5 June 2019.Nida'e Darul Uloom Waqf Mufti Ubaid Anwar Shah Qaiser Darul Uloom Waqf, Deoband Rabi-ut-Thaani, 1438 49–53 ur Maulana Saeed Ahmad Akbarabadi: Ek Sahib-e-Qalam ShakhsiyatMufti Ubaid Anwar Shah Qaiser. "Maulana Saeed Ahmad Akbarabadi: Ek Sahib-e-Qalam Shakhsiyat". Nida'e Darul Uloom Waqf (in Urdu) (Rabi-ut-Thaani, 1438 ed.). Darul Uloom Waqf, Deoband. pp. 49–53.
Category:CS1 Urdu-language sources (ur) उन्होंने घर पर ही अपनी प्राथमिक शिक्षा का अध्ययन किया, फिर उन्होंने जामिया कास्मिया मदरसा शाही में पढ़ाई की, और बाद में दारुल उलूम देवबंद से स्नातक की उपाधि हासिल की। वहाँ उन्होंने अनवर शाह कश्मीरी, शब्बीर अहमद उस्मानी और इब्राहिम बलयावी के अधीन अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने ओरिएंटल कॉलेज, लाहौर में विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए। इस कार्यकाल के दौरान, अकबराबादी को मदरसा-ए-आलिया, फतेहपुरी में प्राच्य भाषाओं के शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने अरबी दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की।
अपनी पढ़ाई ओरिएंटल कॉलेज, लाहौर में पूरी करने के बाद, अकबराबादी ने जामिया इस्लामिया तालिमुद्दीन, दाभेल में पढ़ाया। इसके बाद उन्होंने मदरसा-ए-आलिया, फतेहपुरी में प्राच्य भाषाओं को ज्ञान दिया । दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से एम. ए. पूरा करने के बाद, वे उसी कॉलेज में लेक्चरर बन गए। इस बीच मुहम्मद जिया-उल-हक (पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति) उनके छात्र बन गए। 1938 में अकबराबादी ने अतीकुर रहमान उस्मानी, हामिद अल-अन्सारी गाजी और हिफ़ज़ुर रहमान सेओहरवी के साथ नदवतुल मुसन्नीफ़िन की स्थापना की।Darul Uloom Deoband Ka Sahafati ManzarNama Nayab Hasan Qasmi Idara Tehqeeq-e-Islami, Deoband 176, 198 उन्हें कलकत्ता में मदरसा आलिया के प्रधान पद की पेशकश की गई थी, जिसका कार्यभार उन्होंने २ फरवरी १९४९ से संभाला था।Akbarabadi Saeed Ahmad February 1949 نظرات https://articles.rasailojaraid.com/Resources/ArticleFiles/20/1868/27497.pdf Burhan ur Nadwatul Musannifeen 2 2 2–4 12 February 2023 12 फ़रवरी 2023 https://web.archive.org/web/20230212142538/https://articles.rasailojaraid.com/Resources/ArticleFiles/20/1868/27497.pdf dead
अकबरबादी १९५८ में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में धर्मशास्त्र संकाय के डीन बने। उन्होंने एक कमजोर संकाय को बदल दिया और स्नातक शिक्षण और डॉक्टरेट कार्यक्रम शुरू किया। उन्होंने अनवर शाह कश्मीरी पर अपनी और संकाय की पहली डॉक्टरेट थीसिस की देखरेख की, जिसे बाद में १९७४ में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित किया गया था।
अकबराबादी को विल्फ्रेड कैंटवेल स्मिथ द्वारा कनाडा में मैकगिल विश्वविद्यालय में १९६१और १९६३ के दौरान, इस्लामिक अध्ययन संस्थान में विजिटिंग प्रोफेसर बनने के लिए आमंत्रित किया गया था।Haq 2012 21-22 संस्थान में उनके छात्रों में कश्मीर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति मुशीर-उल-हक शामिल थे।Haq 2012 20 वह १९७२ में एएमयू से सेवानिवृत्त हुए।Haq 2012 25
उसके बाद वे कालीकट विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर रहे और फिर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी विजिटिंग प्रोफेसर रहे। दारुल उलूम देवबंद ने उन्हें अपने नए शोध विभाग, शेखुल हिंद अकादमी का निदेशक बनाया, एक पद जो उन्होंने २५ दिसंबर १९८२ से २४ मई १९८५ को अपनी मृत्यु तक संभाला।Haq 2012 18
साहित्यिक कृतियाँ
उन्होंने अपने लिखने का सिलसिला दवातुल हक के साथ शुरू किया।Qamruzzaman Maulavi Wahiduzzaman Karanvi his contribution to Arabic language and literature in India Aligarh Muslim University ar उनके कार्यों में शामिल हैंः https://www.worldcat.org/identities/lccn-n84031364/ Profile of Saeed Ahmad Akbarabadi on WorldCat WorldCat 2 January 2021
अल-रीक फी अल-इस्लाम
फहम-ए-कुरानhttps://www.rekhta.org/ebook-detail/islami-uloom-mein-nadwat-ul-musannifin-ki-khidmaat-ek-mutala-abdul-waris-khan-ebooks Islāmi Uloom mai Nadwatul Musannifeen ki Khidmāt: Ek mutāla Khan Abdul Waris 1999 Islamic Book Foundation New Delhi 40–42 The contribution of Nadwatul Musannifeen in Islamic studies: A study
गुलामन -ए-इस्लाम
हिंदुस्तान की शरीयत हैसियात
हिंद पाकिस्तान की तहरीक-ए-अज़ादी और ʻउलाम 'ए-हक़ का सियासी मु' अक़्फ़
खुतबात -ए-इकबाल एक नज़र
मुसल्मानो का उरूज-ओ-ज़वाल
सिद्दीक-ए-अकबर
मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी और उनके नाकिद
उस्मान जिन्नुरैन
वही इलाहीhttps://www.rekhta.org/ebook-detail/islami-uloom-mein-nadwat-ul-musannifin-ki-khidmaat-ek-mutala-abdul-waris-khan-ebooks Islāmi Uloom mai Nadwatul Musannifeen ki Khidmāt: Ek mutāla Khan Abdul Waris 1999 Islamic Book Foundation New Delhi 44–45 The contribution of Nadwatul Musannifeen in Islamic studies: A study
विरासत
अकबराबादी के अध्ययन में ये शामिल हैंः
मौलाना सईद अहमद अकबराबादीः डॉ मसूद आलम कासमी द्वारा अहवाल -आसार
मौलाना सईद अहमद अकबराबादीः डॉ. कैसर हबीब हाशमी द्वारा हयात-ओ-खिदमत
मौलाना सईद अहमद अकबराबादी और उनकी अदबी खिदमत मिस जहां आरा द्वारा (पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर में प्रस्तुत) ।
यह भी देखें
सैयद महबूब रिज़वी
मुहम्मद तकी अमीनी
श्रेणी:देवबंदी लोग
श्रेणी:१९८५ में निधन
श्रेणी:1908 में जन्मे लोग
श्रेणी:20वीं सदी के भारतीय मुसलमान